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प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हनवां48एपिसोड

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प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन

पूर्व जन्म में, रिया शर्मा और उसकी सहेली रोशनी वर्मा की विवाह के दिन ससुराल वालों और विक्रम सिंघानिया के षड्यंत्र में मृत्यु हो जाती है। पुनर्जन्म पाकर रिया अपनी शादी से पहले रोशनी को सुरक्षित भेज देती है और मामा राकेश शर्मा को बुलाती है। रिया की ननद जाह्नवी गलती से कमरे में जाती है, जहाँ विक्रम उसे रोशनी समझकर दुर्व्यवहार करता है। पति चिराग और सास कमला जाह्नवी को रोशनी समझकर रिया को प्रताड़ित करते हैं। मामा के आने पर सच खुलता है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

कार की चुप्पी और आँखों का शोर

तीन महीने बाद का दृश्य बहुत भारी लग रहा था। कार में गहरी चुप्पी थी लेकिन आँखों में शोर था। जेल की ऊंची दीवारें देखकर लगा कि कहानी में कोई बड़ा मोड़ आने वाला है। प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन की कहानी धीरे धीरे खुल रही है। दर्द साफ झलक रहा था स्क्रीन पर। हर पल नया सच सामने आ रहा है। नेटशॉर्ट ऐप पर देखने का अनुभव बहुत अच्छा है। माहौल में ठंडक थी।

अस्पताल का खौफनाक मंजर

अस्पताल का वो दृश्य रूह कंपा देने वाला था। मरीज को रस्सियों से बांधा हुआ देखकर गुस्सा आ रहा था। खिड़की से देखने वाली लड़की की आँखों में बेचैनी साफ दिख रही थी। प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन में इमोशन का तूफान है। कोई आसान नहीं है ये रास्ता। सब कुछ गड़बड़ लग रहा था वहां। दीवारें भी चीख रही थीं। सफेद चादरें लाल लग रही थीं।

कागज के टुकड़े और भारी दिल

बिल पकड़कर खड़ी थी वो लड़की। हाथ कांप रहे थे शायद। दोस्त का सहारा था पास में लेकिन दर्द अकेले का था। प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन की हर एपिसोड में नया सच सामने आता है। कितना झेलेंगी ये बेचारी। दिल दुख गया देखकर। हॉस्पिटल की लाइट भी फीकी लग रही थी। कागज के टुकड़े जैसे जान ले रहे थे। सांसें रुक सी गई थीं।

खेतों से जेल तक का सफर

कार की राइड बहुत खूबसूरत थी लेकिन माहौल उदास था। खेतों के बीच से गुजरते हुए भी चेहरे पर मुस्कान नहीं थी। प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन का हर फ्रेम कहानी कहता है। जेल की दीवारें भी कुछ कह रही थीं। सस्पेंस बना हुआ है। नेटशॉर्ट ऐप पर कहानी बहुत गहरी है। रास्ता लंबा और कठिन लग रहा था। पेड़ भी उदास लग रहे थे।

चीखें जो कानों में गूंजें

वो चीखें अभी भी कानों में गूंज रही हैं। बिस्तर पर बंधी हुई हालत बहुत खराब थी। देखने वाली की हालत भी कुछ कम नहीं थी। प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन में जुल्म की हदें पार हो गई हैं। कौन है ये सब करने वाला। जानना बहुत जरूरी है। वीडियो की क्वालिटी भी बहुत अच्छी है। आवाजें दिल दहला देने वाली थीं। कमरा बहुत छोटा लग रहा था।

गलियारे की खामोश बातें

गलियारे में खड़ी होकर बातें हो रही थीं। शब्द कम थे और आँखें ज्यादा बोल रही थीं। सफेद कपड़ों में भी काला सच छिपा था। प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन की गहराई बढ़ती जा रही है। नेटशॉर्ट पर देखने का मजा ही अलग है। हर एक्टिंग बहुत नेचुरल लग रही थी। चुप्पी में भी शोर था वहां पर। कोने में कचरा भी अकेला था।

ड्राइवर की नम आँखें

ड्राइवर की आँखों में भी नमी थी। शायद वो भी इस दर्द में बराबर की भागीदार है। दोस्ती निभाना आसान नहीं होता। प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन में रिश्तों की परख हो रही है। कौन साथ है और कौन नहीं। ये सवाल बड़ा है। कार का ड्राइविंग सीन बहुत शांत था। बाहर का नज़ारा भी उदास था। हवाएं भी ठंडी चल रही थीं।

समय का फासला और यादें

समय का फासला दिखाया गया है शुरू में। तीन महीने बाद सब बदल चुका था। पुरानी यादें ताजा हो रही थीं शायद। प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन की टाइमलाइन बहुत दिलचस्प है। धैर्य रखकर देखना पड़ता है। हर पल नया मोड़ है। दर्शक को बांधे रखती है कहानी। वक्त किसी के लिए नहीं रुकता। घड़ी की टिकटिक सुनाई दे रही थी।

तड़पती हुई रूह

पागलपन की हदें पार कर गई थी वो मरीज। रस्सियों से बंधी हुई तड़प रही थी। देखने वाला भी सहम जाता है। प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन में डर और गम का मिश्रण है। कहानी बहुत आगे बढ़ चुकी है। अंत क्या होगा कोई नहीं जानता। सस्पेंस बहुत तेज है। हर पल जानलेवा लग रहा था। दवाइयों की महक आ रही थी।

जेल की राह और कठिन इम्तिहान

कार से उतरकर सीधे जेल पहुंचना। ये रास्ता आसान नहीं रहा होगा। कदम भारी थे और दिल भी। प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन की यात्रा बहुत कठिन है। हर मोड़ पर इम्तिहान है। दर्शक भी जुड़ा हुआ महसूस करता है। बहुत बढ़िया काम है। एपिसोड खत्म होने का इंतजार नहीं हुआ। अगला भाग कब आएगा। रात होने वाली थी।