उसका बेटा, उसका पाप में यह सुनहरा सेब सिर्फ एक फल नहीं बल्कि तबाही का कारण बना। रानी का गुस्सा और योद्धा की हैरानी देखकर लगता है कि ओलंपस में अब युद्ध होने वाला है। हर किसी की आंखों में लालच साफ दिख रहा था। राजा के सिंहासन पर बैठते ही माहौल बदल गया। बिजली कड़की और सब चुप हो गए। यह दृश्य बहुत ही शानदार था।
सुनहरी पोशाक वाली रानी और सफेद लिबास वाली महारानी के बीच की तनातनी देखते ही बनती थी। उसका बेटा, उसका पाप कहानी में परिवार के रिश्ते कैसे टूटते हैं, यह दिखाया गया है। जब उंगलियां एक दूसरे की तरफ उठीं, तो लगा कि अब कोई बचने वाला नहीं है। राजमहल की दीवारें भी इनकी चीखों से कांप रही थीं। बहुत ही रोमांचक दृश्य था।
जिस योद्धा के शरीर से खून बह रहा था, उसकी आंखों में हार नहीं बल्कि जिद दिख रही थी। उसका बेटा, उसका पाप में ऐसे किरदार ही कहानी को आगे बढ़ाते हैं। वह घायल होकर भी खड़ा रहा, यह उसकी ताकत को दिखाता है। राजा के फैसले का इंतजार सबको था। क्या उसे सजा मिलेगी या माफी? यह सवाल हर किसी के मन में था।
सिंहासन पर बैठे राजा की आवाज में वजन था। जब उन्होंने अपनी मुट्ठी भींची, तो लगा कि अब निर्णय सुनाया जाएगा। उसका बेटा, उसका पाप में यह पल सबसे अहम था। छत पर बादल गरजे और रोशनी नीचे आई, यह दृश्य बहुत शानदार था। सबकी सांसें थम गई थीं। राजा के चेहरे पर कोई भाव नहीं था, जो डरावना था।
कहानी के अंत में योद्धा की मुस्कान ने सबको चौंका दिया। उसका बेटा, उसका पाप में ऐसा मोड़ उम्मीद नहीं था। शायद उसने कुछ योजना पहले से बना रखी थी। जो उसे हारा हुआ समझ रहे थे, वही असल में जीतने वाला निकला। यह कहानी हमें सिखाती है कि दिखावा धोखा दे सकता है। बहुत ही शानदार अंत था।
महल के स्तंभ और सुनहरी सजावट देखकर आंखें चौंधिया गईं। उसका बेटा, उसका पाप की बनावट बहुत शानदार है। हर दृश्य एक चित्र जैसा लग रहा था। जब राजा के पीछे बिजली कड़की, तो रोंगटे खड़े हो गए। ऐसे दृश्य बड़े पर्दे पर देखने चाहिए। कलाकारों के कपड़े भी उसी युग के अनुसार थे। बहुत मेहनत दिख रही है।
जब सबने एक साथ उंगली उठाई, तो उस योद्धा का दिल टूट गया होगा। उसका बेटा, उसका पाप में विश्वासघात को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है। परिवार में ही दुश्मन छिपे होते हैं, यह बात साबित हुई। रानी की आंखों में आंसू और गुस्सा दोनों थे। यह भावनात्मक दृश्य दिल को छू गया। कहानी बहुत गहरी है।
वह सुनहरा सेब किसने दिया और क्यों दिया, यह रहस्य बना हुआ है। उसका बेटा, उसका पाप में इसी सेब ने सबकी नींद उड़ा दी। शायद यह किसी श्राप की शुरुआत थी। जब तक यह सेब सामने था, तब तक शांति नहीं मिली। अब जब राजा ने फैसला सुना दिया, तो शायद अंत पास है। रहस्य सुलझता जा रहा है।
सफेद पोशाक वाली महारानी का व्यक्तित्व बहुत प्रभावशाली था। उसका बेटा, उसका पाप में उनका किरदार सबसे ताकतवर लग रहा था। जब वह सिंहासन से उठीं, तो सबकी नजरें उन पर थीं। उनकी आवाज में हुकूमत थी। उन्होंने किसी से डरने की जरूरत नहीं समझी। यह किरदार महिला शक्ति का प्रतीक लगा। बहुत ही दमदार अभिनय था।
इस नाटक को देखते समय हर पल सस्पेंस बना रहा। उसका बेटा, उसका पाप ने निराश नहीं किया। न तो कहानी धीमी थी और न ही अभिनय खराब। हर किरदार ने अपना काम अच्छे से किया। विशेष रूप से राजा का क्रोध और योद्धा का दर्द यादगार रहा। यह कहानी लंबे समय तक याद रहेगी। सबको जरूर देखना चाहिए।