रुद्र सिंह का चेहरा देखकर लगता है कि उन्हें सच का सामना करना पड़ रहा है। आदित्य मल्होत्रा ने अपनी जान देकर भी सच सामने रख दिया। यह दृश्य दिल दहला देने वाला है। कौन पहचाने सच्चे सम्राट को जब ऐसे हालात हों। सम्राट की खामोशी सब कुछ कह रही है।
आदित्य मल्होत्रा का त्याग देखकर आंखें नम हो गईं। उन्होंने सिर्फ शब्दों से नहीं बल्कि अपने खून से सबूत दिया। रुद्र सिंह को अब फैसला लेना होगा। कौन पहचाने सच्चे सम्राट को इस कठिन घड़ी में। इतिहास गवाह बनेगा इस बलिदान का।
सूरज शर्मा की आंखों में हैरानी साफ दिख रही थी। वह सम्राट के करीब हैं पर इस साजिश से अनजान लग रहे हैं। कौन पहचाने सच्चे सम्राट को जब चारों तरफ धोखा हो। आगे क्या होगा यह देखना दिलचस्प होगा।
गांव का नज़ारा बहुत दर्दनाक है। चंचल जैसे लोग बेकसूर पकड़े जा रहे हैं। कबीर सिंघानिया वहां मौजूद हैं, क्या वह मदद करेंगे। कौन पहचाने सच्चे सम्राट को जब प्रजा रो रही हो। यह कहानी आगे बहुत गहराई में जाएगी।
दरबार का माहौल बहुत तनावपूर्ण था। नाच से शुरू होकर खून तक का सफर बहुत तेज था। रुद्र सिंह की कुर्सी अब हिल रही है। कौन पहचाने सच्चे सम्राट को जब सच कड़वा हो। हर पल नया मोड़ ले रहा है।
अभिनय बहुत दमदार है खासकर आदित्य मल्होत्रा का। पेट दिखाकर भूखमरी का सबूत देना आसान नहीं था। कौन पहचाने सच्चे सम्राट को जब नज़ारे ऐसे हों। सम्राट की चुप्पी सबसे बड़ा नाटक है। दर्शक भी हैरान रह गए।
लगा था कि बस नाच होगा पर कहानी में ऐसा मोड़। आदित्य ने सबको चौंका दिया। रुद्र सिंह अब क्या करेंगे। कौन पहचाने सच्चे सम्राट को जब देश में अकाल हो। यह कार्यक्रम देखने लायक है।
कबीर सिंघानिया का किरदार रहस्यमयी लग रहा है। वह गांव में क्यों आए हैं। क्या वह सम्राट के आदमी हैं या दुश्मन। कौन पहचाने सच्चे सम्राट को जब रक्षक ही सवाल में हों। कहानी में कई परतें हैं।
जब आदित्य जमीन पर गिरा तो सन्नाटा छा गया। खून देखकर सम्राट भी हिल गए। कौन पहचाने सच्चे सम्राट को जब त्याग ऐसा हो। यह दृश्य लंबे समय तक याद रहेगा। बहुत भाुक मोड़ है।
यह कहानी सिर्फ ताज की नहीं प्रजा की भी है। रुद्र सिंह को अब सच्चाई देखनी होगी। कौन पहचाने सच्चे सम्राट को जब हकीकत सामने हो। हर पात्र अपनी जगह अहम है। आगे का इंतज़ार है।