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बुज़ुर्गों पर अत्याचारवां1एपिसोड

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बुज़ुर्गों पर अत्याचार

अपने गृहनगर में दादा के अंतिम संस्कार के दौरान एपेक्स ग्रुप की अध्यक्ष बेला पर दो पुरुष आरोप लगाते हैं कि उसके द्वारा वित्तपोषित प्रतिष्ठित वृद्धाश्रम ने उनके पिता की मृत्यु का कारण बना। सच जानने के लिए बेला परिचारिका बनकर भेष बदलती है और एक चौंकाने वाला अंधकारमय रहस्य उजागर करती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

अंतिम संस्कार में तूफान

बेला हैरिंगटन की आंखों में जो दर्द था, वो किसी ड्रामे से कम नहीं लग रहा था। लूकस रीड का साथ देना और फिर अचानक बंदूक लेकर घुस आए शख्स ने माहौल को पूरी तरह बदल दिया। चर्च की शांति टूट गई और बुज़ुर्गों पर अत्याचार जैसे दृश्य याद आ गए। हर पल तनाव से भरा था।

लूकस का असली चेहरा

लूकस रीड जो बेला का निजी सहायक था, उसने अंत में जो किया वो किसी ने सोचा भी नहीं था। बेला को बचाने के चक्कर में उसने खुद को खतरे में डाल दिया। चर्च के अंदर गोलीबारी और भागमभाग ने सबको हिला कर रख दिया। बुज़ुर्गों पर अत्याचार वाले सीन की याद ताज़ा हो गई।

बेला की हिम्मत

बेला हैरिंगटन ने जिस तरह से उस मुश्किल वक्त में खुद को संभाला, वो काबिले तारीफ है। उसके चेहरे पर डर था, लेकिन हिम्मत नहीं टूटी। लूकस के साथ मिलकर उसने जो किया, वो किसी एक्शन फिल्म से कम नहीं था। बुज़ुर्गों पर अत्याचार जैसे माहौल में भी उसने संघर्ष किया।

चर्च का खूनी मंजर

सेंट जॉन कैथेड्रल जो शांति का प्रतीक था, वो आज खून से सन गया। बेला और लूकस के बीच की केमिस्ट्री और फिर अचानक आए हमले ने सबको चौंका दिया। बुज़ुर्गों पर अत्याचार वाले दृश्यों की याद दिलाता यह सीन दिल दहला देने वाला था।

लूकस का बलिदान

लूकस रीड ने बेला को बचाने के लिए जो किया, वो सच्ची वफादारी थी। उसके चेहरे पर चोट के निशान और आंखों में जुनून देखकर लगता है कि वो कुछ भी कर सकता है। बुज़ुर्गों पर अत्याचार जैसे माहौल में भी उसने हिम्मत नहीं हारी।

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