मोनिका की डायरी पढ़कर दिल टूट गया। वह कैसे छुपाकर रखी अपनी पहचान, कैसे बनाया मोनिका को स्वतंत्र। बहन की नफरत भी समझ आती है, पर प्यार में त्याग ही तो असली इश्क है। (डबिंग) टूटे रिश्ते में यह दर्द बहुत गहरा है।
जब मोनिका बीमार पड़ी, तो परिवार ने छोड़ दिया, पर उस शख्स ने नहीं। डायरी में लिखा हर शब्द आंसुओं से भरा है। कैसे छुपाई सच्चाई, कैसे दिया सब कुछ। (डबिंग) टूटे रिश्ते की यह कहानी रूला देती है।
बहन क्यों नफरत करती है? शायद वह नहीं समझ पाई कि प्यार में कुर्बानी देनी पड़ती है। मोनिका को चेयरमैन बनाकर खुद पीछे हट गया। यह त्याग ही तो असली मोहब्बत है। (डबिंग) टूटे रिश्ते में यह डायलॉग दिल छू लेता है।
अस्पताल में मोनिका के पास बैठकर वह शख्स क्या कहता है - 'तुम बोझ नहीं हो'। यह पल देखकर आंसू रुकते नहीं। मोनिका की आंखों में आंसू और उसके शब्दों में दर्द। (डबिंग) टूटे रिश्ते का यह सीन यादगार है।
1998 से 2000 तक की डायरी, हर पन्ने पर मोनिका का नाम। कैसे मिला प्यार, कैसे बीमारी आई, कैसे शादी हुई। डायरी ने खोला वह राज जो सालों तक छुपा रहा। (डबिंग) टूटे रिश्ते में यह डायरी ही हीरो है।