वरुन ने कहा कि अगर मिस्टर खन्ना बीच में नहीं आते, तो वो कुकिंग का बेताज बादशाह होता! लेकिन असल में तो वो बस एक धोखेबाज था। मिहिर की घबराहट और मिस्टर खन्ना की शांति देखकर लगता है कि असली टेस्ट तो इंसानियत में होता है। (डबिंग) बदले की आग में पका खाना देखकर दिल धड़कने लगा!
जब वरुन ने कहा कि ये सब झूठ है, तो लगा कि ये सिर्फ कुकिंग शो नहीं, झूठ का नाटक है! मिहिर की घबराहट और मिस्टर खन्ना की शांति देखकर लगता है कि असली टेस्ट तो इंसानियत में होता है। (डबिंग) बदले की आग में पका खाना देखकर आंखें नम हो गईं।
मिहिर ने कहा कि वो वरुन के खिलाफ गवाही देगा — लेकिन असल में तो वो बस डरा हुआ था! वरुन की चालाकी और मिस्टर खन्ना की शांति देखकर लगता है कि असली टेस्ट तो इंसानियत में होता है। (डबिंग) बदले की आग में पका खाना देखकर दिल धड़कने लगा!
जब वरुन ने मिस्टर खन्ना को फंसाने के लिए डिश बदल दी, तो लगा कि ये सिर्फ खाना नहीं, बदले की आग है! मिहिर की घबराहट और मिस्टर खन्ना की शांति देखकर लगता है कि असली टेस्ट तो इंसानियत में होता है। (डबिंग) बदले की आग में पका खाना देखकर दिल धड़कने लगा!
जब वरुन ने कहा कि वो कुकिंग का बेताज बादशाह होता, तो लगा कि ये सिर्फ कुकिंग शो नहीं, बदले की आग है! मिहिर की घबराहट और मिस्टर खन्ना की शांति देखकर लगता है कि असली टेस्ट तो इंसानियत में होता है। (डबिंग) बदले की आग में पका खाना देखकर आंखें नम हो गईं।
मिहिर ने खुद को सु-शेफ कहलाने से मना कर दिया — और सही किया! क्योंकि जो इंसान अपने गुरु के खिलाफ गवाही दे, वो शेफ नहीं, धोखेबाज होता है। वरुन की चालाकी और मिस्टर खन्ना की गरिमा देखकर लगता है कि असली स्वाद तो इंसानियत में होता है। (डबिंग) बदले की आग में पका खाना देखकर आंखें नम हो गईं।
जब एफबीआई वाले आए और वरुन को गिरफ्तार किया, तो लगा कि ये कोई कुकिंग शो नहीं, क्राइम थ्रिलर है! लेकिन असल में तो ये सब एक प्लान था — मिस्टर खन्ना को फंसाने का। मिहिर की घबराहट और वरुन की चालाकी देखकर लगता है कि हर डिश में कोई न कोई झूठ छुपा होता है। (डबिंग) बदले की आग में पका खाना देखकर सांस रुक गई!
जब वरुन ने मिस्टर खन्ना को फंसाने के लिए डिश बदल दी, तो लगा कि ये सिर्फ खाना नहीं, बदले की आग है! मिहिर की घबराहट और मिस्टर खन्ना की शांति देखकर लगता है कि असली टेस्ट तो इंसानियत में होता है। (डबिंग) बदले की आग में पका खाना देखकर दिल धड़कने लगा!
मिहिर ने खुद को सु-शेफ कहलाने से मना कर दिया — और सही किया! क्योंकि जो इंसान अपने गुरु के खिलाफ गवाही दे, वो शेफ नहीं, धोखेबाज होता है। वरुन की चालाकी और मिस्टर खन्ना की गरिमा देखकर लगता है कि असली स्वाद तो इंसानियत में होता है। (डबिंग) बदले की आग में पका खाना देखकर आंखें नम हो गईं।
जब वरुन बोहरा ने फाइनल राउंड में डिश बदल दी, तो सबको लगा ये सिर्फ कुकिंग कॉम्पिटिशन है। लेकिन असल में तो ये बदले की आग थी! मिस्टर खन्ना की शांति और मिहिर की घबराहट देखकर लगता है कि हर रसोई में कोई न कोई राज़ छुपा होता है। (डबिंग) बदले की आग में पका खाना देखकर दिल धड़कने लगा!