PreviousLater
Close

गिरोह की आखिरी मालकिनवां23एपिसोड

2.0K2.0K

गिरोह की आखिरी मालकिन

नायिका अपने प्रेमी को बचाने के लिए जेल की गाड़ी लूट लेती है और काली जेल में ठूंस दी जाती है। वहाँ उसे एक रहस्यमयी विरासत मिलती है, और अपनी ताकत से सभी कैदियों को वश में कर लेती है। सब उसे 'गिरोह की मालकिन' कहकर बुलाने लगते हैं। जब वह जेल से बाहर निकलकर सागर नगर लौटती है, तो उसे पता चलता है कि उसका मंगेतर पहले ही शादी कर चुका है। गुस्से में वह उन सबको सबक सिखाती है जो उसे तुच्छ समझते थे। लोग उसे हल्के में लेते हैं, पर उन्हें नहीं पता कि उसका एक और रूप है – स्वतंत्र गिरोह की मालकिन।
  • Instagram
इस एपिसोड की समीक्षा

खामोश ताकत का राज

काले कोट वाली महिला की खामोशी सबसे डरावनी है। जब सब लोग घुटनों पर गिर गए, तब भी वह नहीं हिली। गिरोह की आखिरी मालकिन में ऐसा किरदार देखना दुर्लभ है। उसकी आंखों में गुस्सा नहीं, बस सत्ता दिख रही थी। मुझे यह दृश्य बहुत पसंद आया क्योंकि यह बिना चिल्लाए ताकत दिखाता है। नेटशॉर्ट पर ऐसे सीन देखना सुकून देता है। कहानी की पकड़ मजबूत है।

घमंड का अंजाम

वह भारी शरीर वाला आदमी शुरू में बहुत हंस रहा था, पर बाद में उसका चेहरा उतर गया। उसने ड्रैगन वाली लाठी पकड़ी थी जैसे वह बादशाह हो। गिरोह की आखिरी मालकिन में कर्म का फल ऐसा ही मिलता है। उसका फोन कॉल देखकर लगा कि खेल पलट गया। अभिनय बहुत प्राकृतिक लगा। बाहर का माहौल कहानी को असली बनाता है। मुझे यह बदलाव बहुत अच्छा लगा।

आंसुओं की गवाही

जब पूरी भीड़ जमीन पर बैठ गई, तो सन्नाटा छा गया। बूढ़ी महिला की आंखों में आंसू देखकर बुरा लगा। गिरोह की आखिरी मालकिन में भावनाओं को बहुत गहराई से दिखाया गया है। यह सिर्फ लड़ाई नहीं, परिवार का दर्द है। चश्मे वाला लड़का भी मदद मांग रहा था। ऐसे दृश्य दिल को छू लेते हैं। मैंने इसे कई बार देखा। क्वालिटी शानदार है।

लाठी का संकेत

लाठी का इस्तेमाल बहुत प्रतीकात्मक है। पहले वह उसे घमंड से पकड़ता है, फिर भीख मांगने के लिए उसका सहारा लेता है। गिरोह की आखिरी मालकिन में छोटी चीजों का बड़ा मतलब होता है। जंगल के बीच यह नाटक देखने में अलग लगता है। हवा और पेड़ भी गवाह बन रहे हैं। मुझे यह सेटिंग बहुत पसंद आई। कहानी में दम है।

फोन वाला मोड़

फोन की घंटी बजते ही सब बदल गया। उस आदमी की हंसी गायब हो गई। गिरोह की आखिरी मालकिन में मोड़ ऐसे ही आते हैं। हमें नहीं पता कि दूसरी तरफ कौन है। रहस्य बना रहता है। मैं हर कड़ी का इंतजार करती हूं। वीडियो की स्पष्टता भी बहुत अच्छी है। यह शो मेरा पसंदीदा बन गया है। बस देखते रहो।

मासूम चेहरे

चश्मे वाले लड़के की मासूमियत साफ दिख रही थी। वह बीच में फंस गया है। गिरोह की आखिरी मालकिन में हर किरदार की अपनी कहानी है। वह हाथ जोड़कर विनती कर रहा था। यह दिखाता है कि गलतियां सबकी होती हैं। पर सजा सबको मिलती है। मुझे यह नैतिकता पसंद आई। नेटशॉर्ट पर ऐसी सामग्री मिलना अच्छा है।

गांव का माहौल

गांव का रास्ता और सूखे पेड़ माहौल को गंभीर बना रहे हैं। शहर की चमक नहीं, असली जंग है यह। गिरोह की आखिरी मालकिन में जगह का चुनाव बहुत सही है। धूल और मिट्टी के बीच यह नाटक चल रहा है। भीड़ खड़ी होकर देख रही है। यह सनसनी नहीं, हकीकत लगती है। मुझे यह असलीपन बहुत भाया। देखने में मजा आता है।

स्टाइलिश मालकिन

महिला के गले में सोने की चेन चमक रही थी। मुश्किल वक्त में भी उसका लिबास साफ था। गिरोह की आखिरी मालकिन में स्टाइल और ताकत का मेल है। वह डरी नहीं, बस खड़ी रही। उसकी आवाज में कंपन नहीं था। यह नेतृत्व की निशानी है। मुझे उसका आत्मविश्वास पसंद आया। ऐसे किरदार याद रह जाते हैं। शानदार प्रस्तुति है।

तेज कहानी

हंसी से लेकर गिड़गिड़ाने तक का सफर छोटा था। उस मोटे आदमी को सबक मिला। गिरोह की आखिरी मालकिन में न्याय जल्दी मिलता है। समय के पहिए तेज घूमते हैं। किसी को घमंड नहीं करना चाहिए। यह सीख मिलती है। कहानी की रफ्तार बहुत तेज है। मैं बोर नहीं हुई। हर पल कुछ नया होता है। बस देखते रहो।

तनाव भरा अंत

शुरू से अंत तक तनाव बना रहा। कोई चिल्लाया नहीं, पर शोर था। गिरोह की आखिरी मालकिन में खामोशी का शोर है। महिला की नजरें सब कुछ कह रही थीं। मुझे यह मनोवैज्ञानिक खेल पसंद आया। नेटशॉर्ट ऐप पर वीडियो बिना रुकावट चलता है। यह मेरा मनोरंजन बन गया है। सबको देखना चाहिए। बहुत बढ़िया काम है।