पोसीडॉन की आँखों में जो आग थी, वो देखकर रूह कांप गई। जब उन्होंने त्रिशूल उठाया, तो लगा जैसे पूरा सागर उमड़ पड़े। दिव्य अनुभव में यह दृश्य देखना किसी सपने जैसा था। राजा का गुस्सा और उसकी शक्ति का प्रदर्शन बिल्कुल दिल दहला देने वाला था।
जब वो बूढ़े व्यक्ति मैदान में आए, तो हवाओं ने भी सलामी दी। उनकी दाढ़ी और आँखों में छिपी शक्ति को देखकर लगता है कि वे कोई साधारण इंसान नहीं हैं। दिव्य अनुभव में ऐसे पात्रों का होना कहानी को नया मोड़ देता है। उनका मुस्कुराना ही काफी था डर पैदा करने के लिए।
उस युवक की आँखों में जो डर और गुस्सा था, वो साफ झलक रहा था। रस्सियों में बंधे होने के बावजूद उसकी आवाज़ में दम था। दिव्य अनुभव में ऐसे दृश्य दर्शकों को बांधे रखते हैं। उसकी चीख सुनकर लगा जैसे वो सच में दर्द में हो।
सोने के कवच पहने सिपाही भी पोसीडॉन के सामने कांप रहे थे। उनकी आँखों में सम्मान और डर दोनों था। दिव्य अनुभव में ऐसे छोटे-छोटे विवरण कहानी को गहराई देते हैं। जब राजा चिल्लाए, तो सबकी सांसें थम गईं।
आसमान में बादलों का घूमना और बिजली का कड़कना किसी प्रलय की तरह था। बूढ़े व्यक्ति के खड़े होते ही प्रकृति भी उनके इशारे पर नाचने लगी। दिव्य अनुभव में ऐसे दृश्य देखकर लगता है कि हम किसी महाकाव्य का हिस्सा हैं।