इस दृश्य में तनाव इतना अधिक है कि सांस लेना मुश्किल हो जाता है। विलासिता से सजे खलनायक की हंसी और बेचारे शिकार की पीड़ा का विरोधाभास दिल दहला देता है। जब वह मछली को उठाता है तो लगता है जैसे वह अपनी ताकत दिखा रहा हो लेकिन अंत में पिता का आगमन सब कुछ बदल देता है। तूफान। पिता के कंधे में यह मोड़ बहुत ही शानदार है जहां कमजोर लगने वाला पात्र अचानक शक्तिशाली बन जाता है।
जब वह बूढ़ा आदमी दरवाजे से दौड़ता हुआ आता है तो पूरा माहौल बदल जाता है। उसकी आंखों में गुस्सा और बेटे के लिए चिंता साफ दिख रही थी। खलनायक जो मजाक उड़ा रहा था अब उसका चेहरा पीला पड़ गया है। यह दृश्य साबित करता है कि एक पिता अपने बच्चे के लिए क्या कर सकता है। तूफान। पिता के कंधे की कहानी में यह पल सबसे ज्यादा यादगार है जहां न्याय की उम्मीद जाग उठती है।
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जब वह आदमी मछली को जमीन पर पटकता है तो लगता है कि वह अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रहा है। लेकिन असली ताकत तो उस बूढ़े आदमी में है जो अपने बेटे को बचाने के लिए कुछ भी कर सकता है। इस दृश्य में गुस्सा डर और उम्मीद सब कुछ है। तूफान। पिता के कंधे की कहानी में यह पल सबसे ज्यादा दमदार है जहां एक पिता का प्यार सब कुछ जीत लेता है।
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बंधे हुए लड़के की आंखों में जो दर्द है वह शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। वह कुछ बोलना चाहता है लेकिन उसके मुंह से आवाज नहीं निकल रही। जब उसका पिता आता है तो उसकी आंखों में एक नई चमक आ जाती है। तूफान। पिता के कंधे में यह दृश्य बहुत ही भावुक है जहां एक बेटे की पीड़ा और पिता का प्यार एक साथ दिखता है।
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जब पिता अपने बेटे को बचाने के लिए आगे बढ़ता है तो लगता है कि अब न्याय होगा। खलनायक जो मजाक उड़ा रहा था अब उसका चेहरा पीला पड़ गया है। यह दृश्य साबित करता है कि बुराई कभी भी अच्छाई पर हावी नहीं हो सकती। तूफान। पिता के कंधे में यह पल सबसे ज्यादा संतोषजनक है जहां न्याय की जीत होती है।