उस नीली जर्सी वाले लड़के की आँखों में जुनून साफ़ दिख रहा था। जब उसने श्रमिकों के साथ बहस की, तो लगा सब खत्म हो गया। पर फिर जो गले मिलने वाला दृश्य आया, दिल छू गया। शून्य से नायक: हमारा अनोखा दल ने रिश्तों की गहराई को बहुत खूबसूरती से दिखाया है। निर्माण स्थल का माहौल भी कहानी में जान डालता है।
भविष्य की तकनीक और फुटबॉल का मेल कमाल का है। वो चमकता हुआ उपकरण किस काम आता है, ये जानने की उत्सुकता बनी रहती है। शून्य से नायक: हमारा अनोखा दल में दृश्य प्रभाव बहुत शानदार हैं। नीली रोशनी वाले कपड़े और मानवरहित विमान का इस्तेमाल कहानी को आगे बढ़ाता है। देखने में बहुत मज़ा आता है।
सफेद और बैंगनी बालों वाली महिला का किरदार रहस्यमयी है। वो हमेशा शांत रहती है, पर उसकी आँखें सब कुछ देखती हैं। शून्य से नायक: हमारा अनोखा दल में उसकी भूमिका बहुत अहम लगती है। जब वो उपकरण चेक करती है, तो लगता है वो दल की असली ताकत है। उसकी शैली भी बहुत अनोखी है।
रात के समय पुरानी रंगशाला का दृश्य बहुत भावुक था। टूटी हुई सीटें और खाली मैदान उम्मीद की किरण दिखाते हैं। शून्य से नायक: हमारा अनोखा दल ने मंच सज्जा पर बहुत मेहनत की है। रोशनी का पड़ना और लड़के का थका हुआ चेहरा कहानी बताता है। ये दृश्य बहुत देर तक याद रहता है।
वर्दी वाले कर्मचारी की परेशानी साफ़ दिख रही थी। पसीने की बूंदें और गुस्सा असली लगता था। शून्य से नायक: हमारा अनोखा दल में खलनायक और नायक की लाइन धुंधली है। बाद में जब वो समझते हैं, तो लगता है सब ठीक हो जाएगा। अभिनय बहुत स्वाभाविक है।
फुटबॉल मैच के पुराने दृश्य बहुत तेज़ थे। बॉल का चलना और खिलाड़ियों की गति देखने लायक थी। शून्य से नायक: हमारा अनोखा दल में रोमांच और भावना का संतुलन सही है। क्रमांक ७ वाले खिलाड़ी की मेहनत रंग लाती है। ऐसे खेल फिल्में कम ही देखने को मिलते हैं।
जब बाकी दल के सदस्य आए, तो लगा अब असली खेल शुरू होगा। क्रमांक ३ और ५१ वाले भी तैयार लग रहे थे। शून्य से नायक: हमारा अनोखा दल में दल कार्य की अहमियत बताई गई है। सबका एक साथ खड़ा होना ताकत बढ़ाता है। ये दोस्ती वाली कहानी दिल को अच्छी लगती है।
तकनीकी आँख वाला कर्मचारी शुरू में डरावना लगा। पर कहानी आगे बढ़ने पर पता चला वो भी अहम है। शून्य से नायक: हमारा अनोखा दल में किरदारों की गहराई है। भारी वाहन वाला दृश्य थोड़ा तनावपूर्ण था। पर अंत सब खुश हैं। ऐसे मोड़ कहानी को रोचक बनाते हैं।
लड़के के चेहरे पर चोट के निशान उसकी लड़ाई बताते हैं। वो हारा नहीं, बल्कि और मज़बूत हुआ। शून्य से नायक: हमारा अनोखा दल संघर्ष की कहानी है। उसकी मुस्कान देखकर लगता है सब मेहनत सफल हुई। ऐसे प्रेरणा वाले किरदार हमें आगे बढ़ाते हैं।
पूरा शहर भविष्य का लगता है, ऊँची इमारतें और त्रिविम छवि। शून्य से नायक: हमारा अनोखा दल की दुनिया बहुत विस्तृत है। निर्माण और रंगशाला का अंतर अच्छा है। कहानी में नयापन है जो पुराने सूत्र से अलग है। देखने वाले को बांधे रखती है।