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जीवन भर का साथवां6एपिसोड

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जीवन भर का साथ

गीता, एक गाँव की सफाई कर्मचारी, को अचानक करोड़ों की लॉटरी लगी। खुश होकर वह अपने बेटे रजत को पैसे देने शहर पहुँची। लेकिन बहू और उसकी माँ ने उसे अपमानित किया। बेटे ने भी उसे ठुकरा दिया और रिश्ता तोड़ दिया। बाद में जब उन्हें पता चला कि गीता ने करोड़ों की लॉटरी जीती थी, तब सबको अपनी गलती का एहसास हुआ। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। गीता की जिंदगी अब बदल चुकी थी।
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इस एपिसोड की समीक्षा

घमंडी बहू का एंट्री

सफेद फर कोट वाली औरत का एटीट्यूड देखकर गुस्सा आता है। वो माँ को धक्का देती है और अपनी नाक सिकोड़ती है। लगता है उसे अपनी अमीरी पर बहुत घमंड है। जीवन भर का साथ में विलेन कैरेक्टर की एंट्री धमाकेदार हुई है। अब देखना है ये गरीब माँ इस सबका कैसे सामना करती है।

बेटे की बेवफाई

माँ के सामने खड़ा होकर चिल्लाना किसी बेटे को शोभा नहीं देता। उसकी आँखों में गुस्सा है लेकिन माँ की आँखों में बेबसी। जीवन भर का साथ की कहानी में ये किरदार बहुत नेगेटिव लग रहा है। उम्मीद है आगे चलकर उसे अपनी गलती का अहसास होगा और वो माँ के पास लौटेगा।

लॉबी का वो सीन

शानदार लॉबी में गरीब कपड़ों वाली माँ बिल्कुल अलग लग रही थी। चारों तरफ अमीरी थी लेकिन उस माँ के चेहरे पर फकीरी और दुख था। जीवन भर का साथ ने सेट डिजाइन और किरदारों के कपड़ों से ही कहानी बता दी। विजुअल स्टोरीटेलिंग बहुत शानदार है इस शो में।

आँसुओं की बाढ़

माँ के चेहरे के एक्सप्रेशन देखकर लगता है जैसे एक्ट्रेस सच में रो रही हो। हर झुर्री में दर्द साफ दिख रहा था। जीवन भर का साथ में एक्टिंग इतनी नेचुरल है कि हम भी उनके साथ रो पड़ते हैं। डायरेक्टर ने क्लोजअप शॉट्स का बहुत अच्छा इस्तेमाल किया है इमोशन दिखाने के लिए।

पैसे की पावर

पहले सीन में ही कार की चाबी और सूट बूट दिखाकर मैसेज दे दिया गया कि यहाँ पैसा ही सब कुछ है। लेकिन जब माँ आती है तो पता चलता है कि इंसानियत पैसों से बड़ी होती है। जीवन भर का साथ में ये थीम बहुत स्ट्रॉन्गली पेश की गई है। अमीरी और गरीबी का ये टकराव देखने लायक है।

बहू का घमंड टूटेगा

उस औरत ने माँ को जिस तरह धक्का दिया, मुझे लगता है आगे चलकर उसे बहुत पछतावा होगा। ऐसे किरदार अक्सर कहानी में सबक सीखते हैं। जीवन भर का साथ में ये किरदार बहुत घृणित लग रहा है लेकिन शायद आगे इसका रिवर्सल देखने को मिले। विलेन को हारते देखना ही तो मजा है।

माँ का संघर्ष

बिना कुछ बोले वो माँ सब कुछ सह रही है। उसकी चुप्पी में जो शोर है वो हजार चीखों से ज्यादा तेज है। जीवन भर का साथ में इस माँ का किरदार बहुत प्रेरणादायक है। वो हार नहीं मान रही है और अपने बेटे से मिलने आई है। माँ का प्यार कभी नहीं मरता।

ड्रामे की शुरुआत

बस कुछ मिनट के सीन में ही इतना कुछ कह दिया। ऑफिस का सीन, लॉबी का झगड़ा, माँ के आँसू और बेटे का गुस्सा। जीवन भर का साथ की रफ्तार बहुत तेज है और हर सीन में कुछ न कुछ नया है। नेटशॉर्ट पर ऐसे शोज देखना बहुत सुकून देता है क्योंकि इनमें बेवजह का टाइम वेस्ट नहीं होता।

माँ का दर्द कोई नहीं समझा

वो बूढ़ी औरत जब जमीन पर बैठकर रोती है, तो लगता है जैसे दुनिया भर का दर्द उसी के हिस्से में आया हो। सामने खड़ा बेटा चिल्ला रहा है और उसे अपनी शर्मिंदगी की फिक्र है। जीवन भर का साथ में ऐसे इमोशनल सीन्स देखकर रुलाई आ जाती है। काश वो बेटा अपनी माँ की हालत देख पाता।

अमीर बाप की बेरुखी

शुरुआत में ही वो कार की चाबी दिखाकर अपनी औकात जता देता है, लेकिन असली ड्रामा तो लॉबी में शुरू होता है। गरीब माँ की आँखों में आँसू देखकर दिल पसीज जाता है। बेटे का गुस्सा और उसकी नई गर्लफ्रेंड का घमंड साफ दिख रहा है। जीवन भर का साथ जैसे सीन में क्लास डिफरेंस बहुत गहराई से दिखाया गया है।