इस चित्रण में उस छोटी लड़की की आँखों में जो आँसू थे, वो दिल को चीर गए। जब वो कोड़े खा रही थी, तब लगा जैसे समय थम गया हो। पौराणिक पुनर्जागरण ने ऐसे दृश्यों को बहुत गहराई से दिखाया है। बुजुर्ग महिला का उसे बचाना सबसे भावुक पल था। जब लताओं ने उसे जकड़ लिया, तो लगा कि किस्मत भी उसके खिलाफ है। पर अंत में उस लड़के का आना उम्मीद की किरण जैसा लगा।
सफेद पोशाक वाली महिला शुरू में दयालु लगी, पर बाद में उसका असली चेहरा सामने आया। उसकी आँखों में जो क्रूरता थी, वो डरावनी थी। पौराणिक पुनर्जागरण में खलनायक का ऐसा रूप पहले नहीं देखा। जब उसने लताओं से सबको बांधा, तो लगा कि अब कोई नहीं बचेगा। पर उस आधुनिक लड़के के प्रवेश ने सब बदल दिया। उसकी शक्तियां बहुत आधुनिक लग रही थीं।
कार्यवाही के दृश्य बहुत शानदार थे। जब वो हरे रंग की लताएं जमीन से निकलीं, तो दृश्य प्रभाव कमाल के थे। पौराणिक पुनर्जागरण की बनावट बहुत अच्छी है। उस मर्दाना शख्स ने लड़ने की कोशिश की, पर वो भी इन जड़ों के आगे बेबस हो गया। फिर उस नीले रंग के घन का आना बहुत रोचक था। ऐसा लगा जैसे विज्ञान और जादू का मिलन हो गया हो।
काले परिधान वाला लड़का अचानक कैसे आ गया? उसकी आँखों में एक अलग ही चमक थी। जब उसने उस नीले चमकदार घन को बनाया, तो सब हैरान रह गए। पौराणिक पुनर्जागरण में समय यात्रा या फिर कोई अन्य शक्ति दिखाई गई है। उस देवी को भी उससे डर लगा था। उसकी शांत मुद्रा और फिर हमला करने का तरीका बहुत शानदार था। आगे क्या होगा, ये जानने की उत्सुकता बढ़ गई है।
उस बुजुर्ग महिला ने अपनी जान की परवाह किए बिना उस बच्ची को बचाया। जब कोड़ा उस पर पड़ा, तो दर्द उसकी आँखों में साफ दिख रहा था। पौराणिक पुनर्जागरण ने रिश्तों के इस बंधन को बहुत खूबसूरती से बुना है। जब लताओं ने उन्हें जकड़ लिया, तो लगा कि अब सब खत्म हो गया। पर उस लड़के के आने से माहौल बदल गया। ऐसे पात्र कहानी की जान होते हैं।
शुरू में वो सैनिक जिस तरह कोड़ा चला रहा था, वो देखकर गुस्सा आ गया। उसका सिररक्षा और कवच बहुत पुराने जमाने के लग रहे थे। पौराणिक पुनर्जागरण में इतिहास और कल्पना का मिश्रण अच्छा है। जब वो दूसरे लड़के पर हमला करता है, तो लगता है कि वो बहुत ताकतवर है। पर जादुई लताओं ने उसे भी नहीं छोड़ा। ऐसे खलनायक को सबक सिखाना जरूरी था।
इस कार्यक्रम की कला शैली बहुत ही प्रभावशाली है। प्राचीन इमारतें और स्तंभ बहुत असली लगते हैं। पौराणिक पुनर्जागरण के हर दृश्य में मेहनत दिखती है। जब देवी प्रकट होती है, तो पीछे की रोशनी बहुत दिव्य लग रही थी। फिर जब आग लगती है और वो वैज्ञानिक किताब पढ़ रहा होता है, तो माहौल पूरी तरह बदल जाता है। रंगों का उपयोग बहुत सोच समझ कर किया गया है।
ये कहानी किस बारे में है? क्या ये अतीत है या भविष्य? उस लड़के के पास ऐसी तकनीक कैसे आई? पौराणिक पुनर्जागरण में कई सवाल हैं जिनके जवाब मिलने बाकी हैं। उस देवी का उद्देश्य क्या था? क्यों उसने मासूम लोगों को सताया? जब उस नीले घन ने लताओं को तोड़ा, तो लगा कि कोई बड़ी शक्ति जाग गई है। हर भाग के बाद उत्सुकता बढ़ती जाती है।
उस बच्ची के रोने के दृश्य ने दिल को छू लिया। उसकी मासूमियत देखकर लगा कि दुनिया कितनी क्रूर हो सकती है। पौराणिक पुनर्जागरण में भावनाओं को बहुत गहराई से दिखाया गया है। जब उसने अपने गले में गहना पकड़ा, तो लगा कि उसे किसी की याद आ रही है। फिर अंत में उस लड़के का आना जैसे किसी फरिश्ते के आने जैसा लगा। उम्मीद की किरण हमेशा बाकी रहती है।
अंत में जब उस लड़के ने अपनी शक्ति दिखाई, तो मजा आ गया। उस सुनहरी छड़ी और नीले घन का मिलन बहुत अनोखा था। पौराणिक पुनर्जागरण में जादू और तकनीक का टकराव देखने लायक है। उस देवी के चेहरे का रंग उतर गया था। ऐसा लगा कि अब असली लड़ाई शुरू होने वाली है। वो वैज्ञानिक वाला दृश्य भी कुछ इशारा कर रहा था। बहुत रोमांचक मोड़ है।