प्रतिभाशाली बालक अमृत को संघ प्रमुख राकेश ने अगवा करके अमर दवा बनाने के लिए चुरा लिया। उसके गुरु संत आदित्य ने उसे बचाया और पहाड़ों पर ले जाकर शिक्षा दी। परिवार उसे ढूंढता रहा, पर नहीं मिला। आठ साल बाद, अमृत दवा विद्या में निपुण होकर गाँव लौटा। पर तब तक उसके परिवार का अखाड़ा तबाह हो चुका था। डर था कि अमृत को भी नुकसान न हो, इसलिए परिवार ने उसे पहचानने से इनकार कर दिया। जब अमृत जाने ही वाला था, तभी राकेश उसके घर आ पहुँचा। सच खुलते ही अमृत ने अपने परिवार को बचाया और सबसे मिल गया।