सुबह छह बजे खबर ने आग लगा दी। थेरेपी टेप लीक होना कोई मजाक नहीं है। इसाबेला की आंखों में दर्द साफ दिख रहा था। सबने मजाक उड़ाया पर उसने चुप रहना बेहतर समझा। अच्छी पत्नी से मत खिलवाड़ करो कहानी यहीं से शुरू होती है जब वह चुपचाप अपनी चाल चलती है। सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग देखकर गुस्सा आता है पर बदला मीठा होता है। उसकी खामोशी तूफान से पहले की शांति थी।
लैपटॉप की स्क्रीन पर हरे रंग के कोड्स जादू जैसे लग रहे थे। उसने सिर्फ कीबोर्ड नहीं थपथपाया बल्कि पूरी व्यवस्था हिला दी। एक्सेस ग्रांटेड का मैसेज देखकर रोंगटे खड़े हो गए। अच्छी पत्नी से मत खिलवाड़ करो में तकनीक का इस्तेमाल बहुत स्मार्ट तरीके से दिखाया गया है। सुरक्षा प्रणाली अब उसकी मुट्ठी में थी। कोई नहीं जानता था कि वह क्या करने वाली है।
गुलाबों की दीवार के सामने खड़ी वह रानी लग रही थी। रिडेम्पशन पार्टी का बैनर लगा था पर भीड़ का व्यवहार बदतमीजी भरा था। कटआउट पकड़कर मजाक उड़ाना कायरता है। अच्छी पत्नी से मत खिलवाड़ करो में दिखाया गया है कि कैसे भीड़ मानसिकता तोड़ती है। पर उसने हार नहीं मानी। उसकी लाल साड़ी और आंखों में चमक बता रही थी कि अब खेल बदलेगा।
यो का व्यवहार सबसे संदेहजनक था। पत्नी के संकट में साथ खड़ा होना चाहिए था पर वह पीछे से पकड़कर मुस्कुरा रहा था। क्या वह साजिश का हिस्सा था? अच्छी पत्नी से मत खिलवाड़ करो में रिश्तों की कड़वी सच्चाई दिखाई गई है। भरोसा टूटना सबसे बड़ा दर्द होता है। इसाबेला ने अकेले लड़ना चुना क्योंकि उसे पता था कि कोई उसका साथ नहीं देगा।
ऑफिस की कुर्सी पर बैठकर उसने कांच के गिलास को पकड़ा। बाहर शहर की रोशनी थी पर कमरे में सन्नाटा था। फोन की घंटी बजी पर उसने नहीं उठाया। अच्छी पत्नी से मत खिलवाड़ करो में यह दृश्य बहुत गहराई से बनाया गया है। एकाकीपन ताकत में बदल रहा था। स्क्रीन पर नंबर बढ़ रहे थे और उसकी योजना पक रही थी।
एलिवेटर कंट्रोल और फायर सप्रेसन बटन अब उसके सामने थे। माउस कर्सर हिल रहा था और दिल की धड़कन तेज हो रही थी। एक्जीक्यूट बटन दबाने से पहले वह मुस्कुराई। अच्छी पत्नी से मत खिलवाड़ करो का क्लाइमेक्स दिल दहला देने वाला है। उसने साबित कर दिया कि कमजोर कोई नहीं होता। बस मौका चाहिए होता है।
शुरू में वह रो रही थी, हाथों से चेहरा छिपा रही थी। फिर वही हाथ कीबोर्ड पर चलने लगे। भावनाओं का यह सफर अद्भुत था। अच्छी पत्नी से मत खिलवाड़ करो में चरित्र का विकास बहुत अच्छा है। दर्द को ईंधन बनाना आसान नहीं होता। इसाबेला की आंखों में अब आंसू नहीं आग थी। वह बदला लेने के लिए तैयार खड़ी थी।
खबरों ने उसकी छवि खराब कर दी थी। सबने उसे गलत साबित करने की कोशिश की। पर सच्चाई कागजों पर मुहर के साथ आई। अच्छी पत्नी से मत खिलवाड़ करो में मीडिया की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। झूठ बोलना आसान है पर सच सामने आना मुश्किल। उसने सबूतों के साथ सबका मुंह बंद कर दिया। बहुत ही दमदार अंदाज है।
हर कोड के साथ रहस्य गहरा होता गया। सुरक्षा प्रणाली में घुसना कोई बच्चों का खेल नहीं था। उसने कैसे यह सब सीखा? अच्छी पत्नी से मत खिलवाड़ करो में सस्पेंस बनाए रखा गया है। दर्शक हर पल जानना चाहते हैं कि आगे क्या होगा। स्क्रीन पर कैमरे की फुटेज चल रही थी और वह सब देख रही थी।
यह कहानी सिर्फ बदले की नहीं, खुद को वापस पाने की है। भीड़ के शोर के बीच उसने अपनी आवाज ढूंढी। अच्छी पत्नी से मत खिलवाड़ करो देखकर लगता है कि हर किसी के अंदर एक योद्धा होता है। अंत में वह हार नहीं मानती। यह प्रेरणा देता है कि परिस्थितियों से घबराना नहीं चाहिए। बहुत शानदार प्रस्तुति है।