नीली पोशाक वाले योद्धा की आँखों में जो आत्मविश्वास है, वह देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। बूढ़े गुरु के चेहरे पर चिंता और क्रोध का मिश्रण साफ दिख रहा है। योद्धा का बदला की यह लड़ाई सिर्फ मुक्कों की नहीं, बल्कि अहंकार की भी लगती है। लाल कालीन पर खड़ा होकर वह जिस तरह चुनौती दे रहा है, लगता है आज कोई बड़ा फैसला होने वाला है।
काले कोट वाले उस शख्स की हरकतें बहुत शक़ी लग रही हैं। वह बार-बार इशारे कर रहा है और भीड़ को भड़का रहा है। योद्धा का बदला में ऐसा लगता है कि बाहर से तो सब सम्मान दे रहे हैं, लेकिन अंदर ही अंदर साजिश रची जा रही है। उसकी आँखों में चालाकी और चेहरे पर नकली गुस्सा साफ झलक रहा है, सावधान रहना होगा।
सफेद दाढ़ी वाले गुरु का दर्द देखकर दिल पसीज जाता है। वह अपने ही लोगों के बीच अकेला पड़ गया है। योद्धा का बदला में जब वह बात करता है, तो उसकी आवाज़ में एक ठहराव है जो बताता है कि वह टूट चुका है लेकिन हारा नहीं है। उसकी पोशाक और खड़ी होने का अंदाज एक पुराने जमाने के सम्मान की गवाही देता है।
इस आंगन का माहौल बहुत ही डरावना और रोमांचक है। लाल कालीन बिछा है और चारों तरफ लोग जमा हैं, जैसे कोई बड़ा न्याय होने वाला हो। योद्धा का बदला के इस दृश्य में कैमरा एंगल बहुत जबरदस्त है, ऊपर से नीचे का शॉट पूरे माहौल की गंभीरता को दिखाता है। हर कोई सांस रोके इस मुकाबले को देख रहा है।
नीले रंग के कपड़ों में वह नौजवान बहुत ही निडर लग रहा है। उसके हाथ बांधे हैं लेकिन उसकी मुद्रा बता रही है कि वह हमले के लिए तैयार है। योद्धा का बदला में उसका यह रवैया दर्शकों को बांधे रखता है। वह न तो डर रहा है और न ही पीछे हट रहा है, बस अपनी बारी का इंतज़ार कर रहा है।
पीछे खड़े लोग जो काले कपड़ों में हैं, उनके चेहरे पर डर और हैरानी साफ दिख रही है। कोई अपनी छाती पकड़े हुए है तो कोई धीरे से बातें कर रहा है। योद्धा का बदला में ये किरदार मुख्य पात्रों के बीच के तनाव को और बढ़ा देते हैं। उनकी चुप्पी शोर मचा रही है कि कुछ बहुत बड़ा होने वाला है।
दोनों मुख्य पात्रों के बीच की दूरी बहुत कम है, लेकिन उनके बीच की दुश्मनी बहुत गहरी लगती है। योद्धा का बदला में जब वे एक-दूसरे को घूरते हैं, तो हवा में बिजली सी कौंध जाती है। यह सिर्फ एक लड़ाई नहीं, बल्कि दो विचारधाराओं का टकराव है जो अब खूनी संघर्ष में बदलने वाला है।
वह काले कोट वाला आदमी जो बार-बार उंगली उठा रहा है, वह जरूर कोई गड़बड़ कर रहा है। उसकी आवाज़ में एक अजीब सी नफरत है। योद्धा का बदला में ऐसा लगता है कि वह गुरु को नीचा दिखाना चाहता है। उसकी हरकतें बताती हैं कि वह अकेले नहीं आया है, उसके पीछे कोई बड़ी ताकत है।
इस पूरे आंगन में जो खामोशी है, वह सबसे ज्यादा डरावनी है। सब जानते हैं कि अब बातें खत्म हो चुकी हैं। योद्धा का बदला में गुरु की आँखों में आंसू और गुस्सा दोनों हैं। वह अपने सम्मान के लिए लड़ रहा है और यह लड़ाई उसे अकेले ही लड़नी पड़ रही है, जो बहुत दर्दनाक है।
जैसे-जैसे दृश्य आगे बढ़ रहा है, तनाव बढ़ता जा रहा है। नीले कपड़ों वाला योद्धा अब मुस्कुरा रहा है, जो खतरे की घंटी है। योद्धा का बदला में यह मुस्कान बताती है कि उसे अपनी जीत का यकीन है। अब बस पहला वार होने का इंतज़ार है, और फिर इस आंगन में खून बहेगा।