इस कहानी में तनाव बहुत गहरा है। जब वह लाल साड़ी वाली महिला के पास पहुंचता है, तो लगता है कि उसकी जान में जान आई है। झूठी कसम, सच्ची लगन की कहानी में ऐसा मोड़ किसी ने नहीं सोचा था। उसकी आंखों में डर और चाहत दोनों साफ दिख रहे हैं। देखने वाला हर पल बंधा रहता है।
उसके हाथ पर लाल निशान देखकर मैं घबरा गई थी। क्या किसी ने उसे जहर दिया है? यह रहस्य मुझे सुलझाना ही होगा। काले कोट वाली महिला की चालें बहुत संदिग्ध लग रही हैं। ऐसे में लाल पोशाक वाली नायिका का आगमन किसी वरदान से कम नहीं था। बिल्कुल झूठी कसम, सच्ची लगन जैसा महसूस हुआ।
रोमांस का यह दृश्य दिल को छू गया। जब वे दोनों करीब आए, तो समय थम सा गया। बिस्तर पर वह पल बहुत ही खूबसूरत था। बिना किसी शब्द के उनके इशारे सब कह रहे थे। ऐसी बनावट पर्दे पर कम ही देखने को मिलती है। मुझे यह जोड़ी बहुत पसंद आई। झूठी कसम, सच्ची लगन में ऐसा पल बार बार आए।
सुबह का दृश्य बहुत मासूमियत भरा था। दूध का गिलास लेकर वह खड़ी थी, और वह बिना कमीज के था। सूरज की रोशनी कमरे में ऐसे पड़ रही थी जैसे किसी चित्रकला में हो। झूठी कसम, सच्ची लगन में ऐसे पल बार-बार देखने को मिलते हैं। यह शांति टूटने वाली है क्या?
फोन की घंटी ने सब खराब कर दिया। फोन पर किसी का नाम था। यह सवाल अब दिमाग में घूम रहा है। उसकी मुस्कान अचानक गायब हो गई। क्या बीत गया कोई राज छिपा है? कहानी में यह मोड़ बहुत जरूरी था। अब आगे क्या होगा यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई है। झूठी कसम, सच्ची लगन का इंतज़ार है।
काले कोट वाली महिला की मुस्कान में कुछ खतरनाक था। उसने उसे छूकर क्या किया? क्या वही उसकी बीमारी का कारण है? यह रहस्य मुझे सोने नहीं दे रहा। लाल पोशाक वाली ने उसे बचाया या फिर कुछ और है? झूठी कसम, सच्ची लगन का हर भाग नया सवाल खड़ा करता है।
कार्टून की बनावट बहुत ही शानदार है। रोशनी और परछाइयों का खेल कमाल का है। खासकर जब वे चुंबन के लिए झुकते हैं, तो पीछे का दृश्य धुंधला हो जाता है। यह दृश्य बहुत ही फिल्म जैसा लगा। तकनीकी पक्ष से भी यह निर्माण बहुत मजबूत है। देखने में बहुत सुकून मिलता है। झूठी कसम, सच्ची लगन।
नायक की हालत देखकर तरस आ रहा था। पसीने से तरबतर और डरा हुआ। फिर भी उसने उस महिला का हाथ थाम लिया। यह भरोसा टूटने वाला नहीं है। उनकी आंखों में जो बात थी वह शब्दों में बयां नहीं हो सकती। झूठी कसम, सच्ची लगन की यही खासियत है। भावनाएं बहुत गहराई से दिखाई गई हैं।
कहानी की रफ्तार बहुत सही है। न बहुत तेज न बहुत धीमी। हर दृश्य के बाद एक नया खुलासा होता है। बिस्तर से उठने के बाद का माहौल बहुत नाजुक है। क्या वह फोन उनकी दुनिया हिला देगा? मुझे लगता है कि अब असली खेल शुरू होने वाला है। बहुत बेचैनी हो रही है। झूठी कसम, सच्ची लगन।
अंत में जब वह मुस्कुराई, तो लगा सब ठीक हो जाएगा। लेकिन वह फोन सब बदल सकता है। लाल पोशाक वाली महिला बहुत खूबसूरत लग रही थी। उसके गहने और माथे की पट्टी बहुत सूट कर रहे थे। झूठी कसम, सच्ची लगन में ऐसे दृश्य सुंदरता आम बात हैं। मैं अगला भाग कब देखूं?