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न्याय

सोनिया मल्होत्रा, जिन्हें कानून की रानी के नाम से जाना जाता है, एक बड़ी लॉयर हैं। वह विधायक लोकेश सिंह के लिए एक केस तैयार कर रही हैं। उधर, उनकी अपनी बेटी दीया और मम्मी रचना को उनकी ही क्लाइंट पूजा सिंह परेशान कर रही है। सोनिया अपनी असली पहचान बताती हैं, लेकिन पूजा को उन पर भरोसा नहीं होता। इसके बजाय, पूजा सोनिया और उनके पूरे परिवार को और भी बुरी तरह से बदतमीज़ी झेलने पर मजबूर कर देती है...
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इस एपिसोड की समीक्षा

अस्पताल का वो डरावना सच

जब डॉक्टर ने उसे बचाया और वह होश में आई, तो उसका रोना दिल दहला देने वाला था। लेकिन फोन की घंटी बजते ही उसका चेहरा बदल गया। लगता है खतरा अभी टला नहीं है। न्याय में दिखाया गया यह मोड़ बहुत ही सस्पेंस से भरा है। क्या वह फिर से उसी जाल में फंसने वाली है?

पार्टी में बदलाव की आहट

वही जख्मी लड़की अब काले सूट में इतनी खूबसूरत और ताकतवर लग रही थी! पार्टी में उसकी एंट्री देखकर लग रहा था कि अब शिकार नहीं, शिकारी बनकर आई है। न्याय की यह कायापलट देखकर मजा आ गया। बदला लेने का वक्त आ गया है।

गुलाबी वाली की एंट्री

पार्टी में जब वह गुलाबी ड्रेस और फर कोट पहनकर आई, तो सबकी सांसें रुक गईं। लेकिन उसकी आंखों में वह पुरानी चालाकी अभी भी बाकी थी। न्याय में यह टकराव बहुत ही जबरदस्त होने वाला है। क्या वह फिर से अपनी चाल चल पाएगी?

बूढ़े आदमी की हैरानी

वह बुजुर्ग आदमी जो पार्टी का इंतजाम कर रहा था, जब उसने जख्मी लड़की को देखा तो उसके होश उड़ गए। उसे यकीन नहीं हो रहा था कि वह जिंदा है। न्याय में ऐसे रिएक्शन शो को और भी दिलचस्प बनाते हैं। असली खेल तो अब शुरू हुआ है।

दोस्त या दुश्मन?

शुरुआत में जो लड़की दोस्त बनकर आई थी, वही सबसे बड़ी दुश्मन निकली। उसने पीठ पीछे वार किया और मजे लेती रही। न्याय की कहानी हमें सिखाती है कि हर मुस्कुराते चेहरे पर भरोसा नहीं करना चाहिए। धोखा सबसे करीबी से ही मिलता है।

डॉक्टर का रोल महत्वपूर्ण

डॉक्टर ने न सिर्फ उसकी जान बचाई, बल्कि उसे हिम्मत भी दी। जब वह रो रही थी तो डॉक्टर का सहारा बहुत मायने रखता था। न्याय में ऐसे सपोर्टिव किरदार कहानी को संतुलित रखते हैं। उम्मीद की किरण वहीं से आती है।

काला सूट और सफेद पट्टी

उसके चेहरे पर पट्टी थी लेकिन आंखों में आग थी। काले सूट में वह किसी एक्शन हीरोइन से कम नहीं लग रही थी। न्याय में यह लुक बहुत ही पावरफुल था। अब वह चुप नहीं बैठने वाली, यह पक्का है।

फोन कॉल का राज

अस्पताल में जब फोन बजा और उसने बात की, तो उसकी आवाज में डर नहीं, गुस्सा था। लगता है उसने कुछ प्लान बना लिया है। न्याय की कहानी में यह फोन कॉल टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। अब पलटवार होगा।

सीढ़ियों वाला सीन

जब वह सीढ़ियों से उतर रही थी और पीछे गुलाबी वाली आ रही थी, तो माहौल में तनाव साफ दिख रहा था। न्याय का यह सीन बहुत ही सिनेमैटिक था। दो दुश्मन एक छत के नीचे, अब क्या होगा?यह देखने के लिए बेताब हूं।

गुलाबी पोशाक में शैतान

वह लड़की जो गुलाबी ड्रेस पहने फोन पर हंस रही थी, उसकी आंखों में कितनी बर्बरता थी! पीछे जख्मी दोस्त तड़प रही थी और उसे कोई फर्क नहीं पड़ा। न्याय की कहानी में ऐसे विलेन किरदार देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। असली दुश्मन वही होता है जो आपके दर्द पर मुस्कुराता है।