शुरुआत में रोबोट देखकर लगा एक्शन फिल्म है पर फिर भावनाएं हावी हो गईं। बूढ़े साहब की आंखों में चमक देखकर दिल पिघल गया। मेरे पापा, देश के हीरो ने सही मायने में परिवार की अहमियत समझाई। नेटशॉर्ट ऐप पर देखने का मजा ही अलग है। चित्रण भी शानदार है।
युवक और बुजुर्ग के बीच की बातचीत बहुत गहरी थी। चाबियां सौंपते वक्त जो भरोसा दिखा, वो लाजवाब था। कहानी में जो सरलता है वो बड़े बजट वाली फिल्मों में भी नहीं मिलती। हर सीन में एक नया मोड़ है। दर्शक बंधे रहते हैं। बहुत पसंद आया।
लाल दरवाजा देखते ही लगा अब असली कहानी शुरू होगी। जब उसने दरवाजा खोला और सामने वो खड़ी थी, सन्न रह गया। मेरे पापा, देश के हीरो का यह सीन सबसे यादगार है। चित्रण की बारीकियां कमाल की हैं। रंगों का उपयोग बहुत अच्छा है।
महिला का किरदार बहुत शांत और गरिमापूर्ण लगा। बिना कुछ बोले ही आंखों से सब कह दिया। ऐसे रिश्ते आजकल की भागदौड़ में कम ही देखने को मिलते हैं। वीडियो की गुणवत्ता भी बहुत साफ है। आवाज़ भी स्पष्ट है। मन को छू गया। सब देखें।
छोटी बच्ची का दौड़कर आना और मां से लिपट जाना, दिल को छू गया। बचपन की मासूमियत ने पूरे माहौल को हल्का कर दिया। मेरे पापा, देश के हीरो में ऐसे पल बहुत कीमती हैं। नेटशॉर्ट पर ऐसी सामग्री की कमी नहीं है। सब देखें। मजा आया।