उस लड़की की आंखों में दर्द देखकर मेरा दिल टूट गया। जब वह बोरी से बाहर निकली तो लगा जैसे सांस रुक गई हो। शूरवीर: मातृभूमि का रक्षक में ऐसे दृश्य बहुत गहरा असर छोड़ते हैं। अभिनेत्री ने बिना संवाद के सब कह दिया। रात का अंधेरा और उसका दर्द दोनों ही दिल दहला देने वाले थे। सच में बहुत भावुक कर देने वाला पल था जो मैं भूल नहीं पाऊंगा।
बूढ़ी महिला की चीख सुनकर मैं भी रो पड़ा। जब उसने अपनी बेटी को गले लगाया तो लगा जैसे समय थम गया हो। मां का प्यार किसी भी भाषा में वही होता है। इस शो में रिश्तों की गहराई बहुत अच्छे से दिखाई गई है। मोमबत्ती की रोशनी में वह दृश्य और भी दर्दनाक लग रहा था। कलाकारों की केमिस्ट्री देखते ही बनती थी।
रात के अंधेरे में वह गाड़ी का दृश्य बहुत रहस्यमयी था। जब उसे बाहर फेंका गया तो गुस्सा आ गया। शूरवीर: मातृभूमि का रक्षक की कहानी में ऐसा मोड़ किसी ने सोचा नहीं था। जमीन पर घिसटते हुए चलना आसान नहीं होता। उसके कपड़ों पर खून देखकर सदमा लगा। निर्देशन बहुत दमदार है जो हर छोटी बात को पकड़ता है।
गांव वालों का रवैया बहुत असली लगा। कोई मदद को नहीं आया बस देखते रहे। यह समाज की सच्चाई को दर्शाता है। लड़की की हिम्मत देखकर हैरानी हुई। वह लंगड़ाते हुए भी आगे बढ़ती रही। शूरवीर: मातृभूमि का रक्षक में ऐसे मजबूत किरदार ही कहानी को आगे बढ़ाते हैं। उसका संघर्ष देखकर प्रेरणा मिलती है कि हार नहीं माननी चाहिए।
जब वह दरवाजे पर खड़ी हुई तो लगा जैसे कोई भूत आ गया हो। उसकी हालत बहुत खराब थी। मां का चेहरा देखकर लगा जैसे उसकी दुनिया हिल गई हो। शूरवीर: मातृभूमि का रक्षक में भावुक दृश्य बहुत खूबसूरती से बनाए गए हैं। खून के निशान और फटे कपड़े सब कुछ सही जगह पर थे। दृश्य कथा बहुत प्रभावशाली है।
मोमबत्ती की रोशनी में वह अंतिम दृश्य बहुत सुंदर था। मां बेटी को सहारा दे रही थी। लगा जैसे वही उनकी दुनिया है। शूरवीर: मातृभूमि का रक्षक की यह कड़ी बहुत भारी थी। रोने की आवाज सुनकर आंखें नम हो गईं। ऐसे दृश्य बार बार देखने को मन करता है। अभिनय में कोई कमी नहीं थी बिल्कुल भी।
बोरी से निकलते वक्त उसकी सांसें तेज थीं। डर और दर्द दोनों साफ दिख रहे थे। शूरवीर: मातृभूमि का रक्षक में रहस्य बना रहता है। क्यों फेंका गया उसे यह जानना जरूरी है। जंगल का रास्ता और वह अकेली लड़की। छायांकन बहुत अंधेरा और उदास था। रात के दृश्य हमेशा ज्यादा तीव्र लगते हैं दर्शकों को।
जब वह गिर गई तो लगा कहानी खत्म हो गई। पर मां ने संभाल लिया। यह उम्मीद की किरण थी। शूरवीर: मातृभूमि का रक्षक में परिवार का बंधन सबसे ऊपर है। उसका हाथ पकड़कर रोना बहुत हृदयस्पर्शी था। ऐसे पल जीवन में कभी न भूलें। दर्शक के रूप में मैं पूरी तरह से जुड़ गया था इस कहानी से।
घोड़े की गाड़ी और पुराने घर बहुत असली लग रहे थे। सेट डिजाइन पर बहुत मेहनत की गई है। शूरवीर: मातृभूमि का रक्षक की निर्माण गुणवत्ता बहुत उच्च है। लड़की के कपड़े और गहने भी उस जमाने के लग रहे थे। हर छोटी चीज पर ध्यान दिया गया है। यह देखकर अच्छा लगता है कि निर्माताओं ने बारीकियों पर काम किया है।
पूरी रात भर की यह कहानी बहुत तीव्र थी। नींद उड़ गई यह देखकर। शूरवीर: मातृभूमि का रक्षक में हर कड़ी कुछ नया लाती है। अगला भाग कब आएगा इसका इंतजार है। उस लड़की का दर्द अभी भी दिल में है। काश उसे थोड़ी शांति मिल जाए। यह नाटक बहुत गहराई से जुड़ा हुआ है दर्शकों के दिल से।