सूरज का बेटे को लेकर भागना और फिर कार से उतरना, यह सीन बहुत ही ड्रामेटिक था। लगता है कि अर्जुन के पिता को किसी बात का बहुत डर है। बच्चे की मासूमियत और पिता की घबराहट के बीच का तनाव बहुत अच्छे से दिखाया गया है। छोटी परी जो समझे पशु भाषा वाले सीन में भी ऐसा ही माहौल था जहां बच्चों की सुरक्षा सबसे ऊपर थी।
हरा सूट पहने उस शख्स का बच्ची के साथ व्यवहार बहुत ही कोमल और पिता जैसा लगा। जब वह घुटनों पर बैठकर उससे बात करता है, तो लगता है कि वह उसे समझाने की कोशिश कर रहा है। यह रिश्ता बहुत गहरा लग रहा है। छोटी परी जो समझे पशु भाषा में भी हीरो का बच्चों से ऐसा ही लगाव दिखाया गया था जो दिल को छू लेता है।
बाग़ीचे में पार्टी का सीन बहुत खूबसूरत था, लेकिन वहां भी तनाव बना हुआ है। सूरज और हरे सूट वाले शख्स के बीच की चुप्पी कुछ बड़ा इशारा कर रही है। बच्चे भी इस माहौल को महसूस कर रहे हैं। छोटी परी जो समझे पशु भाषा वाले एपिसोड में भी पार्टी के सीन में कुछ ऐसा ही रहस्य छिपा था जो धीरे-धीरे खुलता है।
अर्जुन के चेहरे पर जब सवाल थे और वह अपने पिता को देख रहा था, तो लगा कि बच्चा सब समझ रहा है। बच्चों की मासूमियत को इस तरह दिखाना बहुत मुश्किल होता है, लेकिन यहां एक्टर ने बहुत अच्छा किया है। छोटी परी जो समझे पशु भाषा में भी बच्चों के रिएक्शन बहुत नेचुरल थे जो कहानी को आगे बढ़ाते हैं।
चाची सीमा का बच्ची के सिर पर हाथ रखना और उसे सहलाना, यह सीन बहुत इमोशनल था। लगता है कि वह बच्ची को किसी मुसीबत से बचाना चाहती हैं। औरतों का यह किरदार बहुत मजबूत दिखाया गया है। छोटी परी जो समझे पशु भाषा में भी मां और चाची का किरदार बहुत अहम था जो कहानी की रीढ़ बना हुआ है।
वह गंजा आदमी जो वाइन का गिलास लिए खड़ा है, उसकी आवाज और हावभाव से लगता है कि वह किसी को धमकी दे रहा है। उसका हंसना भी डरावना लग रहा है। यह विलेन वाला किरदार बहुत दमदार लग रहा है। छोटी परी जो समझे पशु भाषा में भी विलेन का ऐसा ही खतरनाक अंदाज था जो दर्शकों को बांधे रखता है।
अर्जुन और उसकी दोस्त का एक साथ खड़े होना और एक दूसरे का साथ देना बहुत प्यारा लगा। बच्चों की दोस्ती में कोई स्वार्थ नहीं होता, यह सीन उसी को दर्शाता है। वे दोनों मिलकर इस मुसीबत का सामना करेंगे। छोटी परी जो समझे पशु भाषा में भी बच्चों की दोस्ती बहुत खास थी जो बड़ों के लिए मिसाल बन गई थी।
सूरज के चेहरे पर जब पछतावा और घबराहत थी, तो लगा कि उसने कोई बड़ी गलती कर दी है। उसका बेटे का हाथ पकड़ना और फिर छोड़ना, यह सब उसकी मानसिक स्थिति को दिखा रहा है। छोटी परी जो समझे पशु भाषा में भी एक पिता का ऐसा ही पछतावा दिखाया गया था जो बहुत दर्दनाक होता है।
हरा सूट पहने उस शख्स का हर एक्शन बहुत कैलकुलेटेड लग रहा है। वह बच्ची को समझा रहा है या फिर कोई वादा कर रहा है, यह साफ नहीं है। उसकी आंखों में एक अलग ही चमक है। छोटी परी जो समझे पशु भाषा में भी हीरो का ऐसा ही रहस्यमयी अंदाज था जो दर्शकों को कन्फ्यूज करता है लेकिन पसंद आता है।
सजावट और खुशियों के बीच भी खतरे का साया बना हुआ है। लोग हंस रहे हैं लेकिन माहौल में तनाव है। यह विरोधाभास बहुत अच्छे से दिखाया गया है। लगता है कि कुछ बड़ा होने वाला है। छोटी परी जो समझे पशु भाषा में भी एक पार्टी के सीन में बहुत बड़ा ट्विस्ट आया था जो सबकी उम्मीदें तोड़ गया था।