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लौटकर आया, तो बन गया अपराजेयवां62एपिसोड

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लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय

जिसे परिवार ने ठुकरा दिया था, वही नायक असल में एक अनमोल दिव्य शरीर वाला था। अठारह साल तक उसकी प्रतिभा छुपी रही, और उसने हर अपमान सहा। बस उसकी बचपन की साथी ने उसका साथ नहीं छोड़ा। दस साल के वादे के दिन, उसने एक अखाड़ा खड़ा किया, और उसी की प्रतीक्षा कर रही थी। नायक जब लौटा, तो देखा – उसकी प्रेमिका को जबरन शादी के लिए मजबूर किया जा रहा था, और उसका पुराना दुश्मन उसे सबके सामने अपमानित कर रहा था। यहीं से शुरू हुई उसकी असली पहचान और सबसे ऊपर उठने की कहानी।
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इस एपिसोड की समीक्षा

रोएंदार गले वाले की प्रवेश

इस दृश्य में रोएंदार गले वाले किरदार का रवैया बहुत ही दमदार लग रहा है। उसकी आंखों में एक अलग ही चमक है जो बताती है कि वह कुछ बड़ा करने वाला है। जब वह सामने वाले को देखता है, तो हवा में तनाव साफ महसूस किया जा सकता है। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय श्रृंखला का यह सीन वाकई दिलचस्प है। वेशभूषा योजना भी बहुत शानदार है, खासकर उसकी पोशाक।

विलेन की खूंखार मुस्कान

काले और सुनहरे कपड़े पहने हुए व्यक्ति की मुस्कान में छिपा खतरा साफ झलकता है। उसकी मूंछें और उसका अहंकारी भाव उसे एक सशक्त विरोधी बनाते हैं। जब वह सामने खड़े समूह को घूरता है, तो लगता है कि कोई बड़ी लड़ाई होने वाली है। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय में ऐसे किरदार ही कहानी को आगे बढ़ाते हैं। पृष्ठभूमि संगीत भी बहुत सही था।

सभी का सामना

जब सभी किरदार एक साथ आंगन में खड़े होते हैं, तो माहौल बहुत ही गंभीर हो जाता है। सफेद कपड़े वाली शख्सियत की पीठ दिखाकर रहस्य बनाए रखा गया है। हर किसी के चेहरे पर अलग-अलग भाव हैं, कोई चिंतित है तो कोई गुस्से में। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय की कहानी में यह मोड़ बहुत महत्वपूर्ण लग रहा है। संवाद बाजी भी बहुत तेज है।

पोशाकों का कमाल

इस कार्यक्रम की सबसे खास बात इसके किरदारों के कपड़े हैं। नीले रंग की पोशाक वाले युवक की सजावट बहुत बारीक है। फर वाली जैकेट से लेकर कढ़ाई वाले अंगरखे तक, हर चीज बहुत महंगी लगती है। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय में दृश्यों पर बहुत मेहनत की गई है। मंच सजावट भी पुराने जमाने का अहसास दिलाता है। देखने में बहुत सुखद लगता है।

चेहरे के भाव

काले वेस्ट वाले लड़के के चेहरे पर हैरानी साफ दिख रही थी। उसे शायद कुछ अनसुना सुनने को मिला है। उसकी आंखें फैल जाती हैं जब वह बात करता है। अभिनय बहुत प्राकृतिक लग रहा है, बिना किसी नाटक के। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय में ऐसे छोटे-छोटे विवरण बहुत मायने रखते हैं। दर्शक को बांधे रखने के लिए यह जरूरी है।

तनाव का माहौल

जैसे ही कैमरा इन सभी पर जूम करता है, हवा में बिजली सी कौंधने लगती है। ऐसा लगता है कि अब कोई बड़ा फैसला होने वाला है। चुप्पी भी शोर मचा रही है इस सीन में। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय की कहानी में यह वह पल है जहां सब बदलने वाला है। निर्देशन बहुत सटीक है। हर दृश्य में ऊर्जा है।

हीरो की वापसी

फर वाले किरदार में हीरो वाली आभा बहुत ज्यादा है। उसका चलने का तरीका और देखने का अंदाज बताता है कि वह मुख्य पात्र है। वह शांत है लेकिन खतरनाक भी। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय का शीर्षक उस पर बिल्कुल फिट बैठता है। उसे देखकर लगता है कि वह सबको हरा देगा। बहुत ही कूल किरदार है यह। मुझे यह शैली बहुत भाया।

पुराना मंदिर सेट

पीछे दिखाई देने वाली इमारतें और मूर्तियां बहुत प्राचीन लगती हैं। पत्थर की फर्श और लकड़ी के खंभे असली इतिहास का अहसास दिलाते हैं। इस जगह पर कहानी का होना बहुत उचित लग रहा है। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय में स्थान चयन बहुत अच्छा है। यह परिवेश कहानी के वजन को बढ़ाती है। बहुत सुंदर दृश्य है।

सफेद पोशाक वाली

सामने खड़ी सफेद कपड़े वाली शख्सियत कौन है? उसका चेहरा नहीं दिखाया गया है, जिससे उत्सुकता बढ़ जाती है। शायद वह इस झगड़े की वजह है या फिर कोई बड़ी शक्ति। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय में ऐसे रहस्य दर्शकों को बांधे रखते हैं। उसकी मौजूदगी से माहौल और भी गंभीर हो गया है। आगे क्या होगा जानने को मन कर रहा है।

नेटशॉर्ट पर मजा

नेटशॉर्ट अनुप्रयोग पर यह श्रृंखला देखना बहुत अच्छा अनुभव है। कहानी की रफ्तार बहुत सही है, न बहुत तेज न बहुत धीमी। हर कड़ी के बाद अगला देखने का मन करता है। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय जैसे शो ही असली मनोरंजन हैं। किरदारों का मेल भी बहुत अच्छी लग रही है। सबको देखना चाहिए यह।