सिद्धार्थ की आँखों पर काला चश्मा और हाथ में छड़ी देखकर सबको लगा वो अंधे हैं, लेकिन जब शनया ने उसे ग्रिल से बचाने के लिए धक्का दिया तो पता चला कि वो सब नाटक था। नेहा की आँखों में डर और सिद्धार्थ का गुस्सा देखकर लगता है कि ये खेल खतरनाक मोड़ ले रहा है। (डबिंग) ३० साल जमे, ३ भाई पछताए में भी ऐसे ही धोखे देखे थे।
शनया ने सिद्धार्थ को बारबेक्यू के लिए बुलाया और जानबूझकर उसे खतरे में डाला। नेहा ने उसे बचाने के लिए धक्का दिया, लेकिन सबने नेहा को ही दोषी ठहरा दिया। सिद्धार्थ का कहना है कि अगर वो सच में अंधे होते तो शनया उन्हें क्यों बुलाती? ये सवाल सबके दिमाग में घूम रहा है।
नेहा ने सिद्धार्थ को बचाने के लिए खुद को खतरे में डाला, लेकिन सबने उसे ही झूठा साबित करने की कोशिश की। उसकी आँखों में सच्चाई और डर साफ दिख रहा था। सिद्धार्थ का अंधेपन का नाटक सबको बेवकूफ बना रहा है, लेकिन नेहा जानती है कि असलियत क्या है। (डबिंग) ३० साल जमे, ३ भाई पछताए जैसी ही ये कहानी है।
सिद्धार्थ ने सबको ये यकीन दिला दिया कि वो अंधे हैं, लेकिन जब नेहा ने उसे बचाने के लिए धक्का दिया तो उसका चेहरा बदल गया। वो जानता था कि ग्रिल गर्म है, फिर भी वो उसके पास गया। ये सब शनया के साथ मिलकर किया गया एक षड्यंत्र लगता है।
रात की पार्टी में रोशनी के बीच एक अंधेरा सच छिपा था। सिद्धार्थ का अंधेपन, शनया का चालाकपन और नेहा की मासूमियत सब एक दूसरे से टकरा रहे हैं। जब नेहा ने सिद्धार्थ को बचाने के लिए कदम उठाया तो सबने उसे ही गलत साबित करने की कोशिश की। ये कहानी दिल को छू लेती है।
बारबेक्यू की आग सिर्फ मांस नहीं जला रही थी, बल्कि रिश्तों के बीच की सच्चाई भी जला रही थी। सिद्धार्थ का अंधेपन का नाटक सबको बेवकूफ बना रहा है, लेकिन नेहा की आँखों में सच साफ दिख रहा था। शनया की चालाकी और सिद्धार्थ का गुस्सा देखकर लगता है कि ये कहानी आगे और भी दिलचस्प होगी।
नेहा ने सिद्धार्थ को बचाने के लिए खुद को खतरे में डाला, लेकिन सबने उसे ही झूठा साबित करने की कोशिश की। उसकी आँखों में सच्चाई और डर साफ दिख रहा था। सिद्धार्थ का अंधेपन का नाटक सबको बेवकूफ बना रहा है, लेकिन नेहा जानती है कि असलियत क्या है। (डबिंग) ३० साल जमे, ३ भाई पछताए जैसी ही ये कहानी है।
शनया ने सिद्धार्थ को बारबेक्यू के लिए बुलाया और जानबूझकर उसे खतरे में डाला। नेहा ने उसे बचाने के लिए धक्का दिया, लेकिन सबने नेहा को ही दोषी ठहरा दिया। सिद्धार्थ का कहना है कि अगर वो सच में अंधे होते तो शनया उन्हें क्यों बुलाती? ये सवाल सबके दिमाग में घूम रहा है।
जब नेहा ने सिद्धार्थ को बचाने के लिए कदम उठाया तो सबने उसे ही गलत साबित करने की कोशिश की। सिद्धार्थ का अंधेपन का नाटक सबको बेवकूफ बना रहा है, लेकिन नेहा की आँखों में सच साफ दिख रहा था। शनया की चालाकी और सिद्धार्थ का गुस्सा देखकर लगता है कि ये कहानी आगे और भी दिलचस्प होगी।
सिद्धार्थ की आँखों पर काला चश्मा और हाथ में छड़ी देखकर सबको लगा वो अंधे हैं, लेकिन जब शनया ने उसे ग्रिल से बचाने के लिए धक्का दिया तो पता चला कि वो सब नाटक था। नेहा की आँखों में डर और सिद्धार्थ का गुस्सा देखकर लगता है कि ये खेल खतरनाक मोड़ ले रहा है। (डबिंग) ३० साल जमे, ३ भाई पछताए में भी ऐसे ही धोखे देखे थे।