गाड़ी के अंदर बैठे सभी में से लाल वस्त्र वाली युवती की आँखों में आंसू थे, लेकिन वह रो नहीं रही थी। उसकी चुप्पी में एक अजीब सी ताकत थी। समय-यात्रा, विनाशकारी शुरुआत का अहसास होता है जब वह युवती अपने आंसू पीकर भी मुस्कुराने की कोशिश कर रही थी।
जैसे ही घोड़े की टाप सुनाई दी, गाँव वाले भागने लगे। बच्चे रोने लगे, बूढ़े जमीन पर बैठ गए। वह व्यक्ति जो घोड़े पर सवार था, उसके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान थी। विनाशकारी शुरुआत का अहसास होता है जब एक व्यक्ति के आने से पूरा गाँव डर गया।
जब वह युवक गाड़ी से उतरा, तो उसकी आँखों में आग थी। उसने सीधे घोड़े पर सवार व्यक्ति की ओर देखा, और उसकी आँखों में डर नहीं, बल्कि गुस्सा था। समय-यात्रा, विनाशकारी शुरुआत का अहसास होता है जब एक युवक की आँखों में आग देखकर दुश्मन भी डर जाए।
गाड़ी के अंदर बैठे सभी में से सफेद बालों वाली युवती सबसे ज्यादा शांत थी। उसने कुछ नहीं कहा, लेकिन उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी। विनाशकारी शुरुआत का अहसास होता है जब वह युवती चुपचाप सब कुछ देख रही थी, जैसे वह सब कुछ जानती हो।
जब उस व्यक्ति ने तलवार निकाली, तो उसकी चमक से गाँव वाले कांप गए। बच्चे अपनी माँओं से चिपक गए, बूढ़े जमीन पर बैठ गए। समय-यात्रा, विनाशकारी शुरुआत का अहसास होता है जब एक तलवार की चमक से पूरा गाँव डर गया।
जब बूढ़े मुखिया ने हाथ जोड़कर विनती की, तो उनके हाथों में कांप साफ दिख रहा था। उनकी आँखों में आंसू थे, लेकिन वह रो नहीं रहे थे। विनाशकारी शुरुआत का अहसास होता है जब एक बूढ़े व्यक्ति के हाथों में कांप देखकर दिल दहल जाए।
गाड़ी के अंदर बैठे सभी चुप थे, लेकिन उनकी आँखों में डर साफ झलक रहा था। विशेषकर वह युवक जो नीले वस्त्र पहने था, उसकी आँखों में चिंता और दृढ़ता दोनों थी। समय-यात्रा, विनाशकारी शुरुआत का अहसास होता है जब गाड़ी के अंदर की खामोशी में डर छिपा हो।
जब वह व्यक्ति घोड़े पर सवार था, तो उसके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान थी। उसकी आँखों में क्रूरता थी, और उसकी तलवार की चमक से गाँव वाले कांप गए। विनाशकारी शुरुआत का अहसास होता है जब एक व्यक्ति की मुस्कान से पूरा गाँव डर गया।
जब घोड़े पर सवार व्यक्ति ने तलवार निकाली, तो बूढ़े मुखिया की आवाज़ में कांप साफ सुनाई दी। उन्होंने हाथ जोड़कर विनती की, लेकिन उस व्यक्ति के चेहरे पर क्रूर मुस्कान थी। विनाशकारी शुरुआत का अहसास होता है जब बेगुनाह लोग डर के मारे कांप रहे थे।
जब गाड़ी रुकी और बाहर शोर सुनाई दिया, तो अंदर बैठे सभी के चेहरे पर घबराहट साफ झलक रही थी। विशेषकर वह युवक जो नीले वस्त्र पहने था, उसकी आँखों में चिंता और दृढ़ता दोनों थी। समय-यात्रा, विनाशकारी शुरुआत का अहसास होता है जब गाँव वाले डर के मारे जमीन पर बैठ गए।