उस पुराने कमरे में तनाव इतना था कि सांस रुक जाए। डॉक्टर जब नर्स के पास चाकू लेकर आया तो बहुत डर लग रहा था। बिल्कुल उम्मीद टूट रही थी कि हीरो का प्रवेश हुआ। झूठी कसम, सच्ची लगन में ऐसे मोड़ बारिश की तरह आते हैं। खिड़की से आती रोशनी ने दृश्य को और डरावना बना दिया। नर्स की आंखों में जो डर था वो साफ दिख रहा था।
काले सूट और फूलों वाली शर्ट पहने लड़के का प्रवेश किसी सपने जैसी था। एक ही मुक्के में उस बदमाश डॉक्टर को नीचे गिरा दिया। आखिरकार नर्स के लिए कोई तो लड़ने वाला आया। झूठी कसम, सच्ची लगन देखते वक्त ऐसा लगता है जैसे रोमांचक सफर पर हूं। उसका अंदाज़ बहुत यूनिक था। सुरक्षा का भाव सच में दिल जीत लेता है।
डॉक्टर को घुटनों पर गिरते और भीख मांगते देख बहुत संतोष मिला। उसे लगा था चाकू से वो ताकतवर है। लेकिन न्याय बहुत तेजी से आया। झूठी कसम, सच्ची लगन में किरदारों का बदलाव कमाल का है। हमलावर से भीख मांगने वाले तक का सफर। चेहरे पर खून देख असलियत समझ आई। कर्म का फल मिला उसे।
नर्स की आंखों में शुरू में बहुत दर्द और डर था। जब हीरो आया तो राहत साफ दिखी। बाद में उसने खुद को कसकर पकड़ लिया, आघात साफ था। झूठी कसम, सच्ची लगन में महिलाओं की कमजोरी को अच्छे से दिखाया। अंत में मिली तसल्ली बहुत जरूरी थी। उसे उस सहारे की बहुत जरूरत थी।
पीछे बनी रंगीन खिड़की बहुत खूबसूरत पर डरावनी थी। हिंसा के बीच ये विरोधाभास गजब था। परछाइयों ने डॉक्टर के चेहरे को और डरावना बनाया। झूठी कसम, सच्ची लगन की कला निर्देशना शानदार है। दवाइयों की शेल्फों ने घुटन पैदा की। नर्स के लिए ये कमरा जाल जैसा था।
हीरो ने जब फोन दिखाया तो डॉक्टर का चेहरा उतर गया। वो संदेश ही खेल बदलने वाला था। ताकत का संतुलन पलक झपकते बदल गया। झूठी कसम, सच्ची लगन में तकनीक का इस्तेमाल कहानी में अच्छा है। डॉक्टर को समझ आ गया वो फंस गया है। अब छुपने की कोई जगह नहीं बची।
वो मुक्का बहुत भारी लगा बिना आवाज के भी। चश्मा हवा में उड़ता हुआ एकदम सही था। यही चरमोत्कर्ष हमें चाहिए था। झूठी कसम, सच्ची लगन संघर्ष को मक्खन की तरह दिखाता है। हीरो ने नर्स को बचाने में देर नहीं लगाई। उसकी आंखों में डॉक्टर के लिए गुस्सा साफ था।
अंत में हीरो ने नर्स को जिस तरह देखा वो कोमल था। इतनी हिंसा के बाद ये शांत पल मायने रखता है। उनका रिश्ता धीरे धीरे बन रहा है। झूठी कसम, सच्ची लगन संघर्ष और प्रेम का संतुलन बनाता है। उसने कंधे पर हाथ रखकर हिम्मत दी। उसने उस पर तुरंत भरोसा किया।
डॉक्टर के खूनी चेहरे का करीबी दृश्य बहुत तीव्र था। वो अजीब मुस्कान से डर तक पहुंच गया। अभिनय बेहतरीन था। झूठी कसम, सच्ची लगन गंदगी से नहीं घबराता। उसके लालच ने उसे बर्बाद किया। कर्म ने उस कमरे में उसे कड़ा सबक दिया।
इस कड़ी में मोड़ ही मोड़ थे। उत्पीड़न से बचाव और फिर सबूत तक। स्क्रीन से नजर नहीं हटी। झूठी कसम, सच्ची लगन मेरा पसंदीदा बनता जा रहा है। रफ़्तार तेज थी पर कहानी साफ थी। जानना चाहती हूं आगे उनके बीच क्या होगा।