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आज़ाद परिंदेवां21एपिसोड

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आज़ाद परिंदे

अपनी चाची से बचने के लिए आदिति गैंगस्टर यश को फंसाती है। यश उसे अपने पास रोक लेता है। धीरे धीरे दोनों करीब आते हैं, लेकिन यश को अपने गैंग ने धोखा देकर समुद्र में फेंक दिया। आदिति विदेश चली जाती है, जहाँ उसकी मुलाकात याददाश्त खो चुके यश से होती है। वापस लौटने पर पता चलता है कि यश का भूलना एक नाटक था, वह सत्ता हथियाने की साजिश रच रहा था। आदिति भागने की कोशिश करती है, लेकिन यश उसे कैद कर लेता है और उसे पता चलता है कि वह गर्भवती है। क्या आदिति कभी आज़ाद हो पाएगी? क्या यश का प्यार कभी सच्चा था?
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इस एपिसोड की समीक्षा

मासूमियत का नाटक

इस दृश्य में लड़की की आंखों में छिपा दर्द साफ दिख रहा है। जब वह कागजात पर हस्ताक्षर देखती है तो उसका चेहरा बदल जाता है। आज़ाद परिंदे की कहानी में ऐसा मोड़ किसी ने नहीं सोचा था। सफेद पोशाक में वह किसी परी लग रही थी लेकिन हालात ने उसे जकड़ लिया है। पुरुष का व्यवहार भी काफी रहस्यमयी बना हुआ है।

काले कोट वाला राज

काले कोट वाले व्यक्ति का रवैया काफी सख्त नजर आ रहा है। वह फर्श पर बैठी महिला को दबा रहा है जैसे उसकी कोई औकात न हो। आज़ाद परिंदे में सत्ता संतुलन बहुत गजब के हैं। जब वह लड़की को बिस्तर पर धकेलता है तो सांस रुक जाती है। क्या यह प्यार है या बदला? हर पल नया सवाल खड़ा करता है।

फर्श पर गिरा अभिमान

सफेद कोट वाली महिला की हालत देखकर दिल द्रवित हो जाता है। वह रोते हुए दस्तखत कर रही है जैसे उसकी मजबूरी हो। आज़ाद परिंदे के इस भाग में भावनात्मक ड्रामा चरम पर है। उसकी आंखों में आंसू और चेहरे पर गुस्सा दोनों साफ झलक रहे हैं। ऐसा लगता है कि कोई बड़ा षड्यंत्र रचा जा रहा है इस कमरे के अंदर।

कागजों की जंग

उस काले फोल्डर में क्या था जिसने सब कुछ बदल दिया? लड़की ने कांपते हाथों से कलम उठाया और दस्तखत कर दिया। आज़ाद परिंदे की पटकथा में यह सबसे नाजुक पल है। कमरे का माहौल इतना तनावपूर्ण है कि दर्शक भी बेचैन हो उठते हैं। हर संवाद के बाद सन्नाटा छा जाता है जो शोर से ज्यादा असरदार है।

बिस्तर पर अधूरी कहानी

जब वह लड़की बिस्तर पर लेटी तो उसकी सांसों की रफ्तार तेज हो गई। काले कोट वाला शख्स उसके करीब आया तो माहौल गर्म हो गया। आज़ाद परिंदे में प्यार और डर का मिश्रण बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है। कैमरा कोण भी बहुत करीब से पकड़ता है हर भावनाओं को। यह सीन लंबे समय तक याद रहेगा।

पीछे खड़ा साया

पीछे खड़ा दूसरा व्यक्ति भी कुछ छिपा रहा है। उसकी चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही है। आज़ाद परिंदे में हर किरदार की अपनी एक परत है। जब वह आगे बढ़ता है तो लगता है कि अब कुछ बड़ा होने वाला है। रंगीन कमीज वाला शख्स भी इस खेल का हिस्सा लग रहा है। कहानी में उलझन बढ़ती जा रही है।

झूमर की चमक और आंसू

लड़की के कानों में झूमर की चमक भी उसकी उदासी को छिपा नहीं पा रही है। आज़ाद परिंदे की पोशाक डिजाइन बहुत शानदार है। सफेद कमीज और काली पोशाक का मेल शानदार लग रहा है। जब वह अपने गले को पकड़ती है तो लगता है कि उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही है। विवरण पर बहुत ध्यान दिया गया है।

ताकत का खेल

यह सिर्फ एक कमरा नहीं बल्कि सत्ता का मैदान है। एक तरफ फर्श पर गिरा अभिमान है तो दूसरी तरफ खड़ा घमंड। आज़ाद परिंदे में किरदारों के बीच की खींचतान बहुत असली लगती है। जब वह उसे उठाकर ले जाता है तो लगता है कि अब उसकी मर्जी चलेगी। दर्शक बस तमाशबीन बनकर रह जाते हैं इस तेज तर्रार ड्रामे में।

भावनाओं का उथल पुथल

शुरू में गुस्सा था फिर डर और अंत में एक अजीब सी खामोशी। आज़ाद परिंदे के इस दृश्य में अभिनय बहुत लेवल की है। लड़की की आंखों में जो नमी है वह दिल को छू लेती है। पुरुष का चेहरा पत्थर जैसा सख्त है लेकिन आंखों में कुछ और ही कहानी है। यह जोड़ी स्क्रीन पर आग लगा देती है।

कमरे का राज

इस कमरे की दीवारें भी इन राजों को सहन नहीं कर पा रही होंगी। आज़ाद परिंदे का यह दृश्य सबसे ज्यादा मशहूर होने वाला है। रोशनी धीमी है जो नाटक को और गहरा बनाती है। जब वह कागज फेंकती है तो लगता है कि अब युद्ध शुरू हो गया है। इस मंच पर ऐसी सामग्री देखना सुकून देता है। कहानी आगे क्या मोड़ लेगी यह जानने की उत्सुकता है।