इस दृश्य में तनाव इतना गहरा है कि सांस रुक जाती है। जब वह गुरु अपनी शक्ति दिखाता है, तो लगता है जैसे समय थम गया हो। लेकिन असली जादू तो तब होता है जब दोनों युवा योद्धा एक होकर खड़े होते हैं। योद्धा का बदला की यह लड़ाई सिर्फ मुक्कों की नहीं, बल्कि आत्माओं की जीत है। दृश्य इतना सुंदर है कि बार-बार देखने को मन करता है।
लाल पोशाक वाली नायिका और नीले कुर्ते वाले नायक के बीच का मेल देखते ही बनता है। जब वे हाथ थामते हैं, तो लगता है जैसे दो अलग-अलग धाराएं मिलकर एक महासागर बन रही हों। योद्धा का बदला में ऐसे पल ही तो दर्शकों को बांधे रखते हैं। दुश्मन की ताकत के सामने उनका डरना स्वाभाविक है, पर उनका एक हो जाना ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।
जब वह ताबीज जमीन पर गिरता है और उससे सुनहरे अक्षर निकलते हैं, तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं। यह सिर्फ एक वस्तु नहीं, बल्कि कहानी की रूह है। योद्धा का बदला का यह मोड़ बताता है कि असली ताकत हथियारों में नहीं, बल्कि उस ज्ञान में है जो पीढ़ियों से चला आ रहा है। दृश्य प्रभाव इतने शानदार हैं कि लगता है जादू सच में हो रहा हो।
वह बौना गुरु अपनी ताकत के घमंड में इतना अंधा हो गया है कि उसे नहीं दिख रहा कि उसके सामने कौन खड़ा है। जब वह लाल ऊर्जा छोड़ता है, तो लगता है वह जीत जाएगा, लेकिन कहानी तो अभी बाकी है। योद्धा का बदला में खलनायक का यह अहंकार ही उसके पतन का कारण बनता है। उसकी आंखों में दिखी वह खामोशी डरावनी थी।
जब दोनों नायक अपने हाथों से काले और सफेध धुएं को नियंत्रित करते हैं, तो यह सिर्फ कार्रवाई नहीं, एक कला है। यह दृश्य बताता है कि विपरीत ध्रुव भी एक साथ मिलकर संतुलन बना सकते हैं। योद्धा का बदला का यह दृश्य छायांकन का बेहतरीन उदाहरण है। उनकी आंखों में दिखता वह विश्वास ही उन्हें विजयी बनाता है।