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आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मतवां1एपिसोड

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आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत

वीर सिंह जेल से जल्दी रिहा होकर भाई ध्रुव और भाभी प्रिया के साथ लौटा। रास्ते में अनिका रेड्डी की कार से टक्कर हो गई। अनिका ने पचास हज़ार रुपये की माँग कर दी। तारा को हॉस्पिटल पहुँचाने के लिए वीर रुक गया। उसने अनिका और उसके साथियों को हराया और उनका सहायक यश मल्होत्रा को बुलवाया। यश ने प्रिया को मुआवज़ा माँगा, जिससे वीर भड़क गया। फिर अर्जुन राठौर अपने लोगों के साथ आया। वीर ने अकेले ही सबको हरा दिया। तभी चेयरमैन शौर्य मल्होत्रा ने वीर को पहचानकर उसकी मदद की
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इस एपिसोड की समीक्षा

जेल से राजा का आगमन

लू यान की जेल के अंदर की शांति वाकई डरावनी लगती है, जैसे वह किसी तूफान का इंतज़ार कर रहा हो। वह कैदी की तरह नहीं बल्कि एक राजा की तरह चलता है। शीर्षक आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत इस स्थिति पर बिल्कुल सही बैठता है। बाहर काली गाड़ियों की कतार और झाओ तियानलونغ का इंतज़ार देखकर लगता है कि असली खेल अब शुरू होगा। जेल की नीली रोशनी और बाहर के दिन के अंतर को बहुत अच्छे से दिखाया गया है। यह कहानी मुझे बहुत पसंद आई और मैं आगे क्या होता है यह जानने के लिए उत्सुक हूँ।

लाल कार्पेट पर स्वागत

झाओ तियानलونغ और वू युआनवेन का जेल के बाहर स्वागत देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। लाल कार्पेट पर काले कोट वाले लोग झुक रहे हैं। यह दिखाता है कि लू यान की ताकत कितनी बड़ी है। शीर्षक आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत कहानी के रोमांच को बढ़ाता है। नेटशॉर्ट ऐप पर यह देखना एक अलग ही अनुभव है। जेल के अंदर की हिंसा और बाहर की शक्ति का विरोधाभास बहुत गहरा है। मुझे लगता है कि यह गुंडों की लड़ाई बहुत जल्द शुरू होने वाली है।

तनावपूर्ण माहौल

जेल के अंदर का माहौल बहुत तनावपूर्ण था, कोई कटोरे सिर पर रखे बैठे थे। फिर अचानक लू यान को बाहर ले जाया गया। यह बदलाव बहुत तेज़ है। शीर्षक आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत हर मोड़ पर सही लगता है। वू युआनवेन के चश्मे और गंभीर चेहरे ने कहानी में वजन डाला है। मुझे यह पता चलना है कि आखिर लू यान ने ऐसा क्या किया है। दृश्य बहुत फिल्मी हैं और संगीत भी सही जगह पर है।

बड़ा सरगना रिहा

काली महंगी गाड़ियों का काफिला देखकर लगता है कि कोई बड़ा सरगना रिहा हुआ है। लू यान के चेहरे पर कोई डर नहीं है, बस एक अजीब सी शांति है। शीर्षक आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत इसी भावना को दर्शाता है। झाओ तियानलونغ का हरा कोट और वू युआनवेन का ग्रे कोट उनकी पहचान बनाता है। जेल के गार्ड भी उनकी ताकत के आगे बेबस लग रहे थे। यह लघु नाटक बहुत ही शानदार तरीके से बनाया गया है।

सबकी सांसें रुक गईं

जब लू यान जेल से बाहर निकला तो सबकी सांसें रुक गईं। बाहर खड़े लोग उसे सलामी दे रहे थे। यह दृश्य बहुत शक्तिशाली था। शीर्षक आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत कहानी की गहराई को बताता है। मुझे नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसी कहानी देखना बहुत पसंद है क्योंकि यह समय बर्बाद नहीं करते। जेल की दीवारों के पीछे की कहानी अब बाहर आएगी। हर किरदार का अपना महत्व है और कोई भी दृश्य फालतू नहीं है।

रोशनी का विरोधाभास

जेल के अंदर की नीली रोशनी और बाहर की धूप का विरोधाभास बहुत अच्छा है। लू यान का किरदार बहुत रहस्यमयी है, पता नहीं वह नायक है या खलनायक। शीर्षक आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत इसी उलझन को बढ़ाता है। झाओ तियानलونغ का आगमन बहुत धांसू है। मुझे लगता है कि आगे की कहानी में बहुत सारे पेंच होने वाले हैं। अभिनय इतना स्वाभाविक है कि लगता है सब असली है।

सम्मान की नई परिभाषा

वू युआनवेन और झाओ तियानलونغ के बीच का संबंध देखने लायक है। दोनों ही लू यान का सम्मान कर रहे हैं। शीर्षक आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत हर दृश्य में गूंजता है। जेल के अंदर की मारपीट और बाहर का शाही स्वागत एक दूसरे के विपरीत हैं। यह कहानी मुझे बहुत पसंद आई और मैं आगे क्या होता है यह जानने के लिए उत्सुक हूँ। नेटशॉर्ट ऐप पर यह देखना एक अलग ही अनुभव है।

क्या वह आज़ाद है

लू यान के जेल से निकलते ही कहानी में एक नया मोड़ आ गया है। अब वह आज़ाद है लेकिन क्या वह सच में आज़ाद है। शीर्षक आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत इसी सवाल को उठाता है। बाहर खड़े गुंडे और गाड़ियां बताती हैं कि खतरा अभी टला नहीं है। मुझे यह नाटक बहुत पसंद आया क्योंकि इसमें बोरियत नहीं है। हर दृश्य में कुछ न कुछ नया होता है जो दर्शकों को बांधे रखता है।

गेट पर इंतज़ार

जेल के गेट पर खड़े होकर वू युआनवेन का इंतज़ार करना दिखाता है कि लू यान कितना अहम है। शीर्षक आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत कहानी के विषय के साथ चलता है। झाओ तियानलونغ की मुस्कान में भी एक खतरा छिपा हुआ है। मुझे लगता है कि यह गुंडों की लड़ाई बहुत जल्द शुरू होने वाली है। दृश्य बहुत फिल्मी हैं और संगीत भी सही जगह पर है। यह लघु नाटक बहुत ही शानदार तरीके से बनाया गया है।

असली फिल्म शुरू

अंत में जब लू यान गाड़ी की तरफ बढ़ता है तो लगता है कि असली फिल्म अब शुरू हुई है। शीर्षक आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत इसी उत्साह को बढ़ाता है। जेल की कहानी अब शहर की सड़कों पर आएगी। मुझे नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसी कहानी देखना बहुत पसंद है क्योंकि यह समय बर्बाद नहीं करते। हर किरदार का अपना महत्व है और कोई भी दृश्य फालतू नहीं है। मैं अगली कड़ी का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा हूँ।