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टूटे रिश्ते और दूरीवां35एपिसोड

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टूटे रिश्ते और दूरी

राहुल कपूर ससुर महेश मल्होत्रा का इलाज कर लौटता है और वेस्ट सिटी मॉल में पत्नी रिया मल्होत्रा की बेवफाई विक्रम सिंह के साथ देखता है। सुरक्षा ताबीज़ सच उजागर करता है। विक्रम हमले में महेश को घायल कर देता है। नेहा खन्ना राहुल को बचाती है। शिवराजपुर ऑक्शन हॉल में राहुल पहचान दिखाता है। रिया की गलती से ज़ीरो-वन इंजेक्शन नष्ट होता है, महेश की मृत्यु हो जाती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

खून के निशान और चुप्पी

उसके गले पर खून के निशान देखकर सब स्तब्ध रह गए। वह चुपचाप खड़ा था, जैसे कोई अपराधी हो। लेकिन उसकी आंखों में गुस्सा था, नहीं, बल्कि दर्द था। टूटे रिश्ते और दूरी के बीच यह दृश्य दिल को छू गया।

सूट वाला आदमी और उसकी चुप्पी

वह सूट पहने खड़ा था, जैसे कोई न्यायाधीश हो। उसकी आंखों में कोई भावना नहीं थी, बस एक ठंडी चुप्पी। टूटे रिश्ते और दूरी के बीच वह सबसे ज्यादा रहस्यमयी लगा। जैसे वह सब कुछ जानता हो, लेकिन बोलना नहीं चाहता।

ड्रेस और गहने की चमक

उसकी ड्रेस और गहने इतने चमकदार थे कि लगता था जैसे वह किसी राजमहल से आई हो। लेकिन उसकी आंखों में डर था। टूटे रिश्ते और दूरी के बीच यह विरोधाभास सबसे ज्यादा दिलचस्प लगा।

कमरे का माहौल और तनाव

कमरे में इतना तनाव था कि लगता था जैसे हवा भी रुक गई हो। सब एक-दूसरे को देख रहे थे, लेकिन कोई बोल नहीं रहा था। टूटे रिश्ते और दूरी के बीच यह मौन सबसे ज्यादा भारी लगा।

उसकी आवाज़ में कंपन

जब वह बोली, तो उसकी आवाज़ में कंपन था। जैसे वह रोना चाहती हो, लेकिन रो नहीं सकती। टूटे रिश्ते और दूरी के बीच यह पल सबसे ज्यादा दर्दनाक लगा। उसकी आंखों में आंसू थे, लेकिन गिर नहीं रहे थे।

खून के निशान और उसकी चुप्पी

उसके गले पर खून के निशान थे, लेकिन वह चुपचाप खड़ा था। जैसे वह सब कुछ सहन कर रहा हो। टूटे रिश्ते और दूरी के बीच यह दृश्य दिल को छू गया। उसकी आंखों में गुस्सा था, लेकिन वह बोल नहीं रहा था।

सूट वाला आदमी और उसकी ठंडक

वह सूट पहने खड़ा था, जैसे कोई बर्फ का टुकड़ा हो। उसकी आंखों में कोई भावना नहीं थी, बस एक ठंडी चुप्पी। टूटे रिश्ते और दूरी के बीच वह सबसे ज्यादा रहस्यमयी लगा। जैसे वह सब कुछ जानता हो, लेकिन बोलना नहीं चाहता।

ड्रेस की चमक और आंखों का डर

उसकी ड्रेस इतनी चमकदार थी कि लगता था जैसे वह किसी राजमहल से आई हो। लेकिन उसकी आंखों में डर था। टूटे रिश्ते और दूरी के बीच यह विरोधाभास सबसे ज्यादा दिलचस्प लगा।

कमरे का तनाव और मौन

कमरे में इतना तनाव था कि लगता था जैसे हवा भी रुक गई हो। सब एक-दूसरे को देख रहे थे, लेकिन कोई बोल नहीं रहा था। टूटे रिश्ते और दूरी के बीच यह मौन सबसे ज्यादा भारी लगा।

फोन कॉल ने बदल दी कहानी

जब उसने फोन उठाया, तो सबकी सांसें रुक गईं। उसकी आंखों में डर था, लेकिन आवाज़ में दृढ़ता। टूटे रिश्ते और दूरी के बीच यह पल सबसे ज्यादा दर्दनाक लगा। उसका गला सूख गया था, फिर भी वह बोलती रही। जैसे कोई अदृश्य धागा उसे खींच रहा हो।