साइकल पर कुदाल लेकर आना बहुत अजीब लगा। नायक की जल्दी देखकर हैरानी हुई। होटल के बाहर नोट पढ़ना रहस्य बढ़ाता है। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ कहानी में ऐसा मोड़ है जो बांधे रखता है। कमरे की गंदगी और उलटी कुर्सी देखकर डर लगा। फिर गलियारे में मिली लड़की ने सब बदल दिया। उसकी मुस्कान जादुई थी। दोनों के बीच की चुप्पी बहुत कुछ कहती है। अंत में खिड़की से हाथ हिलाना दिल को छू गया। यह कहानी साधारण लगती है पर गहराई है।
लड़की के हाथ में नीला टब और फोन की घंटी ने कहानी मोड़ दी। मालिक का फोन आना मतलब कुछ गड़बड़ है। नायक का घबराना स्वाभाविक लगा। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ में ऐसे पल बार बार देखने को मिलते हैं। लड़की की आंखों में छुपा दर्द साफ दिख रहा था। नायक उसे समझने की कोशिश कर रहा था। गलियारे की रोशनी और छाया का खेल अच्छा था। संवाद कम थे पर भावनाएं ज्यादा थीं। यह दृश्य बहुत प्रभावशाली बना। मुझे यह जोड़ी बहुत पसंद आई। आगे क्या होगा जानने की उत्सुकता है।
भूरे जैकेट वाला शख्स कौन था? यह सवाल मन में उठता है। उसने साइकल को ऐसे देखा जैसे जानता हो। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ की पटकथा में यह सुराग जरूरी है। नायक बेखबर अंदर चला गया। कमरे नंबर दो सौ छत्तीस पर कुछ खास होना चाहिए। अंदर का नजारा देखकर वह सहम गया। फिर उस लड़की से मुलाकात हुई जो बाल्टी लिए थी। उसकी सादगी में एक अलग चमक थी। दोनों के बीच की दूरी धीरे धीरे कम हुई। यह रोमांच और प्रेम का मिश्रण है।
साइकल की टोकरी में कुदाल क्यों थी? यह सबसे बड़ा सवाल है। शायद वह कुछ खोदने आया था। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ का शीर्षक भी इसी ओर इशारा करता है। होटल का पुराना बोर्ड और सीढ़ियां माहौल बनाती हैं। नायक के कपड़े सादे पर प्रभावशाली हैं। लड़की का सफेद टॉप और जींस का लुक आधुनिक है। दोनों के मिलन का तरीका अनोखा है। फोन की घंटी ने तनाव बढ़ा दिया। लड़की का फोन उठाना और नायक का देखना। अंत में विदाई का पल बहुत भावुक था।
गलियारे की दीवारों पर लगी पेंटिंग्स पुरानी यादें ताजा करती हैं। नायक जब कमरे में घुसा तो सन्न रह गया। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ में हर दृश्य में कुछ नया है। लड़की के चेहरे के भाव बदलते रहे। कभी मुस्कान तो कभी चिंता। नायक ने हिम्मत करके बात शुरू की। उसका हाथ बढ़ाना और फिर रुक जाना। यह झिझक बहुत प्यारी लगी। नीले टब में रखा फोन बज उठा। इसने कहानी में नया मोड़ दिया। दर्शक के रूप में मैं जुड़ा हुआ महसूस कर रहा हूं।
नायक की साइकल चलाने का अंदाज बहुत सहज लगा। रास्ते में वह जल्दी में था। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ की रफ्तार भी ऐसी ही है। होटल के बाहर रुककर उसने कागज देखा। शायद पता ढूंढ रहा था। अंदर का कमरा खाली और उजाड़ लग रहा था। फिर वह लड़की सामने आई जैसे कोई परी हो। उसकी आवाज में मिठास थी। नायक की घबराहट साफ झलक रही थी। दोनों के बीच की खामोशी शोर मचा रही थी। यह कहानी दिल के करीब है।
खिड़की से बाहर झांकना और नीचे देखना। नायक को शायद किसी का इंतजार था। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ में ऐसे दृश्य दिल जीत लेते हैं। लड़की ने जब फोन काटा तो उसका चेहरा उतर गया। नायक ने उसे हंसाने की कोशिश की। उसकी मुस्कुराहट देखकर सब ठीक लगा। गलियारे की रोशनी शाम की लग रही थी। दोनों के बीच की दूरी मायने रखती है। अंत में नायक का हाथ हिलाना विदाई नहीं उम्मीद थी। यह कहानी आगे बढ़ती जाएगी। मुझे अगला भाग देखना है।
कमरे में उलटी कुर्सी और गिरा डिब्बा। किसी झगड़े के संकेत हैं। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ में रहस्य की परतें हैं। नायक ने कुदाल बिस्तर पर रखी। उसका चेहरा चिंतित था। फिर लड़की के आने से माहौल बदला। वह बाल्टी में कपड़े धोने आई थी। नायक ने मदद करने का हाथ बढ़ाया। यह छोटी सी बात बड़ी लगी। दोनों के बीच का लगाव देखने लायक है। यह कहानी साधारण लोगों की है। इसमें अपनापन है।
लड़की के नाखूनों का नीला रंग बहुत प्यारा लगा। नायक ने जब उसका हाथ देखा तो रुक गया। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ में छोटी चीजें बड़ी लगती हैं। फोन की घंटी ने ध्यान खींचा। लड़की ने फोन उठाया और बात की। नायक चुपचाप खड़ा सब देख रहा था। उसकी आंखों में सवाल थे। लड़की ने फोन रखकर उसे देखा। दोनों के बीच कुछ अनकहा था। यह पल बहुत खास था। मुझे यह कहानी बहुत पसंद आ रही है।
होटल का नाम लीजिंग था पर अंदर सब पुराना था। नायक की साइकल सफेद और साफ थी। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ की शुरुआत ऐसे ही होती है। लड़की के कपड़े सादे पर सुंदर थे। नायक की शर्ट भी सादी थी। दोनों का मिलन संयोग नहीं लगता। शायद पहले से जानते थे। फोन काल ने सब साफ कर दिया। लड़की उदास हो गई। नायक ने उसे हंसाने की कोशिश की। अंत में दोनों के बीच की दूरी कम हुई। यह कहानी दिल को छूती है।