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जीवन भर का साथवां10एपिसोड

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जीवन भर का साथ

गीता, एक गाँव की सफाई कर्मचारी, को अचानक करोड़ों की लॉटरी लगी। खुश होकर वह अपने बेटे रजत को पैसे देने शहर पहुँची। लेकिन बहू और उसकी माँ ने उसे अपमानित किया। बेटे ने भी उसे ठुकरा दिया और रिश्ता तोड़ दिया। बाद में जब उन्हें पता चला कि गीता ने करोड़ों की लॉटरी जीती थी, तब सबको अपनी गलती का एहसास हुआ। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। गीता की जिंदगी अब बदल चुकी थी।
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इस एपिसोड की समीक्षा

अमीरों का घमंड

सफेद फर और फूलों वाली साड़ी पहनी वो औरत कितनी घमंडी लग रही थी! उसकी बातों में जहर और चेहरे पर नफरत साफ झलक रही थी। बेचारी वो सादी औरत क्या करे, बस चुपचाप सब सुन रही थी। जीवन भर का साथ निभाने वाले रिश्ते में दरारें पड़ना तय है जब बाहर से ऐसे लोग आकर दखल दें। उस जवान लड़के का चुप रहना भी कुछ कह रहा है।

कैफे का गवाह

अंदर कैफे में बैठा वो आदमी सब कुछ देख रहा था। उसकी आँखों में चिंता और चेहरे पर गंभीरता थी। बाहर जो हंगामा हो रहा था, वो उसे साफ दिख रहा था। जब वो दो औरतें झगड़ने लगीं, तो उसका चेहरा और भी सख्त हो गया। जीवन भर का साथ निभाने की कहानी में ये कैफे वाला सीन बहुत अहम लग रहा है। शायद वो ही कोई बड़ा फैसला लेने वाला है।

झगड़े की शुरुआत

पहले तो बस बातें हो रही थीं, लेकिन फिर अचानक हाथापाई शुरू हो गई। उस फूलों वाली साड़ी वाली औरत ने उस सादी औरत का हाथ पकड़ लिया। जीवन भर का साथ निभाने वाले रिश्ते में ये हिंसा बिल्कुल नहीं जम रही। वो जवान लड़का बस खड़ा तमाशा देख रहा था। ऐसे में कोई भी औरत अपने आप को असुरक्षित महसूस करेगी। ये ड्रामा बहुत आगे जाने वाला है।

माँ का दर्द

उस सादी औरत के चेहरे पर जो दर्द था, वो शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। उसने सब कुछ सहन किया, लेकिन जब बात हाथापाई तक पहुँची, तो उसकी आँखों में आँसू आ गए। जीवन भर का साथ निभाने का वादा करने वाले लोग ही उसे इस हालत में लाए हैं। उस जवान लड़के का उसकी तरफ देखना भी कुछ खास नहीं था। ये कहानी बहुत दर्दनाक मोड़ ले रही है।

नई एंट्री, नया फिटना

जैसे ही वो दो नई औरतें आईं, माहौल बदल गया। एक की चमकती हुई साड़ी और दूसरी की फूलों वाली ड्रेस, दोनों ही उस सादी औरत के लिए मुसीबत बन गईं। जीवन भर का साथ निभाने की कहानी में ये नए किरदार बहुत बड़ी रुकावट हैं। उनकी बातों में नफरत और हरकतों में घमंड साफ दिख रहा था। अब देखना है कि ये कहानी कहाँ जाती है।

खामोश गवाह

वो जवान लड़का पूरे झगड़े के दौरान बस खड़ा रहा। न उसने कुछ कहा, न ही कुछ किया। उसकी खामोशी सबसे ज्यादा शोर मचा रही थी। जीवन भर का साथ निभाने वाले रिश्ते में उसकी भूमिका क्या है, ये समझना मुश्किल है। शायद वो डरा हुआ है या फिर कुछ और। उसकी आँखों में जो बेचैनी थी, वो सब कुछ कह रही थी।

कैफे वाला राज

अंदर कैफे में बैठा वो आदमी बाहर के हंगामे को बड़े गौर से देख रहा था। उसने अपनी घड़ी देखी, जैसे वो किसी का इंतजार कर रहा हो। जीवन भर का साथ निभाने की कहानी में उसकी एंट्री बहुत अहम लग रही है। जब वो बाहर आया, तो उसका चेहरा गंभीर था। शायद वो ही इस झगड़े को सुलझाने वाला है या फिर और बिगाड़ने वाला।

रिश्तों की डोर

लाल कार्पेट से लेकर सड़क तक, इस कहानी में रिश्तों की डोर बहुत कमजोर होती जा रही है। उस आदमी का उस सादी औरत के साथ चलना और फिर उसे छोड़ देना, सब कुछ शक के घेरे में है। जीवन भर का साथ निभाने का वादा अब सिर्फ एक याद बनकर रह गया है। नई औरतों की एंट्री ने इस रिश्ते को और भी उलझा दिया है। अब आगे क्या होगा, ये देखना बाकी है।

आँसू और गुस्सा

उस सादी औरत की आँखों में आँसू और उस फूलों वाली साड़ी वाली औरत के चेहरे पर गुस्सा, ये दोनों ही भावनाएं बहुत तेजी से उभर रही थीं। जीवन भर का साथ निभाने की कहानी में ये भावनात्मक टकराव बहुत गहरा है। जब हाथापाई हुई, तो सब कुछ और भी बिगड़ गया। वो जवान लड़का और कैफे वाला आदमी, दोनों ही इस कहानी के अहम हिस्से हैं।

सूट और कोट का टकराव

लाल कार्पेट पर चलते हुए उस आदमी का घमंड और उस औरत की सादगी बिल्कुल साफ दिख रही थी। जैसे ही बाहर निकले, माहौल बदल गया। नई औरतों की एंट्री ने कहानी में नया मोड़ दे दिया। जीवन भर का साथ निभाने का वादा शायद यहीं टूटने वाला है। उस बूढ़ी औरत की आँखों में डर और बेचैनी साफ पढ़ी जा सकती थी जब वो उन चमकती हुई औरतों से बात कर रही थी।