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तूफान: पिता के कंधेवां7एपिसोड

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तूफान: पिता के कंधे

राजेंद्र वर्मा एक मछली वाला है, लेकिन असल में वह एक अरबपति है। उसका बेटा करण साधारण जिंदगी जीता है। लक्की सिंह, करण की मंगेतर ज्योति के साथ मिलकर, एक छोटी सी टक्कर का बदला लेने के लिए करण को ब्लैकमेल करता है और उसकी जान लगभग ले ही लेता है। राजेंद्र आखिरी वक्त पर करण को बचाता है, लेकिन सच सामने आने पर पता चलता है कि असली गद्दार उसका अपना भरोसेमंद दोस्त है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

बंद मछली का बदला

इस दृश्य में तनाव इतना अधिक है कि सांस लेना मुश्किल हो जाता है। विलासिता से सजे खलनायक की हंसी और बेचारे शिकार की पीड़ा का विरोधाभास दिल दहला देता है। जब वह मछली को उठाता है तो लगता है जैसे वह अपनी ताकत दिखा रहा हो लेकिन अंत में पिता का आगमन सब कुछ बदल देता है। तूफान। पिता के कंधे में यह मोड़ बहुत ही शानदार है जहां कमजोर लगने वाला पात्र अचानक शक्तिशाली बन जाता है।

पिता की दहाड़

जब वह बूढ़ा आदमी दरवाजे से दौड़ता हुआ आता है तो पूरा माहौल बदल जाता है। उसकी आंखों में गुस्सा और बेटे के लिए चिंता साफ दिख रही थी। खलनायक जो मजाक उड़ा रहा था अब उसका चेहरा पीला पड़ गया है। यह दृश्य साबित करता है कि एक पिता अपने बच्चे के लिए क्या कर सकता है। तूफान। पिता के कंधे की कहानी में यह पल सबसे ज्यादा यादगार है जहां न्याय की उम्मीद जाग उठती है।

खौफनाक खेल

गोल्डन सूट वाले शख्स का व्यवहार सच में घिनौना है। वह इंसानों के साथ ऐसा व्यवहार कर रहा है जैसे वे खिलौने हों। मछली और जड़ी बूटियों वाला डिब्बा देखकर लगता है कि वह कोई अजीब प्रयोग कर रहा है। लेकिन जब बंधे हुए लड़के की आंखों में डर दिखता है तो दर्शक के रूप में हम भी बेचैन हो जाते हैं। तूफान। पिता के कंधे में ऐसे दृश्य दर्शकों को बांधे रखते हैं।

औरतों का संघर्ष

सफेद साड़ी वाली महिला की मुस्कान में एक अजीब सी चालाकी है जबकि दूसरी लड़की की आंखों में आंसू और डर साफ झलक रहा है। दोनों के बीच का अंतर इस कहानी की गहराई को दिखाता है। जब खलनायक लड़की को पकड़ता है तो लगता है कि अब सब खत्म हो गया लेकिन पिता का आना एक नई उम्मीद लेकर आता है। तूफान। पिता के कंधे में महिला किरदारों को भी अच्छे से दिखाया गया है।

गुस्से का पहाड़

जब वह आदमी मछली को जमीन पर पटकता है तो लगता है कि वह अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रहा है। लेकिन असली ताकत तो उस बूढ़े आदमी में है जो अपने बेटे को बचाने के लिए कुछ भी कर सकता है। इस दृश्य में गुस्सा डर और उम्मीद सब कुछ है। तूफान। पिता के कंधे की कहानी में यह पल सबसे ज्यादा दमदार है जहां एक पिता का प्यार सब कुछ जीत लेता है।

अंधेरे का अंत

इस फैक्ट्री जैसी जगह का माहौल बहुत ही डरावना है। खिड़कियों से आती रोशनी और अंदर का अंधेरा एक अजीब सा विरोधाभास पैदा करता है। जब खलनायक हंसता है तो लगता है कि अंधेरा हमेशा के लिए रहेगा लेकिन पिता का आना उस अंधेरे को चीर देता है। तूफान। पिता के कंधे में ऐसे दृश्य दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देते हैं।

बेटे की पीड़ा

बंधे हुए लड़के की आंखों में जो दर्द है वह शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। वह कुछ बोलना चाहता है लेकिन उसके मुंह से आवाज नहीं निकल रही। जब उसका पिता आता है तो उसकी आंखों में एक नई चमक आ जाती है। तूफान। पिता के कंधे में यह दृश्य बहुत ही भावुक है जहां एक बेटे की पीड़ा और पिता का प्यार एक साथ दिखता है।

खलनायक का अहंकार

गोल्डन सूट वाले शख्स का अहंकार इतना अधिक है कि वह इंसानियत को भूल गया है। वह मछली और जड़ी बूटियों के साथ खेल रहा है लेकिन असल में वह अपने अहंकार का खेल खेल रहा है। जब पिता आता है तो उसका अहंकार चूर चूर हो जाता है। तूफान। पिता के कंधे में खलनायक का किरदार बहुत ही अच्छे से निभाया गया है।

उम्मीद की किरण

जब सब कुछ खत्म होता लग रहा था तभी वह बूढ़ा आदमी दरवाजे से दौड़ता हुआ आता है। उसकी आंखों में गुस्सा और बेटे के लिए प्यार साफ दिख रहा था। यह दृश्य साबित करता है कि उम्मीद कभी नहीं मरती। तूफान। पिता के कंधे की कहानी में यह पल सबसे ज्यादा प्रेरणादायक है जहां एक पिता का प्यार सब कुछ जीत लेता है।

न्याय का पल

जब पिता अपने बेटे को बचाने के लिए आगे बढ़ता है तो लगता है कि अब न्याय होगा। खलनायक जो मजाक उड़ा रहा था अब उसका चेहरा पीला पड़ गया है। यह दृश्य साबित करता है कि बुराई कभी भी अच्छाई पर हावी नहीं हो सकती। तूफान। पिता के कंधे में यह पल सबसे ज्यादा संतोषजनक है जहां न्याय की जीत होती है।