वह लड़का जो काले दस्ताने पहने है, उसकी मुस्कान में एक अजीब सा घमंड है। जैसे उसे पता हो कि जीत उसकी ही होने वाली है। लेकिन जब बूढ़ा योद्धा खून थूककर खड़ा होता है, तो माहौल बदल जाता है। योद्धा का बदला देखकर लगता है कि असली ताकत मांसपेशियों में नहीं, इरादों में होती है। यह दृश्य रोंगटे खड़े कर देने वाला है।
जब वह बूढ़ा आदमी जमीन से उठता है और अपने सीने पर हाथ रखकर खड़ा होता है, तो उसकी आंखों में दर्द नहीं, आग दिखाई देती है। वह हारा नहीं है, बस थोड़ा रुका है। योद्धा का बदला की कहानी में ऐसे पल ही तो जान डालते हैं। उसकी सांसों की आवाज़ और चेहरे का भाव बता रहा है कि अब वह वापसी करेगा।
वह व्यक्ति जो नीले कोट में है, वह सब कुछ देख रहा है लेकिन चुप है। शायद वह जानता है कि इस लड़ाई में दखल देना गलत होगा। उसकी आंखों में चिंता है, लेकिन वह हिलता नहीं। योद्धा का बदला में ऐसे किरदार ही कहानी को गहराई देते हैं। वह शायद अगला योद्धा होने वाला है।
उसके माथे पर लाल पट्टी है और आंखों में एक अजीब सा जुनून। वह सिर्फ लड़ने नहीं आया, बल्कि कुछ साबित करने आया है। जब वह मुक्का मारता है, तो हवा में एक अलग ही ऊर्जा महसूस होती है। योद्धा का बदला में उसका किरदार सबसे ज्यादा प्रभावशाली लगता है। वह जीतने के लिए नहीं, सम्मान के लिए लड़ रहा है।
जब बूढ़े योद्धा के मुंह से खून निकलता है, तो वह उसे पोंछता नहीं, बल्कि उसे अपनी ताकत बना लेता है। यह दृश्य दिखाता है कि असली योद्धा दर्द से नहीं डरता। योद्धा का बदला में ऐसे पल ही तो दर्शकों को बांधे रखते हैं। उसकी आंखों में आंसू नहीं, आग है।
चारों तरफ खड़े लोग कुछ बोल नहीं रहे, बस देख रहे हैं। उनकी आंखों में डर है, उम्मीद है, और एक अजीब सी बेचैनी। योद्धा का बदला में यह दृश्य बताता है कि जब दो योद्धा आमने-सामने होते हैं, तो दुनिया रुक जाती है। हर कोई जानना चाहता है कि अगला कदम कौन उठाएगा।
जब मुक्का लगता है, तो आवाज़ तो आती है, लेकिन उसके बाद का सन्नाटा ज्यादा डरावना होता है। योद्धा का बदला में यह दृश्य बहुत ही तीव्रता से दिखाया गया है। वह लड़का जो गिरा है, वह शायद फिर से उठेगा, लेकिन उसकी आंखों में अब वह चमक नहीं है।
वह बूढ़ा आदमी जो तलवार पकड़े है, वह मुस्कुरा रहा है। शायद उसे पता है कि यह लड़ाई सिर्फ शुरुआत है। योद्धा का बदला में उसका किरदार एक रहस्यमयी छवि छोड़ता है। वह जानता है कि असली खेल अभी शुरू हुआ है। उसकी मुस्कान में एक अजीब सा विश्वास है।
लाल कालीन पर खून के निशान दिखाई दे रहे हैं, लेकिन कोई उन्हें साफ नहीं कर रहा। शायद यह इस बात का प्रतीक है कि यह लड़ाई आसान नहीं थी। योद्धा का बदला में ऐसे छोटे-छोटे विवरण ही कहानी को असली बनाते हैं। वह निशान बता रहा है कि यहां क्या हुआ था।
अब सवाल यह है कि अगला दौर कौन लड़ेगा? क्या वह लड़का जो काले दस्ताने पहने है, फिर से आएगा? या फिर वह बूढ़ा योद्धा जो अभी तक चुप है, अपना वार करेगा? योद्धा का बदला में यह अनिश्चितता ही दर्शकों को बांधे रखती है। हर कोई अगले पल का इंतजार कर रहा है।