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(डबिंग) तुम थे मेरी कायनातवां46एपिसोड

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(डबिंग) तुम थे मेरी कायनात

नैना वर्मा, सिंघानिया के ड्राइवर की बेटी, सात साल अद्वैत से प्रेम किया। एक रात वह उसकी गुप्त प्रेमिका बनी, दो साल सेवा की। सोनम के लौटते ही ठुकराई गई, शोध चुराया गया, सीढ़ियों से गिरा दिए जाने पर भी थप्पड़ खाया। टूटकर विदेश चली गई। तीन साल बाद नोबेल विजेता प्रोफ़ेसर आइवी बनकर लौटी। पछताता अद्वैत उसे ढूँढता है, पर वह कबीर मल्होत्रा के साथ नया जीवन जी रही है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

सफेद कोट वाले का रौब

सफेद कोट वाले का प्रवेश ही धांसू था। जब उसने बेज कोट वाले को मुक्का मारा, तो मज़ा आ गया। प्रोफ़ेसर आइवी की सुरक्षा के लिए उसने जो किया, वो सही था। कार्ड देकर अपमान करना भी कम नहीं था। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात में ऐसे दृश्य देखने को मिलते हैं जो दिल को छू लेते हैं। गुस्सा और इज़्ज़त दोनों का ख्याल रखा गया है। बहुत ही दमदार अभिनय है।

आइवी का डर और हिम्मत

आइवी के चेहरे पर डर साफ़ दिख रहा था। दोनों के बीच की रसायन विज्ञान बहुत गहरी लग रही है। सफेद कोट वाला शख्स उसे बचाने के लिए कुछ भी कर सकता है। कार वाले दृश्य में उसकी देखभाल वाली बातें प्यारी लगीं। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात की कहानी में यह मोड़ बहुत जरूरी था। महिला किरदार की मजबूती भी दिखाई दी। देखने वालों को यह पसंद आएगा।

घमंड का अंत

बेज कोट वाले का घमंड टूटते ही देखा। पहले वह धमकी दे रहा था, फिर ज़मीन पर गिरा हुआ था। कबीर मल्होत्रा का नाम कार्ड पर देखकर उसका चेहरा बदल गया। बदले की आग उसकी आँखों में साफ़ थी। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात में विलेन का ऐसा रिएक्शन देखना आम बात है। सजा मिलनी चाहिए थी उसे। अगले भाग का इंतज़ार रहेगा।

कार वाला सीन

काली कार का दृश्य बहुत शानदार लगा। सफेद कोट वाले ने दरवाज़ा खोला और आइवी को बैठाया। यह छोटी सी बात बड़ी लगती है। अंदर बातचीत में नरमी थी। डरने की बात नहीं कहकर उसने हिम्साई। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात में रोमांस और संघर्ष का संतुलन बहुत अच्छा है। गाड़ी चलते ही वह पीछे छूट गया। दृश्य संयोजन भी शानदार है।

भारी संवाद

संवाद बहुत भारी थे। समाज के कचरे वाले संवाद ने रोंगटे खड़े कर दिए। सफेद कोट वाले की आवाज़ में दम था। बेज कोट वाला चुपचाप सुनता रहा। फिर मुक्का पड़ा तो शोर मच गया। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात की डबिंग में जान है। हर शब्द वजनदार लगता है। संवादों ने कहानी को आगे बढ़ाया। यह दृश्य याद रहेगा।

कार्ड का खेल

कार्ड फेंकने वाला अंदाज़ बहुत रौबदार था। इलाज का खर्च कहकर उसने ताना मारा। बेज कोट वाले ने कार्ड उठाया और नाम पढ़ा। कबीर मल्होत्रा को पहचानकर वह कांप गया। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात में सत्ता संतुलन ऐसे ही दिखाए गए हैं। पैसे और ताकत का खेल चल रहा है। नाटक बहुत तेज़ है।

भावनात्मक पल

आइवी की आँखों में आँसू थे पर वह रोई नहीं। सफेद कोट वाले ने उसे सहारा दिया। यह रिश्ता क्या है, यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई। कार में चुप्पी थी पर बातें बहुत थीं। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात में भावनाओं को बहुत खूबसूरती से पिरोया गया है। दर्शक खुद को इसमें पाते हैं। बहुत ही भावनात्मक सफर है।

मुकाबले की बनावट

मुकाबला छोटा था पर असरदार था। एक ही मुक्के में बेज कोट वाला गिर गया। सफेद कोट वाले की कसरत साफ़ झलकती है। कपड़े गंदे हुए पर फर्क नहीं पड़ा। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात में झगड़ों की गुणवत्ता अच्छी है। लड़ाई की बनावट सही थी। ज़मीन पर गिरने का अभिनय भी बेहतरीन था। दर्शक तालियां बजाएंगे।

रहस्य बना हुआ

दोनों के बीच का रिश्ता अभी साफ़ नहीं है। सफेद कोट वाला क्यों बचा रहा है? आइवी की प्रोफ़ेसर वाली छवि भी दिलचस्प है। कबीर मल्होत्रा का नाम सुनकर सब हैरान थे। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात में रहस्य बना हुआ है। अगले भाग में क्या होगा, यह सोचने पर मजबूर कर देता है। कहानी में मोड़ अच्छे हैं।

निर्माण की बारीकी

पूरा दृश्य तनाव से भरा था। कमरे की रोशनी और कपड़ों का रंग मैच कर रहा था। बेज और सफेद का मेल अच्छा लगा। अंत में गाड़ी का जाना चरमोत्कर्ष था। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात की निर्माण गुणवत्ता ऊंची है। हर झलक सुंदर है। देखने का अनुभव बहुत अच्छा रहा। ऐसे कार्यक्रम बार बार देखने को मिलें।