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प्रतिशोध की डोरवां1एपिसोड

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प्रतिशोध की डोर

लोहित राजवंश की बेटी आधुनिक युग में सौतेली माँ द्वारा निर्वासित 'मीनाक्षी चतुर्वेदी' के रूप में पुनर्जन्म लेती है। दो वर्ष पश्चात् स्वार्थी चतुर्वेदी परिवार उसे विवाह के लिए बुलाता है। अब JS — विश्व प्रसिद्ध कढ़ाई कलाकार बन चुकी मीनाक्षी 'चतुर्वेदी समूह' पर अधिकार पाने के लिए मायाजाल रचती है। प्रतिशोध के इस समर में 'जितेश बंसल' का निश्छल प्रेम उसके अंतर्मन को जीत लेता है। अंततः मीनाक्षी प्रतिशोध संग अपना सच्चा प्रेम भी पा लेती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

जिगेश की वापसी का डर

जिगेश बंसल की एंट्री देखकर ही रोंगटे खड़े हो गए। हवाई अड्डे पर उसका रौब और आंखों में छिपा गुस्सा साफ दिख रहा था। जब उसने फोटो जलाई, तो लगा जैसे बदले की आग सुलग गई हो। प्रतिशोध की डोर अब खिंच चुकी है और मीनाक्षी चतुर्वेदी की जिंदगी में तूफान आने वाला है।

मीनाक्षी का खूबसूरत एंट्री

मीनाक्षी चतुर्वेदी जब सफेद साड़ी में कार से उतरीं, तो नज़ारा बेमिसाल था। लेकिन उनकी आंखों में वो चमक नहीं, बल्कि एक गहरा डर था। सौतेली मां किरण और बहन सिया के चेहरे पर नकली मुस्कान देखकर समझ आ गया कि घर में जंग छिड़ी हुई है। प्रतिशोध की डोर में हर किरदार का अपना राज है।

रामनारायण की चुप्पी

रामनारायण चतुर्वेदी सोफे पर बैठे थे, लेकिन उनकी आंखें सब कुछ देख रही थीं। बेटी की वापसी पर पिता का चेहरा पत्थर जैसा था। क्या वो जिगेश के प्लान का हिस्सा हैं या मीनाक्षी को बचाने की कोशिश करेंगे? इस शो में हर खामोशी के पीछे एक बड़ा राज छिपा है जो दर्शकों को बांधे रखता है।

जिगेश और मीनाक्षी की टकराहट

हवाई अड्डे पर जिगेश और मीनाक्षी की मुलाकात बिजली गिरने जैसी थी। जिगेश ने लाइटर जलाकर फोटो जलाई, ये सिर्फ एक एक्शन नहीं, बल्कि एक चेतावनी थी। मीनाक्षी की मुस्कान के पीछे छिपा डर कैमरे ने बखूबी कैद किया है। प्रतिशोध की डोर की ये सबसे बेहतरीन सीन है जहां बिना डायलॉग के सब कह दिया गया।

सिया का मासूम चेहरा

सिया चतुर्वेदी को देखकर लगता है कि वो सबसे मासूम है, लेकिन इस शो में कोई भी वैसा नहीं जैसा दिखता है। पिंक ड्रेस में वो कितनी भी प्यारी लगे, उसके दिमाग में क्या चल रहा है ये तो वक्त ही बताएगा। मीनाक्षी के लिए मुसीबतें तो शुरू हो चुकी हैं और सिया का रोल बहुत अहम होने वाला है।

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