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शूरवीर: मातृभूमि का रक्षकवां13एपिसोड

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शूरवीर: मातृभूमि का रक्षक

एक महान योद्धा युद्ध जीतकर 'राष्ट्ररक्षक' बनता है। घर लौटने पर उसे अपनी बहन के अपमान और माँ पर हुए प्राणघातक हमले का पता चलता है। प्रतिशोध की ज्वाला में, वह शाही स्वर्ण मुद्रा का उपयोग कर सैनिकों की पेंशन में हो रहे भ्रष्टाचार की जाँच करता है। एक भ्रष्ट मंत्री के कुटिल षड्यंत्रों को विफल कर, वह महारानी के समर्थन से न्याय स्थापित करता है। यह एक सेनापति की राष्ट्र और परिवार के प्रति अटूट निष्ठा की भावपूर्ण महागाथा है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

दर्दनाक चीखें और गुस्सा

बूढ़ी महिला की आंखों में छलछलाता दर्द देखकर दिल दहल गया। खून से सने हाथ और चीखें सब कुछ बता रही हैं कि क्या बीत रही है। जब नायक ने गुस्से में मुट्ठी भींची, तो लगा अब बदला लेने का समय आ गया है। शूरवीर: मातृभूमि का रक्षक में ऐसे सीन देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। एक्टिंग बहुत दमदार है और हर भावना सही जगह पर दिखी। कैमरा वर्क भी शानदार है।

एक्शन का असली मजा

पंखे वाले आदमी की घमंडी हंसी देखकर बहुत गुस्सा आ रहा था। लेकिन अंत में जब नायक ने उसे हवा में उड़ा दिया, तो बहुत मजा आ गया। एक्शन सीन्स बहुत तेज और रोमांचक हैं। वीडियो की क्वालिटी भी काफी अच्छी है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे ड्रामा देखना पसंद है। शूरवीर: मातृभूमि का रक्षक की एक्शन क्वालिटी बेमिसाल है। संगीत भी अच्छा लगा।

बेचारी लड़की का दर्द

लाल कपड़ों वाली लड़की जमीन पर बेचारी बैठी थी। उसके चेहरे पर खून और आंखों में आंसू किसी को भी रुला दें। नायक का उनकी रक्षा के लिए आगे आना बहुत भावुक कर देने वाला था। शूरवीर: मातृभूमि का रक्षक की कहानी में यह मोड़ बहुत महत्वपूर्ण है। परिवार की इज्जत का सवाल था। डायलॉग बहुत प्रभावशाली हैं।

नायक का रूद्र रूप

शुरू में लगा नायक डर रहा है, लेकिन फिर उसका रूद्र रूप देखकर हैरानी हुई। उसने अकेले दो गुंडों को धूल चटा दी। फाइट कोरियोग्राफी बहुत शानदार है। ऐसे ऐतिहासिक ड्रामा कम ही देखने को मिलते हैं। बहुत बढ़िया प्रस्तुति। शूरवीर: मातृभूमि का रक्षक में जोश है। लाइटिंग भी अच्छी थी।

घमंड का अंत

वह दो खड़े आदमी खुद को बहुत ताकतवर समझ रहे थे। उनकी चालें देखकर लग रहा था कि ये मुसीबत खड़ी करेंगे। पर नायक ने एक ही वार में सब खत्म कर दिया। शूरवीर: मातृभूमि का रक्षक में एक्शन का तड़का बहुत बढ़िया है। देखने में मजा आया। पावर फुल सीन। एडिटिंग तेज है।

धैर्य का टूटना

बूढ़ी औरत की चीखें सुनकर नायक का धैर्य टूट गया। उसने जो मुक्का मारा, सीधा दुश्मन के चेहरे पर लगा। डायलॉग डिलीवरी और एक्सप्रेशन बहुत नेचुरल हैं। ऐसे सीन बार-बार देखने का मन करता है। नेटशॉर्ट पर अच्छा कंटेंट मिल रहा है। शूरवीर: मातृभूमि का रक्षक देखें। साउंड इफेक्ट्स ठीक हैं।

पुराना जमाना और सेट

कपड़ों का डिजाइन और सेट बहुत पुराने जमाने का लग रहा था। माहौल एकदम सही बनाया गया है। जब नायक ने अपनी शक्ति दिखाई, तो आसपास खड़े लोग भी हैरान रह गए। शूरवीर: मातृभूमि का रक्षक की प्रोडक्शन वैल्यू अच्छी लग रही है। सब कुछ असली लगा। कॉस्ट्यूम पसंद आए।

जान की बाजी

नायक ने पहले सब्र किया, फिर वार किया। यह धैर्य और ताकत का संगम था। लड़कियों को बचाने के लिए उसने जान की बाजी लगा दी। कहानी में जोश और जुनून दोनों हैं। ऐसे किरदार दर्शकों को पसंद आते हैं। बहुत ही शानदार सीन था। शूरवीर: मातृभूमि का रक्षक। प्लॉट अच्छा है।

हाई वोल्टेज एक्शन

दुश्मन के उड़ने का सीन थोड़ा फिल्मी था, लेकिन एक्शन में जान थी। नायक की आंखों में गुस्सा साफ दिख रहा था। जब वह दौड़ा, तो लगा अब कोई नहीं बचेगा। शूरवीर: मातृभूमि का रक्षक में ऐसे हाई वोल्टेज सीन देखने को मिलते हैं। मजा आ गया। स्पीड अच्छी है।

हैरान दर्शक

अंत में जो व्यक्ति नीला कपड़ा पहने था, उसकी आंखें फटी की फटी रह गईं। नायक की ताकत के आगे सब फीके पड़ गए। यह सीन बताता है कि नायक कोई साधारण व्यक्ति नहीं है। कहानी आगे क्या मोड़ लेगी, यह देखने की उत्सुकता है। शूरवीर: मातृभूमि का रक्षक। क्लाइमेक्स बढ़िया।