सूरज सिंह का चरित्र इतना गहरा है कि हर कटाव में उसकी पीड़ा झलकती है। जब वह लकड़ी काटता है, तो लगता है जैसे वह अपने अतीत को काट रहा हो। गांव का सिपाही, साम्राज्य का सम्राट में ऐसे दृश्य दर्शकों को भावनात्मक रूप से बांध लेते हैं। उसकी चुप्पी भी एक कहानी कहती है।
सुभाष सिंह का किरदार हंसी का खजाना है। जब वह ढोल बजाते हुए आता है और सूरज को परेशान करता है, तो पूरा माहौल हल्का हो जाता है। गांव का सिपाही, साम्राज्य का सम्राट में ऐसे किरदार कहानी को संतुलित रखते हैं। उसकी हरकतें देखकर मन खुश हो जाता है।
चंद्र कपूर जब घोड़े पर सवार होकर गांव में आता है, तो हवा में तनाव छा जाता है। उसकी बख्तरबंद पोशाक और आंखों में क्रूरता देखकर डर लगता है। गांव का सिपाही, साम्राज्य का सम्राट में विलेन का ऐसा प्रवेश दर्शकों को चौंका देता है। वह सच में खतरनाक लगता है।
जब तमन्ना वर्मा और कल्याणी चौहान को रस्सियों से बांधकर लाया जाता है, तो दिल दहल जाता है। उनकी आंखों में डर और बेबसी साफ दिख रही थी। गांव का सिपाही, साम्राज्य का सम्राट में ऐसे दृश्य कहानी की गंभीरता को बढ़ाते हैं। यह दृश्य बहुत ही भावुक कर देने वाला था।
सूरज का पुराना घर बहुत सादा और टूटा-फूटा है, जो उसकी गरीबी और अकेलेपन को दर्शाता है। जब वह अंदर बैठकर चाय पीता है, तो लगता है जैसे वह दुनिया से कट गया हो। गांव का सिपाही, साम्राज्य का सम्राट में सेट डिजाइन बहुत ही असली लगता है।
जब सूरज के सामने नीले रंग का होलोग्राम स्क्रीन आती है, तो हैरानी होती है। यह पुराने जमाने के माहौल में एक अजीब और रोचक मोड़ है। गांव का सिपाही, साम्राज्य का सम्राट में ऐसे फैन्टसी एलिमेंट्स कहानी को नया आयाम देते हैं। यह देखकर मजा आ गया।
जब चंद्र कपूर गांव वालों के सामने खड़ा होता है, तो सबकी आंखों में साफ डर दिख रहा था। कोई कुछ बोलने की हिम्मत नहीं कर रहा था। गांव का सिपाही, साम्राज्य का सम्राट में भीड़ के रिएक्शन बहुत ही असली लगते हैं। यह दृश्य तनाव से भरा हुआ था।
सूरज और सुभाष सिंह के बीच की नोक-झोंक बहुत ही प्यारी लगती है। सुभाष जहां शोर मचाता है, वहीं सूरज शांत रहता है। गांव का सिपाही, साम्राज्य का सम्राट में इन दोनों के बीच की दोस्ती या दुश्मनी आगे क्या रूप लेगी, यह जानने की उत्सुकता है।
वीडियो की शुरुआत में मरे हुए सैनिकों और रोते हुए परिवारों का दृश्य बहुत ही दिल दहला देने वाला था। यह दिखाता है कि युद्ध का असर कितना भयानक होता है। गांव का सिपाही, साम्राज्य का सम्राट की शुरुआत ही इतनी गंभीर थी कि आगे की कहानी का अंदाजा हो गया।
जब सूरज होलोग्राम देखकर गुस्से में उठता है और उंगली दिखाता है, तो लगता है कि अब वह चुप नहीं बैठेगा। उसकी आंखों में अब डर नहीं, बल्कि एक नई चमक है। गांव का सिपाही, साम्राज्य का सम्राट में हीरो का यह रूपांतरण बहुत ही दमदार लगता है।