गाँव के उस पुराने आंगन में जब सूट पहने वो शख्स आया, तो हवा में तनाव था। मिट्टी से सनी माँ और बेटे की हालत देखकर दिल दहल गया। लेकिन जैसे ही उस अमीर आदमी ने अपनी बेटी को गले लगाया, सब कुछ बदल गया। छोटी परी जो समझे पशु भाषा, शायद यही वो जादू है जो इस कहानी को जोड़ता है। वो लड़की चुपचाप सब देख रही थी, उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी।
वो माँ जिसके हाथ और चेहरे पर मिट्टी और खून के निशान थे, वो अपने बेटे के सहारे खड़ी थी। सामने खड़े अमीर लोग और वो लड़की जो सूट वाले आदमी के पास थी। जब वो माँ घुटनों पर गिरकर उस लड़की का हाथ पकड़ने लगी, तो लगा जैसे किसी ने दिल पर पत्थर रख दिया हो। छोटी परी जो समझे पशु भाषा, शायद उस लड़की को सब समझ आ रहा था पर वो कुछ बोल नहीं रही थी।
क्या कभी सोचा है कि अमीर और गरीब के बीच की दूरी कितनी होती है? यहाँ वो दूरी सिर्फ कपड़ों की नहीं, बल्कि हालातों की थी। सूट वाला बाप अपनी बेटी को लेकर आया और सामने थी मिट्टी में सनी एक माँ। उस माँ की आँखों में वो दर्द था जो शब्दों में बयां नहीं हो सकता। छोटी परी जो समझे पशु भाषा, शायद इसीलिए वो लड़की चुप थी क्योंकि उसे सब कुछ समझ आ रहा था।
पुराने घर का आंगन, चारों तरफ लोग और बीच में खड़ा वो सूट वाला आदमी। उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं था, बस अपनी बेटी को सहारा दिए खड़ा था। सामने खड़े गाँव वाले हैरान थे, कोई फोन निकालकर वीडियो बना रहा था। छोटी परी जो समझे पशु भाषा, शायद यही वजह थी कि वो लड़की सब कुछ समझकर भी चुप थी। उस माँ की चीखें आंगन में गूंज रही थीं।
जब माँ रो रही थी और बेटा सहारा दे रहा था, तब वो लड़की बस चुपचाप खड़ी थी। सूट वाले आदमी ने उसे गले लगाया, पर उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। शायद उसे सब कुछ पता था। छोटी परी जो समझे पशु भाषा, शायद इसीलिए वो लड़की जानवरों की तरह चुप थी क्योंकि उसे इंसानों की भाषा समझ नहीं आ रही थी। वो माँ की चीखें सुनकर भी नहीं हिली।
गाँव वाले हैरान थे कि अचानक इतने अमीर लोग यहाँ क्यों आए। कोई फोन निकालकर वीडियो बना रहा था, कोई बस तमाशबीन बना खड़ा था। बीच में थी वो माँ जिसके हाथ में खून था और चेहरे पर मिट्टी। छोटी परी जो समझे पशु भाषा, शायद यही वजह थी कि वो लड़की सब कुछ समझकर भी चुप थी। उस माँ की चीखें आंगन में गूंज रही थीं पर कोई सुनने वाला नहीं था।
उस सूट वाले आदमी के चेहरे पर कोई भाव नहीं था। न गुस्सा, न दुख, बस एक अजीब सी ठंडक थी। उसने अपनी बेटी को गले लगाया और बस खड़ा रहा। सामने रोती हुई माँ और हैरान गाँव वाले। छोटी परी जो समझे पशु भाषा, शायद इसीलिए वो लड़की चुप थी क्योंकि उसे सब कुछ समझ आ रहा था। वो माँ की चीखें सुनकर भी नहीं हिली, बस अपने बाप के सहारे खड़ी रही।
वो माँ चीख रही थी, रो रही थी, घुटनों पर गिर गई थी। पर उसकी बेटी बस चुपचाप खड़ी थी। सूट वाले आदमी ने उसे गले लगाया, पर उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। छोटी परी जो समझे पशु भाषा, शायद यही वजह थी कि वो लड़की सब कुछ समझकर भी चुप थी। उस माँ की चीखें आंगन में गूंज रही थीं पर वो लड़की बस अपने बाप के सहारे खड़ी रही।
पुराने घर का आंगन अचानक ड्रामे का मंच बन गया। एक तरफ अमीर लोग, दूसरी तरफ गरीब परिवार। बीच में थी वो माँ जिसके हाथ में खून था और चेहरे पर मिट्टी। छोटी परी जो समझे पशु भाषा, शायद इसीलिए वो लड़की चुप थी क्योंकि उसे सब कुछ समझ आ रहा था। गाँव वाले हैरान थे, कोई वीडियो बना रहा था, कोई बस तमाशबीन बना खड़ा था।
वो लड़की बस चुपचाप खड़ी थी, उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी। शायद उसे सब कुछ पता था। माँ रो रही थी, चीख रही थी, पर वो लड़की नहीं हिली। छोटी परी जो समझे पशु भाषा, शायद यही वजह थी कि वो लड़की जानवरों की तरह चुप थी। सूट वाले आदमी ने उसे गले लगाया, पर उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। वो बस अपने बाप के सहारे खड़ी रही।