इस कहानी में जब बहू ने सास का गला घोंटना शुरू किया तो मेरी रूह कांप गई। वह पागलपन भरी हंसी किसी डरावनी फिल्म से कम नहीं थी। पति बीच में आया तो काट लिया गया। प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन नामक यह धारावाहिक सच में दिल दहला देने वाला है। हर पल नया मोड़ लेता है और दर्शक को बांधे रखता है। ऐसा लगता है कि घर की शांति हमेशा के लिए खत्म हो गई है और अब सिर्फ खून बहेगा।
उस सुनहरे फ्रेम में बंद तस्वीर ने सब कुछ बदल दिया। पति उस तस्वीर को देखकर हैरान था कि आखिर सच क्या है। क्या वही दुल्हन अब इस तरह पागल हो गई है। प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन की कहानी में छिपे राज धीरे धीरे खुल रहे हैं। फोन पर आया संदेश भी कुछ गड़बड़ लग रहा था। शायद बीते काल की कोई गलती अब सामने आ रही है जो सबको निगल रही है।
सोफे पर लेटी हुई मां की हालत देखकर बहुत बुरा लगा। वह कुछ बोल भी नहीं पा रही थी और इशारों में दर्द बता रही थी। बहू का हमला इतना अचानक था कि कोई संभल भी नहीं पाया। प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन में दिखाया गया यह परिवारिक कलह बहुत गहरा है। लगता है कि सास बहू के रिश्ते में कोई पुरानी दुश्मनी छिपी है जो अब सामने आई है।
जब पति ने अपनी पत्नी को रोकने की कोशिश की तो उसे खुद चोट लग गई। बांह पर काटने का निशान देखकर साफ था कि वह काबू से बाहर हो चुकी है। वह चीखता रहा पर कोई सुनने वाला नहीं था। प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन के इस कड़ी में हिंसा चरम पर थी। शायद उसे किसी का इलाज करवाना चाहिए था पर अब बहुत देर हो चुकी लगती है।
लड़की का व्यवहार देखकर समझना मुश्किल था कि वह पागल है या बदला ले रही है। कभी वह डर कर छिपती है तो कभी हमला कर देती है। यह दोहरा रूप बहुत खतरनाक लग रहा था। प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन की पटकथा में यह सबसे मजबूत पक्ष है। दर्शक उलझन में रहता है कि आखिर सच क्या है और कौन झूठ बोल रहा है इस घर में।
जमीन पर पड़ा फोन शायद इस सबकी वजह बना। पति ने जैसे ही उसे देखा उसका चेहरा उतर गया। शायद कोई राज़ खुल गया था जो नहीं खुलना चाहिए था। प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन में छोटी छोटी चीजें बड़ा तूफान लाती हैं। उस एक संदेश ने पूरे घर का सुकून छीन लिया और फिर बस शोर ही शोर रह गया।
अंत में पति ने उस शादी की तस्वीर को छूा तो लगा जैसे वह किसी को याद कर रहा हो। क्या वह दुल्हन वही है जो अब हमला कर रही है। यह सवाल दिमाग में घूम रहा है। प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन का हर दृश्य एक पहेली की तरह है। शायद उस तस्वीर में ही इस सबका जवाब छिपा हुआ है जो अभी तक किसी को नहीं मिला।
शुरू में सब शांत लग रहा था पर अचानक माहौल बदल गया। बैठक वाले कमरे में अब सिर्फ शोर और रोने की आवाजें थीं। कोई सुकून नहीं बचा था उस घर में। प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन ने दिखाया कि कैसे एक छोटी घटना सब बदल देती है। अब उस घर में रहना किसी सजा से कम नहीं लग रहा था किसी के लिए भी।
जब वह हमला करके जोर जोर से हंसने लगी तो रोंगटे खड़े हो गए। यह हंसी किसी खुशी की नहीं बल्कि पागलपन की थी। सास दर्द से कराह रही थी और उसे हंसी आ रही थी। प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन के इस किरदार ने सबका ध्यान खींच लिया है। ऐसा लगता है कि उसके अंदर कोई और ही शख्सियत जाग चुकी है जो सबको बर्बाद करेगी।
इस कड़ी के बाद अब अनुमान लगाना मुश्किल है कि कहानी किस तरफ जाएगी। क्या पति अपनी पत्नी को छोड़ देगा या संभालेगा। मां की हालत भी नाजुक है। प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन की अगली कड़ी देखने के लिए मैं बेताब हूं। हर मोड़ पर नया झटका मिल रहा है और दर्शक बस देखता ही रह जाता है हैरान होकर।