काली चमकदार साड़ी पहनी महिला की खामोशी सबसे ज्यादा शोर मचा रही है। वह सब कुछ देख रही है लेकिन कुछ बोल नहीं रही। शायद वह जानती है कि अंत में जीत उसी की होगी। मेरा जलवा में ऐसे पात्र ही कहानी को आगे बढ़ाते हैं। उसकी आँखों में एक अलग ही चमक है जो सब कुछ बता देती है।
लाल कोट पहने व्यक्ति का चेहरा देखकर लगता है कि उसे धोखा मिला है। वह बिल्कुल स्तब्ध खड़ा है। शायद उसे उम्मीद नहीं थी कि बात यहाँ तक आएगी। मेरा जलवा में ऐसे मोड़ आते रहते हैं जो दर्शकों को बांधे रखते हैं। उसकी आँखों में गुस्सा और निराशा दोनों साफ दिख रहे हैं।
नीले सूट वाला व्यक्ति शुरू में मुस्कुरा रहा था, लेकिन जैसे-जैसे बात आगे बढ़ी, उसका चेहरा गंभीर होता गया। जब वह खड़ा हुआ और उंगली उठाई, तो लगा कि अब असली खेल शुरू होगा। मेरा जलवा में हर किरदार का अपना महत्व है। उसका गुस्सा देखकर लगता है कि वह चुनौती स्वीकार कर रहा है।
पीछे बैठे लोगों की प्रतिक्रियाएं भी कम दिलचस्प नहीं हैं। वे आपस में बातें कर रहे हैं और इशारे कर रहे हैं। यह दिखाता है कि यह घटना सिर्फ मंच तक सीमित नहीं है। मेरा जलवा में ऐसे छोटे-छोटे विवरण कहानी को असली बनाते हैं। हर कोई इस ड्रामे का हिस्सा बन गया है।
सफेद पोशाक वाली महिला ने जो कहा, उसने सबकी बोलती बंद कर दी। उसका अंदाज़ ऐसा था जैसे वह राजा हो। लाल किताब शायद किसी बड़े अधिकार का प्रतीक है। मेरा जलवा में ऐसे पल आते हैं जो रोंगटे खड़े कर देते हैं। उसकी आवाज़ में जो दम था, वह कमाल का था।