जब वह छोटी बच्ची हरे रंग के दाग वाले कपड़ों में खड़ी थी, तो उसकी आँखों में जो डर था वह दिल को छू गया। वयस्कों का झगड़ा बच्चों पर कितना असर डालता है, यह दृश्य उसका जीता-जागता उदाहरण है। तीन मामाओं का पछतावा देखकर लगता है कि बड़ों की गलतियों की सजा बच्चों को क्यों मिलती है?
नीली ड्रेस वाली महिला का गुस्सा और पुरुषों की बेबसी देखकर हैरानी होती है। एक छोटी सी गलती ने पूरे कमरे का माहौल खराब कर दिया। तीन मामाओं का पछतावा में दिखाया गया है कि कैसे इंसान गुस्से में अपनी सीमाएं भूल जाता है। बच्ची के चेहरे पर लगा तमाचा देखकर रोंगटे खड़े हो गए।
अचानक चुड़ैल का मास्क और जादूई गोला देखकर कहानी में एक नया मोड़ आ गया। क्या यह सब बच्ची का वहम था या सच में कोई जादू था? तीन मामाओं का पछतावा में ऐसे ट्विस्ट दर्शकों को बांधे रखते हैं। उस बच्ची की मासूमियत और चुड़ैल का डरावना रूप एकदम विपरीत था।
लंबे बालों वाला वह व्यक्ति जो सफेद कुर्ते में था, वह सबको समझाने की कोशिश कर रहा था लेकिन कोई उसकी नहीं सुन रहा था। तीन मामाओं का पछतावा में उसकी भूमिका बहुत अहम लगती है। वह बच्चों को बचाना चाहता था लेकिन वयस्कों के अहंकार के आगे वह बेबस था।
एक बच्ची रो रही थी और दूसरी जमीन पर बैठी मुस्कुरा रही थी। इस विरोधाभास ने पूरे दृश्य को गहरा बना दिया। तीन मामाओं का पछतावा में दिखाया गया है कि कैसे एक ही स्थिति में दो बच्चे अलग-अलग प्रतिक्रिया दे सकते हैं। गुलाबी ड्रेस वाली बच्ची की चालाकी देखकर हैरानी हुई।
पूरा कमरे का माहौल इतना तनावपूर्ण था कि सांस लेना मुश्किल हो रहा था। वयस्कों की आवाजें और बच्चों का डर एक अजीब सी स्थिति बना रहे थे। तीन मामाओं का पछतावा में ऐसे दृश्य दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देते हैं। लकड़ी का फर्श और पुराने पर्दे उस माहौल को और गहरा बना रहे थे।
ग्रे सूट वाला व्यक्ति सबसे ज्यादा शांत था लेकिन उसकी आँखों में गुस्सा साफ दिख रहा था। तीन मामाओं का पछतावा में उसकी चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही थी। जब वह अंत में बोला तो उसकी आवाज में एक अजीब सी ठंडक थी जो डरावनी थी।
उस बच्ची ने जब अपने सिर पर हाथ रखा तो लगा जैसे उसका दर्द बाहर आ रहा हो। तीन मामाओं का पछतावा में ऐसे छोटे-छोटे इशारे बड़ी कहानी कह जाते हैं। उसकी आँखों में आंसू और चेहरे पर दर्द देखकर कोई भी भावुक हो सकता है।
सभी वयस्क आपस में लड़ रहे थे लेकिन किसी ने बच्चों की तरफ ध्यान नहीं दिया। तीन मामाओं का पछतावा में यह सवाल उठता है कि क्या हम बच्चे की परवाह करना भूल गए हैं? नीली ड्रेस वाली महिला का व्यवहार सबसे ज्यादा चौंकाने वाला था।
वीडियो के अंत तक यह स्पष्ट नहीं हुआ कि आखिर हुआ क्या था। क्या वह चुड़ैल सच थी या बच्ची का वहम? तीन मामाओं का पछतावा में ऐसे खुले अंत दर्शकों को सोचने के लिए मजबूर कर देते हैं। अगले एपिसोड का इंतजार अब और नहीं होगा।