शुरू में ही तीन लोग आग की लपटें छोड़ रहे थे, यह दृश्य देखकर रोंगटे खड़े हो गए। ज़ॉम्बी बना, दुनिया बदली में ऐसे एक्शन सीन्स बहुत कम देखने को मिलते हैं। जब आग से ज़ॉम्बी जल रहे थे, तो लगा कि अब इंसानियत बच सकती है। लेकिन भीड़ इतनी ज्यादा थी कि सांस रुक गई। वीएफएक्स शानदार थे और हर फ्रेम में तनाव बना रहा। नेटशॉर्ट ऐप पर यह देखना सही फैसला था।
उस सिपाही का कवच और हाथ में पकड़ा डिवाइस बहुत रहस्यमयी लगा। ज़ॉम्बी बना, दुनिया बदली की कहानी में वह अकेला ही भीड़ से लड़ रहा था। उसकी आंखों में गुस्सा और डर दोनों साफ दिख रहे थे। जब उसने लाल स्क्रीन वाले यंत्र को देखा, तो लगा कोई बड़ी योजना चल रही है। उसकी वर्दी और हथियार पुराने जमाने जैसे थे पर टेक्नोलॉजी नई थी। यह मिश्रण बहुत अच्छा लगा।
सड़क पर जब बिजली गिरी और ज़ॉम्बी उड़ गए, वह पल सिनेमाई था। ज़ॉम्बी बना, दुनिया बदली में ऐसे सुपरनैचुरल एलिमेंट्स कहानी को नया मोड़ देते हैं। बसों के ऊपर से कूदते हुए भूतिया साये देखकर डर लगा। धूल और धुएं के बीच वह नीली रोशनी सब कुछ बदल गई। लगता है कि कुछ लोग साधारण इंसान नहीं हैं। यह शो हर मोड़ पर हैरान करता है।
उस लड़के के नीले बाल और चेहरे पर खरोंच देखकर लगा वह किसी बड़ी मुसीबत में है। ज़ॉम्बी बना, दुनिया बदली में उसका फोन पर नंबर देखना बहुत सस्पेंस बना रहा। तीन तीन आठ का नंबर क्या इंगित करता है? वह लड़की उसके पास खड़ी थी पर वह कुछ बोल नहीं रहा था। कमरे का माहौल भी बहुत डरावना था। पुरानी दीवारें और सामान बिखरा हुआ था।
वह लड़की कंप्यूटर के सामने बैठकर सब कुछ कंट्रोल कर रही थी। ज़ॉम्बी बना, दुनिया बदली में उसका किरदार बहुत शक्तिशाली लगा। उसके गले में क्रॉस और कान में बाली स्टाइलिश थी। जब उसने वाइन की बोतल साफ की, तो लगा उसे किसी बात की चिंता नहीं है। उसकी आंखों में एक अलग ही चमक थी। वह सिर्फ देख नहीं रही थी, बल्कि खेल रही थी।
पृष्ठभूमि में जो टूटी हुई इमारतें थीं, उन्होंने माहौल बहुत गंभीर कर दिया। ज़ॉम्बी बना, दुनिया बदली की सेटिंग बिल्कुल पोस्ट एपोकैलिप्टिक है। खिड़कियां टूटी हुई थीं और दीवारें काली पड़ गई थीं। जब लोग भाग रहे थे, तो लगा शहर वीरान हो चुका है। इस तबाही के बीच लड़ना आसान नहीं है। डायरेक्टर ने जगह का सही इस्तेमाल किया है।
तीन लोग मिलकर आग चला रहे थे, यह टीम वर्क देखने लायक था। ज़ॉम्बी बना, दुनिया बदली में अकेले लड़ने वाले भी थे पर टीम ज्यादा प्रभावशाली लगी। एक लड़की और दो लड़के मिलकर दुश्मन का सामना कर रहे थे। उनकी आंखों में डर नहीं बल्कि जुनून था। जब वे एक साथ चलते हैं, तो जीत की उम्मीद बढ़ जाती है। ऐसे दोस्त मुश्किल वक्त में काम आते हैं।
उस सिपाही के हाथ में जो लाल डिवाइस था, वह किसी रेडियो जैसा लग रहा था। ज़ॉम्बी बना, दुनिया बदली में संचार व्यवस्था अभी भी चल रही है यह अच्छी बात है। वह किसी से बात कर रहा था और उसका चेहरा तनावपूर्ण था। शायद ऊपर से कोई आदेश दे रहा था। उस डिवाइस की टेक्नोलॉजी आगे की लग रही थी। यह छोटी चीजें कहानी को गहराई देती हैं।
जब उस लड़के के कंधे पर खून लगा था, तो दर्द साफ झलक रहा था। ज़ॉम्बी बना, दुनिया बदली में हिंसा का स्तर काफी ज्यादा है। उसकी आंखों में चीख थी पर आवाज नहीं निकल रही थी। कपड़े फटे हुए थे और शरीर पर चोट के निशान थे। यह युद्ध कोई खेल नहीं है बल्कि जिंदगी और मौत की लड़ाई है। हर घाव एक कहानी कह रहा था।
अभी तो बस शुरुआत लग रही है, पर कहानी में बहुत दम है। ज़ॉम्बी बना, दुनिया बदली के अगले एपिसोड का इंतजार नहीं हो रहा है। क्या वह लड़की सबकी दुश्मन है या दोस्त? उस सिपाही का मिशन क्या है? सवाल बहुत हैं और जवाब कहीं नहीं। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे शो देखना सुकून देता है। उम्मीद है जल्द ही सब कुछ साफ होगा।