जब वो घुटनों पर गिरा, तो लगा जैसे इतिहास बदल रहा हो। एक चाल ईश्वरीय अवस्था में ये दृश्य दिल दहला देता है। सफेद बालों वाला शख्स चीखता है, भीड़ सन्न रह जाती है। तलवारें चमकती हैं, आँखों में गुस्सा। ये सिर्फ लड़ाई नहीं, जंग है।
उसकी आँखों में आंसू थे, पर आवाज़ में डर नहीं। एक चाल ईश्वरीय अवस्था ने दिखाया कैसे एक महिला भी युद्ध के मैदान में खड़ी हो सकती है। उसकी पोशाख रेशमी थी, पर इरादे लोहे जैसे। देखकर लगता है जैसे वो खुद देवी हो।
उसने त्रिशूल उठाया तो हवाएं थम गईं। एक चाल ईश्वरीय अवस्था में ये पल सबसे ताकतवर था। उसके चेहरे पर गुस्सा नहीं, दर्द था। वो लड़ रहा था, पर किसके लिए? शायद अपने खोए हुए घर के लिए। हर झटके में कहानी थी।
जब वो दोनों आमने-सामने आए, तो पूरा अρέना चुप हो गया। एक चाल ईश्वरीय अवस्था ने दिखाया कैसे एक पल में सब कुछ बदल सकता है। लोग सांस रोके देख रहे थे। कोई चीख रहा था, कोई रो रहा था। ये सिर्फ खेल नहीं, मौत का नाच था।
उसकी गर्दन में सोने की जंजीर थी, पर आँखों में आज़ादी की चाहत। एक चाल ईश्वरीय अवस्था में ये विरोधाभास दिल छू लेता है। वो राजा था, पर कैदी भी। उसके हर कदम में दर्द था। क्या ताज पहनना इतना भारी होता है?