लड़ाई के दृश्य बहुत शानदार हैं। काले वस्त्रों वाले व्यक्ति की चाल देखकर डर लग रहा है। बीच में जो संघर्ष हुआ उसमें जोश साफ झलकता है। गायब हुआ रणदेव कहानी में ऐसा मोड़ आएगा किसी ने नहीं सोचा था। रात के समय की रोशनी और लालटेन का उपयोग माहौल को और भी गहरा बना रहा है। देखने में बहुत मज़ा आ रहा है।
जो व्यक्ति धूसर रंग के कपड़े पहने है उसकी आँखों में गुस्सा साफ दिख रहा है। वह किसी बदले की आग में जल रहा है लगता है। उसकी मुक्केबाजी की तकनीक बहुत तेज़ है। गायब हुआ रणदेव में हर किरदार की अपनी एक अलग पहचान है। पीछे खड़े लोग बस तमाशबीन नहीं लग रहे बल्कि कुछ योजना बना रहे हैं।
सफेद पोशाक वाली पात्र बहुत रहस्यमयी लग रही है। वह चुपचाप सब देख रही है पर उसकी आँखें सब कुछ भांप रही हैं। उसकी मौजूदगी से दृश्य में एक अलग ठंडक आ गई है। गायब हुआ रणदेव की कहानी में वह किस πλευर से है यह जानना जरूरी है। कपड़ों की बनावट और गहने बहुत बारीकी से बनाए गए हैं।
काले कवच वाला योद्धा बहुत ताकतवर लग रहा है। उसके कंधे पर लगी नक्काशी बहुत भव्य हैं। वह बिना कुछ बोले ही अपनी ताकत दिखा रहा है। गायब हुआ रणदेव में ऐसे पात्र कहानी को आगे बढ़ाते हैं। जब वह आगे बढ़ता है तो हवा में दबाव महसूस होता है। यह दृश्य सिनेमाई गुणवत्ता से भरपूर है।
लड़ाई के बीच में जो धुआं दिखा वह जादुई शक्ति लग रहा है। काले वस्त्रों वाले नेता की शक्तियां साधारण नहीं हैं। उसकी उंगलियों का इशारा ही काफी है। गायब हुआ रणदेव में ऐसे तत्व दर्शकों को बांधे रखते हैं। रात का अंधेरा और मशाल की रोशनी का अंतर बहुत अच्छा है।
जो व्यक्ति बीच में गिरा उसका दर्द साफ झलक रहा है। उसने पूरी ताकत लगाई पर सामने वाला बहुत भारी पड़ा। इस कहानी में हर पल संघर्ष दिखाया गया है। गायब हुआ रणदेव देखते वक्त ऐसा लगता है कि हम वहीं मौजूद हैं। दृश्य कोण बहुत गतिशील हैं जो लड़ाई को उभारते हैं।
मुख्य पात्र जो शांत खड़ा है उसकी चुप्पी सबसे शोर मचा रही है। वह जानता है कि कब वार करना है। उसकी आँखों में एक अलग ही चमक है। गायब हुआ रणदेव की पटकथा बहुत मजबूत लग रही है। पीछे खड़े शिष्य भी अपने गुरु का सम्मान कर रहे हैं। माहौल में तनाव बना हुआ है।
लालटेन और पुरानी इमारतें इस धारावाहिक को असली अहसास देती हैं। मंच की सजावट पर बहुत मेहनत की गई है। हर कोने में कुछ न कुछ दिखाई दे रहा है। गायब हुआ रणदेव की दृश्य गुणवत्ता बहुत ऊंची है। जब वे लड़ते हैं तो कपड़ों की हिलन भी असली लगती है। यह एक बेहतरीन ऐतिहासिक नाटक है।
उस व्यक्ति के चेहरे के भाव जो चिल्ला रहा है बहुत नाटकीय हैं। उसे अपनी हार स्वीकार नहीं हो रही है। उसकी आँखों में हैरानी और गुस्सा दोनों हैं। गायब हुआ रणदेव में ऐसे भावनात्मक पल कहानी को गहराई देते हैं। दर्शक भी उसके साथ महसूस कर रहे हैं। संवाद कम हैं पर अभिनय बहुत गहरा है।
अंत में जो काला धुआं दिखा वह किसी श्राप जैसा लग रहा है। यह लड़ाई सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि शक्तियों की भी है। गायब हुआ रणदेव में ऐसे मोड़ उम्मीद से ज्यादा हैं। मैं अगली कड़ी देखने के लिए बेताब हूं। इस मंच पर देखने का अनुभव बहुत सुगम और अच्छा रहा है।