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छोटी परी जो समझे पशु भाषावां7एपिसोड

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छोटी परी जो समझे पशु भाषा

आदित्य एक उदास अमीर आदमी था, वह मरना चाहता था। एक छोटी लड़की ने उसे बचा लिया। उसने लड़की को गोद लिया और बहुत प्यार किया। वह लड़की जानवरों की भाषा समझती थी। उसने आदित्य को बचाया, उसके दादा को बचाया, एक खोया बच्चा ढूंढा और कई लोगों को बचाया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

बेटी की पसंद ही कानून है

इस वीडियो में बाप बेटी का रिश्ता बहुत प्यारा लगा। जब बेटी ने खाना खाने से मना किया तो पिता ने तुरंत समझ लिया और उसे जबरदस्ती नहीं खिलाया। फिर जब नई महिलाएं आईं तो बेटी ने अपनी पसंद जाहिर की। छोटी परी जो समझे पशु भाषा वाली कहानी में भी बच्चों की भावनाओं को इतनी अहमियत नहीं दी जाती जितनी इस ड्रामे में दी गई है। पिता का बेटी के इशारे पर सब कुछ छोड़ देना सच्चे प्यार की मिसाल है।

नौकरानी का अहंकार टूटा

काले कपड़े वाली महिला का व्यवहार शुरू से ही घमंडी लग रहा था। उसने बच्ची को तोहफा देने की कोशिश की लेकिन बच्ची ने उसे ठुकरा दिया। फिर जब उसने लाल लिफाफा देने की बात की तो पापा ने साफ मना कर दिया। यह देखकर बहुत अच्छा लगा कि अमीर घराने में भी इज्जत कमाई जाती है, थोपी नहीं जाती। छोटी परी जो समझे पशु भाषा वाले किरदारों की तरह यहाँ भी बच्ची की मासूमियत ने बड़ों की चालाकी को हरा दिया।

सौतेली माँ का डर

जब पापा ने बेटी को गोद में उठाया तो काले कपड़े वाली महिला के चेहरे का रंग बदल गया। उसे लगा शायद उसकी जगह खतरे में है। लेकिन असल में तो बस बेटी की पसंद मायने रखती है। सफेद कुर्ती वाली महिला बहुत शांत और विनम्र लगी, शायद इसलिए बच्ची ने उसे चुना। छोटी परी जो समझे पशु भाषा वाली फिल्मों में जानवरों की भाषा समझना जादू होता है, यहाँ बच्ची की आँखें सब कुछ समझती हैं।

लाल लिफाफे का खेल

बूढ़े आदमी ने जब लाल लिफाफा निकाला तो लगा शायद कोई त्योहार है या कोई खास मौका। लेकिन फिर पता चला कि यह नई माँ को चुनने का हिस्सा है। काले कपड़े वाली महिला को लगा वह जीत गई है लेकिन बच्ची ने सफेद कुर्ती वाली का हाथ पकड़ लिया। यह पल बहुत इमोशनल था। छोटी परी जो समझे पशु भाषा वाली कहानियों में भी बच्चे सही इंसान को पहचान लेते हैं, वैसे ही यहाँ भी हुआ।

पिता का समर्पण

इस वीडियो में सबसे अच्छी बात यह लगी कि पिता ने अपनी बेटी की खुशी को अपनी खुशी से ऊपर रखा। वह खुद कुछ नहीं बोले, बस बेटी के इशारे का इंतजार करते रहे। जब बेटी ने सफेद कुर्ती वाली को चुना तो उन्होंने तुरंत उसे स्वीकार कर लिया। छोटी परी जो समझे पशु भाषा वाली कहानियों में हीरो अक्सर गलतियाँ करते हैं, लेकिन यहाँ पापा बिल्कुल सही रहे।

बच्ची की मासूम चालाकी

बच्ची बहुत होशियार लगी। उसने शुरू में खाना नहीं खाया, फिर जब नई महिलाएं आईं तो उसने अपनी पसंद जाहिर की। काले कपड़े वाली महिला को उसने नजरअंदाज किया और सफेद कुर्ती वाली के पास गई। यह देखकर लगा कि बच्चे बड़ों से ज्यादा समझदार होते हैं। छोटी परी जो समझे पशु भाषा वाली फिल्मों में भी बच्चे हीरो होते हैं, वैसे ही यहाँ भी बच्ची ने सबकी धुरी पकड़ ली।

घमंड का अंत

काले कपड़े वाली महिला का घमंड देखकर बहुत गुस्सा आ रहा था। उसने सोचा था कि वह सब कुछ पा लेगी, लेकिन बच्ची ने उसे ठुकरा दिया। जब पापा ने बेटी को गोद में उठाया तो उस महिला का चेहरा देखने लायक था। छोटी परी जो समझे पशु भाषा वाली कहानियों में विलेन का अंत ऐसे ही होता है। यहाँ भी घमंडी महिला को सबक मिल गया।

सफेद कुर्ती की जीत

सफेद कुर्ती वाली महिला बहुत शांत और विनम्र लगी। उसने कोई दिखावा नहीं किया, बस चुपचाप खड़ी रही। लेकिन बच्ची ने उसे चुन लिया। यह साबित करता है कि अच्छाई और विनम्रता हमेशा जीतती है। छोटी परी जो समझे पशु भाषा वाली फिल्मों में भी अच्छे किरदार हीरो होते हैं। यहाँ भी सफेद कुर्ती वाली हीरोइन बन गई।

खाने से लेकर माँ तक

वीडियो की शुरुआत खाने से होती है और अंत नई माँ के चुने जाने पर होता है। यह दिखाता है कि बच्चे की जरूरतें सिर्फ खाने तक सीमित नहीं होतीं, उन्हें प्यार और सही मार्गदर्शन की भी जरूरत होती है। पापा ने यह बहुत अच्छे से समझा। छोटी परी जो समझे पशु भाषा वाली कहानियों में भी बच्चों की भावनाओं को समझना जरूरी होता है, वैसे ही यहाँ भी पापा ने बेटी की भावनाओं को समझा।

गोद में उठाने का पल

जब पापा ने बेटी को गोद में उठाया तो पूरा माहौल बदल गया। बेटी ने पापा के गले लगकर उन्हें प्यार किया और काले कपड़े वाली महिला को घूरकर देखा। यह पल बहुत पावरफुल था। छोटी परी जो समझे पशु भाषा वाली फिल्मों में भी ऐसे पल होते हैं जब हीरो अपनी ताकत दिखाता है। यहाँ पापा ने अपनी बेटी के लिए अपनी ताकत दिखाई।