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डिब्बे का राज़

नायक एक ट्रक ड्राइवर है और नायिका उसकी पत्नी है। दोनों लंबी दूरी की जोड़ी के रूप में साथ काम करते हैं। एक दिन नायिका को अपने पति में अजीब बदलाव नज़र आता है: हर बार आराम के समय वह डिब्बे में जाता है, खाना खाते समय दो कटोरे लेकर जाता है, माल चढ़ाते समय जानबूझकर जगह छोड़ता है। और सबसे बड़ी उलझन – वह नायिका को डिब्बे के पास आने से रोकता है। एक रात, नायिका को डिब्बे से धीमी आवाज़ें सुनाई देती हैं...
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इस एपिसोड की समीक्षा

माँ का गुस्सा देखकर डर लग रहा था

इस सीन में माँ का गुस्सा सच में देखने लायक था। जब लड़का घुटनों पर बैठ गया तो लगा कि अब सब ठीक हो जाएगा लेकिन माँ की आँखों में अभी भी दर्द था। डिब्बे का राज़ सीरीज में ऐसे इमोशनल मोड़ बहुत आते हैं। लड़की का सूटकेस लेकर आना ही सब बता रहा था कि वे घर छोड़ रहे थे। माँ का रिएक्शन बिल्कुल असली लगा। बहुत अच्छा लगा।

लड़के ने घुटने टेक दिए सच में

जब वह लड़का घुटनों पर गिरा तो मेरा दिल पिघल गया। उसकी आँखों में पछतावा साफ दिख रहा था। डिब्बे का राज़ की कहानी में यह सबसे भारी सीन था। लड़की चुपचाप खड़ी रही पर उसका चेहरा सब बता रहा था। परिवार के बीच ऐसा क्लेश कोई नहीं चाहता। आगे क्या होगा यह जानने के लिए मैं बेचैन हूँ। मुझे लगता है माँ माफ़ कर देगी। जरूर माफ़ करेगी।

लड़की चुप क्यों रही पूरे सीन में

लड़की ने एक शब्द नहीं बोला बस सूटकेस पकड़े खड़ी रही। उसकी खामोशी शोर से ज्यादा तेज थी। डिब्बे का राज़ में किरदारों की चुप्पी भी बहुत कुछ कहती है। माँ की डांट और लड़के की गिड़गिड़ाहट के बीच वह बस देखती रही। शायद वह जानती थी कि बातें अब बेकार हैं। इस चुप्पी ने मुझे बहुत प्रभावित किया। सच में बहुत गहरा था।

अंत में सबकी आँखें नम हो गईं

जब बूढ़ी माँ रोने लगी तो मैं भी रो पड़ा। लड़के ने वादा किया उंगली मिलाकर कि सब ठीक कर देगा। डिब्बे का राज़ का यह एपिसोड दिल को छू गया। तेंदुआ प्रिंट वाली लड़की भी रो रही थी। लगता है गलतफहमियां अब दूर होंगी। इतना इमोशनल ड्रामा कम ही देखने को मिलता है आजकल। सबका साथ अच्छा लगा। दिल को छू गया।

परिवार का क्लेश बहुत गहरा था

शुरू से ही तनाव साफ झलक रहा था कमरे में। माँ ने दरवाजे पर ही डांटना शुरू कर दिया। डिब्बे का राज़ की कहानी में परिवार के बंधन बहुत अहम हैं। लड़का और लड़की दोनों फंस गए थे। कोई रास्ता नहीं दिख रहा था तब तक जब तक वह नीचे नहीं गिरा। ऐसे सीन देखकर लगता है जीवन सच में मुश्किल है। पर उम्मीद बाकी है।

सूटकेस ने सब कुछ बदल दिया

वह काला सूटकेस जैसे ही अंदर आया माहौल बदल गया। लगा कि वे हमेशा के लिए जा रहे हैं। डिब्बे का राज़ में छोटी चीजें बड़ा मतलब रखती हैं। माँ ने उसे देखकर ही गुस्सा किया। शायद उसे लगा वे उसे छोड़ रहे हैं। प्रॉप्स का इस्तेमाल बहुत समझदारी से किया गया है इस शो में। बहुत बारीकी से किया।

माँ का चेहरा बदलता रहा बार बार

पहले गुस्सा फिर हैरानी और अंत में दुख। माँ के चेहरे पर सभी भाव आए। डिब्बे का राज़ की एक्टिंग बहुत लेवल की है। जब उसने उंगली उठाई तो लगा मार देगी पर फिर रुक गई। माँ का दिल कभी बच्चे के लिए पसीज ही जाता है। यह सीन बहुत यादगार बन गया मेरे लिए। हर बार देखकर नया लगता है। सच में ऐसा ही है।

उंगली का वादा बहुत प्यारा लगा

आखिर में लड़के ने छोटी उंगली मिलाकर वादा किया। यह बचपन जैसा प्यारा गेस्चर था। डिब्बे का राज़ में ऐसे पल उम्मीद देते हैं। उसकी आँखों में आंसू थे पर वादा पक्का था। लड़की को भी थोड़ा भरोसा हुआ होगा। ऐसे छोटे गेस्चर बड़े झगड़े सुलझा देते हैं। यह वादा टूट नहीं पाएगा। पक्का निभाएगा वह।

कमरे का माहौल बहुत सादा था

सफेद दीवारें और पुरानी कुर्सियां। इस सादगी में शोर ज्यादा लगा। डिब्बे का राज़ का सेट डिजाइन कहानी को बढ़ाता है। कोई बड़ी चीज नहीं थी बस इमोशन थे। जब वे दरवाजे से आए तो लगा कोई तूफान आ गया है। सादगी में ही असली कहानी छिपी होती है अक्सर। मुझे यह पसंद आया। बहुत सुंदर लगा।

आगे क्या होगा यह जानना जरूरी है

सीन खत्म हुआ पर कहानी अधूरी लगी। डिब्बे का राज़ का अगला एपिसोड कब आएगा। लड़की की साड़ी बदली हुई थी बाद वाले सीन में। समय कूद गया है या यह अलग दिन है। सबके आंसू देखकर लगता है सुखद अंत होगा। मैं इंतजार नहीं कर सकता अगला पार्ट देखने के लिए। जल्दी आना चाहिए। बेचैन हूँ मैं।