सूर्य देश के सम्राट को लगा कि अब पूरे देश में शांति है। तभी हरित प्रदेश के दूत ने एक समारोह में अपनी जान देकर वहाँ के सूखे और अधिकारियों के भ्रष्टाचार का सच बता दिया। गुस्से में सम्राट खुद हरित प्रदेश आया और अपनी आँखों से भ्रष्टाचार की त्रासदी देखी। भ्रष्ट अफसर उसे सम्राट का नकली हमशक्ल समझ बैठे – उन्हें लगा वह असली सम्राट नहीं है। सम्राट ने इस भूल का फायदा उठाया, उनके राजद्रोह और सत्ता हथियाने की योजना में शामिल होने का नाटक किया, और फिर उनके साथ राजधानी लौट आया...