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असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंदवां28एपिसोड

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असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंद

स्नातक के दिन पुनर्जन्म लेकर, इस घर की असली बेटी अपनी कपटी बहन के दिए नकली कंगन को देखकर बस मुस्कुरा दी। पिछले जन्म में, इसी धोखे के कारण उसके अपने ही माता-पिता और सगे भाई ने उससे घृणा की थी, और भाई ने उसे अमानवीय यातनाएं देकर तबाह कर दिया था। लेकिन अब पासा पलट चुका है! इस नए जन्म में, वह अपना हक मांगने नहीं, बल्कि उस निर्दयी परिवार को पूरी तरह से बर्बाद करने आई है। क्या एक ठुकराई हुई बेटी अपने ही खून से इस खौफनाक प्रतिशोध को पूरा कर पाएगी?
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इस एपिसोड की समीक्षा

तनावपूर्ण प्रसारण

सीधा प्रसारण वाला दृश्य बहुत तनावपूर्ण था। चश्मे वाले आदमी की आंखों में डर साफ दिख रहा था। असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंद की कहानी में यह मोड़ बहुत जरूरी था। सामाजिक माध्यम का दबाव कितना होता है, यह देखकर रोंगटे खड़े हो गए।

बदलाव की घड़ी

नारंगी स्वेटर वाली महिला की प्रतिक्रिया देखकर लगा कि कुछ बड़ा होने वाला है। उसने फोन उठाया और सब बदल गया। असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंद में हर किरदार का नाता गजब का है। बाहर का माहौल और अंदर की कहानी मिलकर जादू कर रहे हैं।

सड़क का सच

सड़क पर हुई बदसलूकी देखकर गुस्सा आ गया। बेचारी लड़की पर सब्जियां फेंकना कितना गलत है। असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंद ने समाज की कड़वी सच्चाई दिखाई। उस लड़की की मासूमियत दिल को छू गई। कोई भी ऐसा व्यवहार नहीं सह सकता।

नायिका का आगमन

काले कपड़े वाली महिला का आगमन नायिका वाला था। मुखौटा के पीछे छिपा चेहरा और वो आंखें। असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंद का यह दृश्य सबसे श्रेष्ठ था। उसने बिना कुछ बोले सबको चुप करा दिया। असली ताकत शांति में होती है।

गहरी पटकथा

दृश्य में दिखाया गया हर भाव बहुत गहरा था। सीधा प्रसारण से लेकर सड़क के झगड़े तक। असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंद की पटकथा बहुत मजबूत लग रही है। किरदारों के बीच की कशमकश देखने लायक है। मैं अगला भाग देखने के लिए बेताब हूं।

भावनात्मक सफर

उस लड़की की आंखों में आंसू और डर साफ झलक रहा था जब वह जमीन पर गिरी। असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंद में अभिनय बहुत स्वाभाविक है। ऐसे दृश्य देखकर लगता है कि कहानी असली जीवन से जुड़ी है। बहुत ही भावनात्मक सफर है यह।

रहस्यमय मोड़

मुखौटा उतारने वाला दृश्य सबसे रहस्यमय था। क्या वह वही महिला है जो सीधा प्रसारण में थी? असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंद के कहानी में मोड़ दिमाग घुमा देने वाले हैं। हर दृश्य के बाद नया सवाल खड़ा हो जाता है। रहस्य बना हुआ है।

मजबूत व्यक्तित्व

भीड़ का व्यवहार और फिर उस एक महिला का हस्तक्षेप। असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंद ने अच्छे और बुरे का फर्क दिखाया। काली पोशाक वाली महिला का व्यक्तित्व बहुत मजबूत लग रहा है। वह सबको सबक सिखाने वाली है।

बेहतरीन बनावट

परिवेश और स्थान बहुत असली लग रहे हैं। साधारण गली में हुई यह घटना दिल दहला देने वाली थी। असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंद की बनावट भी अच्छी है। हर बारीकियों पर ध्यान दिया गया है। देखने में बहुत मजा आ रहा है।

अगले भाग का इंतज़ार

कहानी में मोड़ का तड़का लगा हुआ है। कल क्या होगा कोई नहीं जानता। असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंद का हर भाग नया रहस्य लेकर आता है। किरदारों के रिश्ते क्या हैं, यह जानने की जिज्ञासा बढ़ रही है। बेहतरीन कार्यक्रम है।