इस शो में दिखाया गया है कि कैसे तकनीक इंसानों को नियंत्रित कर सकती है। वैज्ञानिकों की नजरें हर पल उस पर टिकी रहती हैं। मेरा परफेक्ट एंड्रॉइड में यह डर बहुत अच्छे से दिखाया गया है। जब वह सफेद कमरे में चलता है तो लगता है जैसे वह किसी नई दुनिया में कदम रख रहा हो। वैज्ञानिकों के चेहरे पर चिंता साफ दिख रही थी और माहौल में तनाव था।
क्या मशीनों में भी भावनाएं हो सकती हैं? इस कहानी में यह सवाल बहुत गहराई से उठाया गया है। स्क्रीन पर जब फॉर्मेट कंप्लीट लिखा आया तो रोंगटे खड़े हो गए। मेरा परफेक्ट एंड्रॉइड का हर सीन एक पहेली की तरह है। बारिश में भीगी हुई आगंतुक का आना कहानी में नया मोड़ लाता है। सब कुछ इतना रहस्यमयी है कि देखने वाला हैरान रह जाता है।
वह सफेद कमरा जहां वह अकेला चल रहा था, बहुत प्रभावशाली था। ऐसा लग रहा था जैसे वह अपनी पहचान तलाश रहा हो। वैज्ञानिक उसे देख रही थीं जैसे कोई प्रयोगशाला का जानवर हो। मेरा परफेक्ट एंड्रॉइड में इमोशन सिस्टम ऑफ होने का जिक्र दिलचस्प था। क्या वह सच में बेजुबान है या कुछ छिपा रहा है यह जानना जरूरी है।
भविष्य की दुनिया कैसी होगी, इसका अंदाजा इस शो से लगाया जा सकता है। कंट्रोल रूम में बैठे लोग सब कुछ मॉनिटर कर रहे हैं। उस के शरीर पर लगे सेंसर्स देखकर अजीब लगा। मेरा परफेक्ट एंड्रॉइड में दिखाया गया है कि इंसानियत खत्म होती जा रही है। आखिरी सीन में वह तौलिये में खड़ा था, बिल्कुल नया जन्म लिया हो।
जब उसकी आंखें खुलीं तो लगा जैसे किसी नई कहानी की शुरुआत हुई हो। नीली रोशनी वाले इयरप्लग बहुत अजीब लग रहे थे। वैज्ञानिकों के बीच की बातचीत से पता चलता है कि सब कुछ प्लान के मुताबिक नहीं है। मेरा परफेक्ट एंड्रॉइड में सस्पेंस बना हुआ है। बारिश वाले सीन में आगंतुक का चेहरा बहुत उदास था और कुछ कह रहा था।
क्या हम अपनी मर्जी से जी रहे हैं या कोई हमें कंट्रोल कर रहा है? यह सवाल इस शो में बार बार आता है। स्क्रीन पर ग्राफ़ और डेटा देखकर लगता है कि वह सिर्फ एक नंबर है। मेरा परफेक्ट एंड्रॉइड में इमोशन सिस्टम को बंद करना बहुत चौंकाने वाला था। वैज्ञानिक की नजरों में कुछ छिपा हुआ था जो खतरनाक लग रहा था।
काले रंग के ढांचे जो ऊपर से गिर रहे थे, बहुत डरावने लग रहे थे। वह नीचे खड़ा होकर ऊपर देख रहा था जैसे किसी सजा का इंतजार हो। मेरा परफेक्ट एंड्रॉइड का विजुअल स्टाइल बहुत यूनिक है। जब वह पॉड से बाहर आता है तो माहौल बदल जाता है। वैज्ञानिकों को अपनी बनाई चीज से डर लग रहा है और वे घबरा रहे हैं।
बारिश में भीगकर जब वह आगंतुक अंदर आई तो माहौल गंभीर हो गया। उसके कपड़े गीले थे और चेहरे पर घबराहट साफ दिख रही थी। उसने स्विच दबाया लेकिन लाइट नहीं जली। मेरा परफेक्ट एंड्रॉइड में यह सीन बहुत टेंशन बनाता है। शायद वह उस प्रोटोटाइप को बचाने आई है या कुछ और मकसद है जो अभी सामने आएगा।
पूरे लैब में सन्नाटा था बस मशीनों की आवाज आ रही थी। वैज्ञानिक की उंगलियां कीबोर्ड पर तेजी से चल रही थीं। उसे देखकर लग रहा था कि वह कुछ गलत होने का अंदेशा लगा रही है। मेरा परफेक्ट एंड्रॉइड में हर डिटेल पर ध्यान दिया गया है। उस प्रोटोटाइप की सांसें धीमी थीं पर वह जिंदा था और सब देख रहा था।
यह कहानी अभी शुरू ही हुई है लेकिन इसमें बहुत गहराई है। वह पात्र जो पॉड में लेटा था, अब कमरे में खड़ा है। उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं था। मेरा परफेक्ट एंड्रॉइड में आगे क्या होगा यह जानने की उत्सुकता बढ़ रही है। वैज्ञानिकों को अपने ही बनाए हुए पर भरोसा नहीं है और वे डरे हुए हैं।
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