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आज़ाद परिंदेवां62एपिसोड

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आज़ाद परिंदे

अपनी चाची से बचने के लिए आदिति गैंगस्टर यश को फंसाती है। यश उसे अपने पास रोक लेता है। धीरे धीरे दोनों करीब आते हैं, लेकिन यश को अपने गैंग ने धोखा देकर समुद्र में फेंक दिया। आदिति विदेश चली जाती है, जहाँ उसकी मुलाकात याददाश्त खो चुके यश से होती है। वापस लौटने पर पता चलता है कि यश का भूलना एक नाटक था, वह सत्ता हथियाने की साजिश रच रहा था। आदिति भागने की कोशिश करती है, लेकिन यश उसे कैद कर लेता है और उसे पता चलता है कि वह गर्भवती है। क्या आदिति कभी आज़ाद हो पाएगी? क्या यश का प्यार कभी सच्चा था?
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इस एपिसोड की समीक्षा

अस्पताल का दर्दनाक सच

अस्पताल का वो दृश्य बहुत दिल को छू लेने वाला था और रुला देने वाला भी। जब वह उसकी नसों में दवा देख रही थी, तो आँखों में एक अजीब सी खामोशी थी। आज़ाद परिंदे की कहानी में यह मोड़ बहुत महत्वपूर्ण लग रहा है। युवक का ध्यान देना और युवती का चुप रहना सब कुछ कहता है। ऐसा लगता है जैसे कोई बड़ा राज़ छिपा हो इन दोनों के बीच। नेटशॉर्ट पर ऐसे ड्रामा देखना सुकून देता है। मुझे यह बहुत पसंद आया।

खामोशी का शोर

उसकी आँखों में जो गहरी उदासी थी, वह शब्दों से बयां नहीं हो सकती। युवक ने जब सूप का चम्मच उसके मुँह के पास लाया, तो लगा जैसे वक्त थम गया हो। आज़ाद परिंदे में भावनाओं को बहुत बारीकी से दिखाया गया है। हर फ्रेम में एक अलग कहानी छिपी हुई है। मैं यह जानने के लिए बेताब हूँ कि आखिर हुआ क्या था उसे। यह दृश्य बहुत प्यारा था।

नर्स का छोटा किरदार

नर्स का किरदार छोटा था पर असरदार था और बहुत जरूरी भी। उसने बिना कुछ कहे सब समझ लिया था। युवक और युवती के बीच की दूरियाँ साफ़ दिख रही थीं। आज़ाद परिंदे की स्क्रिप्ट बहुत मजबूत लग रही है। जब उसने हाथ थामा, तो लगा जैसे वह उसे खोना नहीं चाहता। यह कहानी आगे क्या रूप लेगी, यह देखना दिलचस्प होगा। सब अच्छा लगा।

सफेद पोशाक का राज़

सफेद कपड़ों वाला दृश्य अचानक आया और हैरान कर दिया। वह पुस्तक और वह पोशाक किसी रस्म की ओर इशारा कर रही थी। आज़ाद परिंदे में ऐसे ट्विस्ट दर्शकों को बांधे रखते हैं। युवक की गंभीरता और युवती की घबराहट साफ़ झलक रही थी। शायद यह किसी नई शुरुआत का संकेत है या किसी अंत का। मुझे यह पसंद है।

रंगों का जादू

रंगों का इस्तेमाल बहुत नरम और सुकून भरा था। अस्पताल के कमरे की रोशनी ने उदासी को और गहरा किया। आज़ाद परिंदे की सिनेमेटोग्राफी कायल कर देती है। जब वह उसे खिलाने की कोशिश कर रहा था, तो लगा जैसे वह माफ़ी मांग रहा हो। ऐसे पल बार बार देखने को मन करता है। बहुत सुंदर दृश्य था।

तनाव भरी कहानी

कहानी में जो तनाव था, वह हर पल बढ़ता जा रहा था। युवती का चुप रहना सबसे बड़ा सवाल था। आज़ाद परिंदे में किरदारों की गहराई बहुत अच्छी है। युवक की कोशिशें व्यर्थ नहीं जा रही थीं, बस समय चाहिए था। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे कंटेंट मिलना दुर्लभ है। मैं खुश हूँ।

किताब वाला व्यक्ति

अंत में जो व्यक्ति किताब लेकर आया, वह कौन था? क्या यह कोई पादरी था या वकील? आज़ाद परिंदे के प्लॉट में यह नया मोड़ है। युवती के चेहरे पर डर और उलझन साफ़ दिख रही थी। यह दृश्य पूरी कहानी को बदल सकता है। मैं अगले एपिसोड का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूँ। रोमांचक है।

भावनाओं का खेल

भावनाओं का खेल इस ड्रामे की जान है। युवक की आँखों में चिंता और युवती की आँखों में गम था। आज़ाद परिंदे ने साबित किया है कि कम डायलॉग में भी बहुत कुछ कहा जा सकता है। हाथ पकड़ने का वो पल सबसे यादगार था। ऐसे ड्रामा दिल पर गहरा असर छोड़ जाते हैं। सच में अच्छा है।

संतुलित रफ़्तार

कहानी की रफ़्तार बहुत संतुलित थी। न तो बहुत तेज और न ही बहुत धीमी। आज़ाद परिंदे में हर सीन का अपना वजन था। जब वह बिस्तर पर लेटी थी, तो लगा जैसे वह टूट गई हो। युवक का सहारा देना उस वक्त जरूरी था। यह रिश्ता बहुत पेचीदा लग रहा है। मुझे अच्छा लगा।

बेहतरीन अनुभव

कुल मिलाकर यह एक बेहतरीन अनुभव था। अभिनय इतना असली लगा कि मैं खुद को उस कमरे में पा रही थी। आज़ाद परिंदे जैसे शो देखने के लिए नेटशॉर्ट बेस्ट है। अंत का दृश्य छोड़ गया था एक बड़ा सवाल। क्या वह शादी कर रहे हैं या कोई कोर्ट केस है? सब कुछ रोचक है। बहुत बढ़िया।