मंच पर खड़ी संचालक की पोशाक बहुत ही सुंदर है और उसने जिस तरह नीली किताब को प्रस्तुत किया है वह रहस्यमयी लग रहा है। दर्शकों के चेहरे पर हैरानी साफ झलक रही है जैसे उन्हें किसी बड़े खुलासे का इंतजार हो। यह दृश्य मुझे (डबिंग) अजेय झाड़ूवाला साधु की याद दिलाता है जहां हर पल में तनाव होता है। प्रकाश व्यवस्था भी कमाल की है जो रात के माहौल को सही तरीके से पेश करती है और कहानी में गहराई जोड़ती है। देखने में यह बहुत ही आकर्षक लग रहा है और मुझे पसंद आया।
काले कपड़े वाले व्यक्ति की भावभंगी बहुत गंभीर है जैसे वह किसी योजना को अंजाम देने की सोच रहा हो। लाल पोशाक वाले व्यक्ति की प्रतिक्रिया देखकर लगता है कि वह इस किताब की शक्ति को पहचान गया है। (डबिंग) अजेय झाड़ूवाला साधु में भी ऐसे ही पात्र होते हैं जो अपनी चालाकी से सबको हैरान कर देते हैं। मंच की सजावट प्राचीन काल की झलक देती है और दर्शकों की बैठक व्यवस्था भी बहुत व्यवस्थित लग रही है। यह दृश्य बहुत ही शानदार बनाया गया है।
इस दृश्य में जो शांति है वह बहुत भारी लग रही है जैसे तूफान से पहले का सन्नाटा हो। महिला के हाथों में वह नीली किताब किसी खजाने से कम नहीं लग रही है और सबकी नजरे उसी पर टिकी हैं। (डबिंग) अजेय झाड़ूवाला साधु की कहानी भी ऐसे ही मोड़ पर जाती है जहां एक वस्तु सबकी किस्मत बदल देती है। कैमरा एंगल बहुत अच्छे हैं जो हर पात्र के भावों को बारीकी से कैद कर रहे हैं और देखने वाले को बांधे रखते हैं। मुझे यह शैली बहुत भाई है।
हल्के नीले रंग की पोशाक पहने व्यक्ति की आंखों में एक अलग ही चमक है जो उसे बाकी भीड़ से अलग बनाती है। शायद वह इस किताब का असली मालिक बनने वाला है या फिर इसके राज को जानता है। (डबिंग) अजेय झाड़ूवाला साधु में भी ऐसे ही पात्र होते हैं जो चुपचाप सब देखते हैं और फिर वार करते हैं। पृष्ठभूमि में दिखने वाली इमारत की नक्काशी बहुत बारीक है जो निर्माण टीम की मेहनत को दिखाती है। कला पक्ष बहुत ही उत्कृष्ट है।
मंच के दोनों तरफ लगे झंडे और दीये इस जगह को एक विशेष महत्व दे रहे हैं जैसे यह कोई गुप्त सभा हो। महिला के चेहरे पर आत्मविश्वास है जो बताता है कि वह इस कार्यक्रम को अच्छे से संभाल रही है। (डबिंग) अजेय झाड़ूवाला साधु के दृश्यों में भी ऐसे ही समारोह दिखाए गए हैं जो कहानी को आगे बढ़ाते हैं। दर्शकों के बीच की दूरी और उनकी बैठक का तरीका उस समय के सामाजिक ढांचे को दर्शाता है। माहौल बहुत ही दमदार है।
जब वह किताब को स्टैंड पर रखा गया तो सबकी सांसें रुक सी गईं जैसे कोई जादू हुआ हो। यह वस्तु साधारण नहीं लग रही बल्कि इसमें कोई शक्तिशाली मंत्र या विधि छिपी हो सकती है। (डबिंग) अजेय झाड़ूवाला साधु में भी ऐसी ही वस्तुएं होती हैं जो कहानी का मुख्य आधार बन जाती हैं। रंगों का प्रयोग बहुत सही है लाल रंग की कारपेट और सुनहरी रोशनी दृश्य को समृद्ध बनाती है। दृश्य प्रभाव बहुत अच्छे हैं।
पीछे बैठे लोगों के बीच भी धीमी बातचीत हो रही होगी क्योंकि उनकी बॉडी लैंग्वेज कुछ ऐसा ही इशारा कर रही है। मुख्य पात्र जो धूसर रंग के कपड़ों में है वह सबसे ज्यादा गंभीर लग रहा है और शायद सबसे अहम भूमिका निभाएगा। (डबिंग) अजेय झाड़ूवाला साधु की तरह ही यहां भी हर किरदार की अपनी एक कहानी होगी। रात का समय और मशालों की रोशनी इस दृश्य को और भी नाटकीय बना रही है। कहानी रोचक है।
इस नीली किताब पर लिखे शब्दों को पढ़ना मुश्किल है लेकिन इसका महत्व सब समझ रहे हैं। महिला ने जिस तरह से पर्दा हटाया वह एक नाटकीय पल था जिसने सबका ध्यान खींच लिया। (डबिंग) अजेय झाड़ूवाला साधु में भी ऐसे ही सस्पेंस भरे पल होते हैं जो दर्शकों को बांधे रखते हैं। कुर्सियों की डिजाइन और मेज पर रखे फल भी उस युग की संस्कृति को दर्शाते हैं। विवरण पर ध्यान दिया गया है।
सबके चेहरे पर अलग अलग भाव हैं कोई खुश है तो कोई चिंतित है जो बताता है कि इस किताब के बारे में अलग अलग राय हैं। यह टकराव कहानी को आगे बहुत रोचक बना सकता है और नए मोड़ ला सकता है। (डबिंग) अजेय झाड़ूवाला साधु में भी ऐसे ही संघर्ष दिखाए गए हैं जो पात्रों को परखते हैं। मंच के पीछे की दीवार पर बनी नक्काशी कला का एक बेहतरीन नमूना है। सेट डिजाइन शानदार है।
अंत में यह दृश्य बहुत ही प्रभावशाली है जो दर्शकों को अगले भाग को देखने के लिए मजबूर कर देता है। हर छोटी चीज पर ध्यान दिया गया है चाहे वह कपड़े हों या फिर मंच की सजावट। (डबिंग) अजेय झाड़ूवाला साधु की तरह ही इसमें भी गुणवत्ता साफ झलक रही है जो इसे दूसरों से अलग बनाती है। मुझे उम्मीद है कि आगे की कहानी में इस किताब का रहस्य खुलेगा। अनुभव अच्छा रहा।