योद्धा का बदला में सफेद पोशाक वाली लड़की की आंखों में जो दर्द और गुस्सा है, वो दिल को छू लेता है। जब वो जमीन पर गिरती है और खून बहता है, तो लगता है जैसे हर सांस में बदले की आग जल रही हो। उसकी चुप्पी भी चीख से ज्यादा तेज है।
ग्रे जैकेट वाला लड़का शुरू में शांत लगता था, लेकिन जब उसने सिर पकड़कर चीखना शुरू किया, तो समझ आया कि उसके अंदर कितना तूफान छिपा है। योद्धा का बदला में ऐसे किरदार ही कहानी को गहराई देते हैं। उसकी बेचैनी देखकर लगता है वो कुछ याद करने की कोशिश कर रहा है।
सफेद कुर्ता वाला आदमी जब मुस्कुराता है, तो लगता है जैसे वो किसी शिकार को देख रहा हो। उसकी आंखों में जीत का घमंड और नीचे गिरी लड़की पर तरस नहीं, बल्कि संतोष है। योद्धा का बदला में ऐसा विलेन देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उसकी हर हरकत में खतरनाकपना है।
जब लड़की जमीन पर लेटी हुई है और उसकी नजर तलवार पर पड़ती है, तो लगता है जैसे वो हार नहीं मान रही। योद्धा का बदला में ऐसे पल ही कहानी को आगे बढ़ाते हैं। उसके चेहरे पर दर्द है, लेकिन आंखों में अभी भी लड़ने की चिंगारी बाकी है। वो फिर उठेगी, ये यकीन है।
पीछे खड़े लोग कुछ नहीं बोल रहे, लेकिन उनकी आंखों में डर साफ दिख रहा है। योद्धा का बदला में ये माहौल बहुत अच्छे से बनाया गया है। जब सफेद कुर्ता वाला आदमी आगे बढ़ता है, तो सबकी सांसें रुक जाती हैं। ये खामोशी भी एक तरह की चीख है।